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कानपुर की प्रेरणा ने 3,000 रूपये से शुरुआत कर 25 देशों में बजाया अपनी कारोबारी सफलता का डंका

“तुम लड़की होकर कैसे करोगी” “पैसा डूब जाएगा” “अरे छोड़ो अपना घर का काम संभालो” ऐसे तमाम सवालों के बीच महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए सोचना भी बड़ी हिम्मत का काम है लेकिन यही काम कर दिखाया कानपुर की प्रेरणा वर्मा ने। मात्र 3,000 रुपए की पूंजी से जो व्यापार घर के एक कोने से शुरू किया था वह आज 25 देशों में फैल चुका है और कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है।

कानपुर जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर कौशलपुरी गुमटी में रहने वाली 35 वर्षीया प्रेरणा 12वीं कक्षा के बाद घर में पैसे की तंगी के चलते नौकरी करने लगी थी, जिससे घर के खर्चों में हाथ बंटा सके। कुछ सालों तक नौकरी करने के बाद प्रेरणा के भीतर कुछ नया करने की चाह हुई और फिर उन्होंने खुद का कारोबार शुरू करने की ओर कदम बढ़ाया।

लेदर इंडस्ट्री से पूरी तरह अपरिचित प्रेरणा ने सन 2004 में किसी के साथ पार्टनरशिप कर लेदर की डोरी का बिजनेस शुरू किया। आपसी तालमेल ना होने से पार्टनरशिप टूट गई। साथ में उन्हें यह ताने सुनने को मिलने लगे कि “यह बिजनेस क्या करेगी, जिसे बिजनेस के बारे में कुछ पता ही ना हो” यह बात प्रेरणा को चुभ गई और फिर उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया।

केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में प्रेरणा ने बताया कि चुनौतियां से लड़ने के लिए गुस्से को पाल लेना चाहिए। पार्टनर की चुनौती से मन में क्रोध तो हुआ और सकारात्मक रूप से चुनौती को पूरा करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया।

समाज और अपनों से मिल रही चुनौतियों को ही उन्होंने अपना हथियार बनाया और वास्‍तव में वह कर दिखाया जो औरों के लिए अविश्वसनीय था। इस दौरान सरकारी विभागों में जहां-जहां अधिकारियों ने उन्हें उलझाया, रिश्वत खाने की कोशिश की, हर जगह प्रेरणा ने अपनी बुद्धिमत्ता से काम किया। इन सभी स्थितियों में उन्होंने हार ना मानकर अपने मन के क्रोध को एक ऐसी लड़ाई में बदल दिया जो उन्हें सफलता के रास्ते तक ले जा रही थी।

बैंक लोन दो बार रिजेक्ट होने के बाद भी प्रेरणा ने हिम्मत नहीं हारी। सेकंड हैंड मशीन खरीद कर अपने नए व्यापार की शुरुआत की। हर चुनौती में एक शिल्पकार को देखा कि यह चुनौती मुझे नए रुप में गढ़ने के लिए आई है। नफा हुआ या नुकसान स्वयं को सम रखते हुए सब कुछ सहन करती चली गईं। कभी लेदर को ना पहचानने वाली प्रेरणा आज लेदर की क्वालिटी को बिना हाथ लगाए पहचान सकती हैं। “क्रिएटिव इंडिया” के नाम से अपने घर से ही छोटी सी कंपनी की शुरुआत प्रेरणा ने की और देखते ही देखते 25 देशों में उनके आइटम पसंद किए जाने लगे और धीरे-धीरे उनका व्यापार चलना शुरु हो गया।

प्रेरणा बताती हैं कि उनके मित्र यह कह कर हंसते हैं कि आलोचना करने वालों को तो टॉफी भी नहीं मिली लेकिन तुम्हें ट्रॉफी पर ट्रॉफी मिलती चली गई। लेकिन विनम्र और हंसमुख स्वभाव की प्रेरणा अपने आलोचकों का धन्यवाद करते हुए बस इतना कहती हैं कि अब तो वो सब उनके बारे में गूगल पर पढ़ते होंगे। देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा का यही कहना है कि वह पुरुष प्रधान समाज की सोच से ऊपर उठकर हर कार्य यह सोचकर करें कि पुरुष की ही तरह स्‍त्री को भी भगवान ने सक्षम बनाया है तो उन्हें सफलता जरूर मिलेगी। अपने को स्त्री समझकर नहीं एक व्यक्तित्व के साथ आगे बढ़ें।

आज लगभग 25 देशों में प्रेरणा की कंपनी का सामान एक्सपोर्ट होता है, जिसमें यूरोप के देश व ईस्‍टर्न देश भी शामिल हैं। अपने उत्पादन की उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण जहां उनकी कंपनी के माल को पसंद किया जा रहा है वहीं कुछ देशों के लोग भारतीय होने के कारण उनके सामान को महत्व दे रहे हैं। उन्हें बहुत अच्छा लगता है जब उनके ग्राहक उनसे कहते हैं “इंडियंस आर कूल” भारतीयों के स्वभाव और अतिथि देवो भव की संस्कृति से वह खासे प्रभावित हैं।

प्रेरणा का जीवन यही संदेश देता है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यदि आपके भीतर लक्ष्य प्राप्ति को लेकर जुनून हो तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपके मंजिल तक पहुँचने से नहीं रोक सकती।

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