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चाय वाले के बेटे ने अपनी काबिलियत से अनोखा ड्रोन बनाकर डेंगू के खिलाफ़ मुहिम को किया मजबूत

किसी महान विचारक ने कभी कहा था कि, “अगर आप में प्रतिभा है तो आपका परिवेश मायने नहीं रखता है”। वास्तव में अगर आप में कोई मुकाम हासिल करने का माद्दा है तो पारिवारिक माहौल किसी प्रकार का रोड़ा नहीं बन सकता।  आपका हौसला, अगर मजबूत है तो वह विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए आपको मंजिल तक अवश्य पहुंचाता है। हम जानते हैं कि हमारा देश संभावनाओं का देश है, जहाँ पर असीम युवा शक्ति मौजूद है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में तमाम ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिसकी वजह से देश को उनपर नाज़ है। ऐसे ही एक युवा की कहानी हम आपको सुनाएंगे और बताएँगे की किस प्रकार आपकी सफलता आपके परिश्रम पर निर्भर करती है न की आपके सामाजिक परिवेश पर।

सिलीगुड़ी जिले के प्रधान नगर में रहने वाले एक 17 वर्षीय छात्र राजीव घोष ने ऐसा एक ड्रोन बनाया है जिसे सिलीगुड़ी म्युनिसिपल कारपोरेशन अपने उपयोग में लेकर सिलीगुड़ी में मौजूद घरों की छतों पर गंदे जमा हुए पानी (जोकि डेंगू मच्छरों के जनन का सर्वोत्तम स्थान बनते हैं) की बेहतर और सुविधाजनक रूप से तस्वीर ली जा सकती है। जिसकी मदद से डेंगू जैसी बिमारियों से लड़ा जा सकता है।

पिता बेचते हैं चाय, कठिनाई से बनाया ड्रोन

राजीव के पिता सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते हैं और वो राजीव स्वयं ग्यारहवीं के आर्ट्स विधा के छात्र हैं। लेकिन फिर भी उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली ड्रोन बनाकर सबको चौंका दिया। वो बताते हैं, “मेरे माता पिता ने मेरे ख़्वाब पर भरोसा किया और कुछ पडोसी, दोस्त और रिश्तेदारों की मदद से हमने पैसे जुटाए और इस ड्रोन को बनाने में जरुरी १|५ लाख रूपये लगाए”। इसको बनाने में ७ महीने का समय लगा।

शहर की समस्या सुनकर आया ड्रोन बनाने का ख्याल

उन्होंने सिलीगुड़ी के मेयर के एक बयान को बहुत गंभीरता से लिया जिसमे वो शहर में डेंगू मच्छरों से फ़ैल रही बिमारियों से लड़ने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल पर विचार कर रहे थे। बस तबसे राजीव घोष ने यह ठान लिया था की वो ड्रोन बनाकर उसे शहर के मेयर और म्युनिसिपल कारपोरेशन को सौंप देंगे। शहर के मेयर का कहना था की, “पहले तो हमे विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब हमने राजीव द्वारा बनाये हुए ड्रोन का प्रदर्शन देखा तो हम सब हतप्रत रह गए और हमने इसे अपने म्युनिसिपल कारपोरेशन में इस्तेमाल करने का सोचा। अब राजीव को जो भी मदद की आवश्यकता होगी, वो हम उन्हें प्रदान करेंगे”।

राजीव घोष की जिंदगी से हमे यह भी शिक्षा मिलती है की जहाँ चाह है, वहां राह है| किसी महान विचारक ने यह भी कहा था की, “आवश्यकता, आविष्कार की जननी है”। और वास्तव में राजीव ने इस बात को सार्थक करके दिखाया। उन्होंने हमे यह भी सिखाया है की सामाजिक समस्याओं का समाधान निकालने के लिए हम और आप में से ही किसी को आगे आना पड़ता है। राजीव की यह उपलब्धि इसका जीवंत उदाहरण है।

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