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12,000 से ज्यादा बच्चियों की इज़्ज़त बचा चुकी है यह महिला, पूरी दुनिया को प्रेरित करती है इनकी कहानी

एक साधारण दिनचर्या, साधारण व्यक्तित्व, साधारण जिंदगी, साधारण परिवार, साधारण सी नौकरी करने वाली कोई व्यक्ति यदि भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पाने वाले लोगों की सूची में शामिल होगा तो जाहिर सी बात है कि उनके बारें में जानने की उत्सुकता बढ़ जाएगी। हमारी आज की कहानी एक ऐसे ही शख्सियत के इर्द-गिर्द घूम रही हैं जिसने समाजसेवा की भावना से अभिभूत होकर एक बड़े क्रांतिकारी आंदोलन का आगाज़ किया।

जी हाँ, यह असाधारण व्यक्तित्व हैं नेपाल की अनुराधा कोइराला जिन्हें प्यार से सभी दीदी बुलाते हैं। 12 हज़ार से ज्यादा लड़कियों की जिंदगी बचाने वाली अनुराधा ने मानव तस्करी के खिलाफ आवाज उठा कर एक ऐसी लड़ाई का आगाज किया जो आज एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है।

उनके इस संघर्ष की शुरूआत बहुत छोटे से दृश्य से हुई। वह रोज पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन को जाते हुए देखते थीं कि कुछ जवान हृष्ट-पुष्ट महिलाएं भीख मांग रही होती थी। उन्होंने जब उनके बारे में जानना चाहा तो पता चला कि प्रत्येक औरत के साथ घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन शोषण, खरीद फरोख्त जैसी घटनाएं घट चुकी है इसलिए वह भीख मांगने को मजबूर हैं। पेशे से शिक्षिका अनुराधा का दिल उनकी कहानी सुनकर रो उठा। अपनी बचत की कमाई में से उन्होंने 8 औरतों को एक-एक हजार रुपए देकर इस शर्त पर सड़क पर दुकानें लगवाई कि वह प्रतिदिन उन्हें 2 रुपए वापस करेंगी ताकि अनुराधा अपनी इस मदद को अन्य औरतों के लिए जारी रख सकें।

इन महिलाओं ने जब अनुराधा से अपनी लड़कियों के लिए मदद मांगी तो उन्होंने स्वयं के पास कुछ नहीं होते हुए भी उधार के पैसों से दो कमरे किराए पर लेकर उनकी बेटियों के खाने, रहने, दवाई और शिक्षा की व्यवस्था की। अनुभवी लोगों की सलाह पर अनुराधा ने एक एनजीओ बनाकर उसे रजिस्टर्ड करवाया जिसका नाम रखा ‘’माइती’’ यानि लड़कियों का घर ‘’मायका’’।

समय के साथ-साथ अनुराधा ने मुख्यत: औरतों के खिलाफ हिंसा और लड़कियों की खरीद-फरोख्त के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ने के लिए गांव-गांव जाना शुरू किया। जो सच उनके सामने आया वह वाकई चौंकाने वाला था कुछ गांव तो लड़कियों की गैरकानूनी तस्‍करी के चलते लड़कियों से रहित हो चुके थे। घरेलू नौकरी और हस्तांतरण के नाम पर लड़कियों के शारीरिक और मानसिक शोषण के खिलाफ इस लड़ाई में कितने ही दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ा। अनुराधा जिस सफर पर निकल पड़ी थी वह चाहे खतरों से भरा था लेकिन उनके इरादे इतने नेक थे कि कारवां जुड़ता चला गया।

अनुराधा अब तक 12 हजार लड़कियों को सेक्स के अवैध व्यापार से बचा चुकी हैं। इसी के साथ ही उन्होंने 45 हजार से ज्यादा महिलाओं और बच्चों को भारत और नेपाल सीमा में होने वाले तस्करी से बचाया है। ‘माइती नेपाल’ में उन सभी औरतों को जगह मिली है जिन्हें किसी न किसी कारण से समाज ने बेदखल कर दिया है। इन महिलाओं को यहां सिलाई-बुनाई जैसी चीजें भी करनी सिखाई जाती हैं जिससे वह आत्मनिर्भर बन सकें।

उनके योगदान को देखते हुए दुनिया के कई देशों ने उन्हें मदद की पेशकश की और उन्हें सम्मान दिया। अमेरिका में उन्हें 2010 में ‘सीएनएन हीरो अवार्ड’ और साथ में 60 लाख रुपए से ज्यादा की मदद दी गई। इसके अलावा उन्हें और भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। आज वह लाखों महिलाओं की आवाज़ बन चुकी हैं।

समाज में समस्याएं तो सैकड़ों हैं लेकिन हर समस्या का समाधानकर्ता अनुराधा कोइराला जैसा हो तो नवीन समाज की सुखद कल्‍पना की जा सकती है। अनुराधा समाज को एक बड़ी सीख दे रही हैं वह यह कि यदि आपके आसपास कोई भी अन्याय होता है तो उसके खिलाफ़ आवाज उठाना हमारी जिम्मेदारी है। और जिस दिन हम इस जिम्मेदारी समझ लेंगे, उस दिन समाज में कोई भी असमानता नहीं रहेगी।

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