,

विकास साठे, जिसने एक बार फिर दुनिया को बता दिया कि रचनात्मकता में भारतीय का लोहा मानना ही पड़ेगा

किसी भी शुरूआत के लिए कोई भी उम्र ज़्यादा नहीं होती और जिंदगी इस बात को बार-बार सही साबित करती है। केएफसी के संस्थापक कर्नल सांडर्स से आईबीएम के जनक चार्ल्स फ्लिंट तक ने इस मिथक को ढहाया है कि बढ़ती हुई उम्र सफलता के लिए रोड़ा होती है।

आज हम उस व्यक्ति की कहानी लेकर आये हैं जिन्होंने इस धारणा को कि बिज़नेस में बड़ी सफलता तभी हासिल की जा सकती है जब उसकी शुरूआत आप अपनी युवा अवस्था में कर लें, बेकार सिद्ध किया है। विकास साठे, ऑस्कर 2018 में साई-टेक अवार्ड जीतने वाली टीम में शामिल 51 वर्षीय इंजीनियर हैं।

1968 में जन्में विकास मुंबई में बड़े हुए। इंस्ट्र्मेंटशन में अपना डिप्लोमा और फिर एमटेक पूरा करने के बाद वे कमिंस कॉलेज ऑफ़ इंजीनियर फॉर वीमेन में पढ़ाने लगे। अपने काम के दौरान फिएट कंपनी के साथ एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में उन्हें इटली भेजा गया। वहां के अनुभवों ने उन्हें एम्बेडेड सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रवेश करने की प्रेरणा दी।

2009 में उन्होंने एम्बेडेड सिस्टम इंजीनियर के बतौर न्यूजीलैंड के क्वींस टाउन स्थित शॉट -ओवर कैमरा सिस्टम्स नाम की कंपनी से जुड़ गए। वहां अपने तीन साल की सेवाओं के दौरान उन्होंने K1  सॉफ्टवेयर विकसित किया। कैमरा सिस्टम विकसित करने वाली टीम में विकास, जॉन कोयली, ब्रैड हर्नडेल और शेन बकहम को मिलाकर चार लीड इलेक्ट्रिकल और सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। उन्होंने मिलकर एक ऐसा विस्तृत सिस्टम बनाया जिसने मोशन पिक्चर्स की दुनिया ही बदल दी।

क्वींस टाउन में जाकर इस कंपनी की स्थापना के पीछे एक बड़ा कारण यह था कि वहां आस-पास प्राकृतिक सुंदरता और मंत्रमुग्ध करने वाली दृश्यवालियों की बहुतयात थी और यह फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं को वहां खींच लाने के लिए पर्याप्त था।”

उनके बनाये गए सिस्टम में कैमरे को माउंट करने के लिए एक ऐसा डिवाइस था जो कैमरा और लेंस से लैस हेलीकॉप्टर के निचले हिस्से से अटैच हो सकता था। इस माउंट का बुनियादी उद्देश्य एक चालू हेलीकॉप्टर के तमाम कम्पनों को कैमरे तक न पहुंचने देना हुआ करता था, और इस तरह जो वीडियो फुटेज कैमरा कैप्चर करता था वह स्थिर कैमरे से लिया गया जैसा होता था। इसका दूसरा उद्देश्य कैमरे को कैमरा ऑपरेटर की इच्छा और जरूरत के मुताबिक दिशा देना होता था।

कैमरा ऑपरेटर हेलीकॉप्टर के भीतर बैठे हुए ही एक जॉय स्टिक की मदद से कैमरे की गति को नियंत्रित कर सकता था। इस एरियल माउंट या गिम्ब्ल को शॉट – ओवर K 1 नाम दिया गया। छह अक्षों पर सुस्थिर यह कैमरा माउंट, सीधे नीचे देखते हुए अच्छे फोटो शॉट्स ले पाने की अतिरिक्त क्षमता के साथ एक ऐसा अविष्कार हो गया जिससे गतिमान कैमरे से भी स्थिर फोटोग्राफी और विडिओग्राफी कर पाने की रचनात्मक स्वतंत्रता मिलने लगी।

शॉट-ओवर K1 कैमरा सिस्टम का इस्तेमाल स्पाइडर मैन, होम कमिंग, डनकर्क, स्पेक्टर, इन्फर्नो जैसे सफल हॉलीवुड फिल्मों और डी डे जैसी बॉलीवुड फिल्म में हुआ है।

विकास और उनकी टीम की यह खोज दुनिया की नजरों में तब चढ़ी जब उन्हें ऑस्कर्स सइंटिफ़िक एंड टेक्निकल अवार्ड 2018 में इंजीनियरिंग अकैडमी अवार्ड से  नवाज़ा गया। विकास ने 42 की उम्र में एक नए  क्षेत्र में अपनी पैठ जमाते हुए अपने अनोखे योगदान  के लिए ऑस्कर जीता। उन्होंने दुनिया को एक बार फिर से दिखा दिया कि अपने चाहत और अपने मंजिल को पाने के लिए अधिक उम्र कोई अड़चन कभी नहीं हो सकती।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें