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ऑटोमोबाइल डिजाइनर के रूप में इस महिला का सफर आपको अपने सपनों का पीछा करने की प्रेरणा देगा

ख़ुद पर हो विश्वास और कर्म पर हो आस्था, फिर तो मुश्किलों में भी मिल ही जाता है रास्ता
कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है, लोग तो तब पीछे आते हैं जब हम कामयाब हो जाते है।

आज के दौर में जब हम कभी लैंगिक असमानता की बातें सुनते है तो ताज्जुब होता है कि इस तरह की निम्न सोच वाले लोगों पर लेकिन इस तरह लड़के और लड़कियों में भेदभाव करने वाले लोगों को हमारे देश की बेटियों ने कदम-कदम पर अपनी क़ाबिलियत के दम पर करारा जवाब दिया हैं। हमारी आज की कहानी भी देश की एक ऐसी ही बेटी फ़राह मोलूभाई की है।

फ़राह ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ऑटो मोटर डिज़ाइनर के रूप में फ़राह का सफ़र बिलकुल आसान नहीं था लेकिन उनकी सफलता ने न जाने कितनी ही लड़कियों के ऑटो मोबाईल इंजीनियर बनने के सपनों को पंख दे दिए हैं।

मूल रूप से मुम्बई में पली-बढ़ी फ़राह के लिए अपने सपने को पूरा करना आसान नहीं था क्योंकि कदम-कदम पर उनके लिए बाधाएं इंतजार कर रही थी। उन्हें रोकने के भरसक प्रयास किये क्योंकि उनका मानना था कि अधिकांश उच्च पदों और नई तकनीक के क्षेत्र में पुरुषों को ही प्राथमिकता दी जाए फिर भले ही महिला समान रूप से कुशल हो।

देश की सबसे कुशल महिला कार डिज़ाइनर फ़राह बताती हैं कि “जब मैं पढ़ रही थी तो मेरे साथ उस समय केवल ऑटो मोबाईल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में केवल तीन लड़कियाँ थी और लड़कों की संख्या 150 के करीब थी। ऐसे में बहुत कठिन था अपने आप को साबित करना लेकिन स्थितियों को बदलने के लिए अपने आप को अलग पहचान दिलाना आवश्यक था। क्योंकि मेरा मिशन इस धारणा को बदलना था कि कार डिज़ाइन करना उसे बनाना केवल पुरुषों का काम है।”

फ़राह ने यूके से अपनी डिग्री पूरी की और नए जोश के साथ भारत लौटी। फ़राह ने केनफ़ोलिओज़ से विशेष बातचीत में बताया कि “जब मैं डिग्री करके भारत लौटी तो यहाँ एक कार डिजाइनर के रूप में एक लड़की होने के कारण मेरे लिए बहुत सी चुनौतियां खड़ी थी और मुझे उन सबको पार करके आगे बढ़ना था यही मेरा लक्ष्य था। और मैं समझ गई थी कि एक लड़की के रूप में कार डिजाइनिंग के क्षेत्र में लोग मुझे आसानी से स्वीकार नही करेंगे लेकिन मैं यह भी जानती थी कि कार कोई लिंग भेद नही करती वह तटस्थ है।”

समाज की इस मानसिकता को बदलने का संकल्प लेकर फ़राह ने अपना काम शुरू किया। शुरुआत में तो लोगों ने साथ काम करने वालों ने तरह तरह के ताने दे कर उनका मज़ाक उड़ाया जिसके पीछे सिर्फ एक कारण था की वो लोग एक महिला को इस क्षेत्र में आगे बढ़ता नही देख पा रहें थे। फ़राह ने बताया कि ” जब मैं क्लाइंट से अपने आइडिया के साथ मिलने जाती वो एक लड़की को अपने सामने देख कर आश्चर्यचकित हो जाते थे क्योंकि उन्हें ये उम्मीद ही नही थी की कोई लड़की भी कार डिजाइनिंग का काम कर सकती हैं।”

फ़राह आज अपनी प्रतिभा के दम पर एक सफल कार डिज़ाइनर तो है ही साथ ही लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत भी हैं। फ़राह का मानना है कि “लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, समाज को अब यह बात समझ आ जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक महिला को अपने आप पर यकीन करना चाहिए और खुले आसमान में सपनों की ऊँची उड़ान भरनी चाहिए। और रही बात आपको कम और कमजोर आंकने वालों की तो अपने काम से उन्हें करारा जवाब दो।”

वाकई फ़राह ने साबित कर दिया की यदि कर्म पर आस्था और खुद पर यकीं हो तो दुनिया का कोई भी काम नामुमकिन नही है। मुश्किलें सब के रास्ते में आती है बस आवश्यकता है तो हिम्मत से उनका सामना करते हुए आगे बढ़ने की।

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