, ,

कंप्‍यूटर साइंस ग्रेजुएट ने 20 साल की उम्र में खड़ा कर दिया ‘बिना मिट्टी के फार्मिंग’ का कारोबार

कुछ अलग करने का जुनून अगर मन में हो तो जीवन भी अनेक अवसर प्रदान करता है। बुद्धिमता की असली परीक्षा तब होती है जब आप सही अवसर का सही समय पर फायदा उठाने में सफल हों। मात्र 20 वर्ष की उम्र में जो युवा यह कर पाने में सक्षम हो तो उसके उज्जवल भविष्य की कल्पना की जा सकती है।

गुड़गांव हरियाणा के गांव सैदपुर फर्रुखनगर के रहने वाले विपिन यादव ने कंप्यूटर साइंस में बीएससी करने के बाद जब नौकरी की तलाश शुरू की तो सैलरी पैकेज उन्हें अपनी काबिलियत के अनुरूप नहीं लगे। खेती में भविष्य की संभावना को देखकर अपने एक दोस्त की सहायता से फूलों की खेती की ट्रेनिंग ली और रूख कर लिया गुड़गांव की जमीन पर बनी छतों की ओर बिना मिट्टी के फूलों की टेरेस फार्मिंग की शुरुआत करने।

छत पर बने पॉलीहाउस में वह प्रोडक्शन कर रहे हैं। फूलों की मांग वाले क्षेत्र में गुड़गांव में विपिन ने किराए की जगह लेकर फूलों का उत्पादन शुरू किया है। जगह का किराया निकाल देने के बाद वह 25 से 30 हजार रूपए महीना कमा रहे हैं। 800 स्क्वायर फीट में नए प्रोजेक्ट की शुरुआत भी विपिन करने जा रहे हैं जिसमें प्राकृतिक वेंटिलेशन, कूलिंग एवं हीटिंग पैड का प्रयोग करके वह हाईटेक नर्सरी प्रोडक्ट्स बनाएंगे जो हर मौसम में उपलब्ध रहेंगे। इस प्लांट से विपिन के मुनाफे में एक से डेढ़ लाख तक का इज़ाफा होगा।

फूलों की अनेकों प्रजातियां अनेकों रंगों में विपिन ने अपनी नर्सरी में लगाई है। इतना ही नहीं वे नज़दीकी नर्सरी में भी प्रो ट्रे बना कर सप्लाई करते हैं, एक प्रो ट्रे में 102 होल्स होते हैं।

केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में विपिन ने बताया कि कोकोपीट यानि नारियल का बुरादे, परलाइक और बर्मीको लाइट को 3,1,1 के भाग में मिलाकर प्रो ट्रे में डालकर बेड बनाया जाता है और सैप्‍लिंगस को उठाकर ट्रे में लगा दिया जाता है। एक डेढ़ महीने तक दो-तीन दिन में एक बार पानी देकर इनकी देखभाल की जाती है। ट्रे में जर्मिनेशन होने के बाद खेतों में रोपित होने के लिए पौधे तैयार हो जाते हैं। वैसे ज्यादातर पौधे  प्रो ट्रे की स्थिति में ही बिक जाते हैं।

 

अब कंप्यूटर साइंस का यह ग्रैजुएट खेती में ही अपना भविष्य देखता है। नई योजनाओं के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए विपिन भरपूर मेहनत कर रहे हैं। फिलहाल विपिन उनके संपर्क में आने वाले इच्छुक लोगों को निशुल्क ट्रेनिंग देकर यह तकनीक सिखा रहे हैं। आगामी 23 से 25 फरवरी में पुणे और सूरजकुंड मेले में भी अपनी इस प्रतिभा को प्रदर्शित करेंगे।

इतना ही नहीं विपिन बड़ी-बड़ी कंपनियों या घरों के लिए लैंडस्केप डिजाइनिंग भी करते हैं जिसमें डिजाइनिंग का कोई शुल्क नहीं लेते सिर्फ मटेरियल का शुल्क लेते हैं। जहां चाह वहां राह की कहावत को चरितार्थ करते हुए विपिन ने करियर की जिन बुलंदियों को छूना शुरु किया है वह आधुनिक युवा पीढ़ी के लिए मिसाल है।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें