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भिखारियों को रोजगार दिला कर अपनी अनोखी मुहिम से मिटा रहें समाज से गरीबी का नामोनिशान

किसी गरीब को भीख देकर आप एक दिन के लिए उसका पेट भर सकते हैं लेकिन किसी गरीब को रोटी कमाना सिखाकर आप ज़िंदगी भर के लिए उसकी भूख मिटा सकते हैं। कुछ ऐसा ही काम कर रहे हैं लखनऊ के शरद पटेल

28 साल के शरद ने ‘बदलाव’ नाम से एक संस्था बनाई, जिसका काम गरीबों को रोजगार देना और उन्हें सरकारी लाभों के बारे में जागरूक करना है। हरदोई में जन्में और पले-बढ़े शरद आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ आ गए। घूमने के शौक के चलते वे अक्सर शहर में भटका करते थे, एक दिन उन्हें कुछ भिखारी दिखाई दिए, जो न सिर्फ भीख मांग रहे थे बल्कि नशा भी कर रहे थे, उनकी हालत से शरद को न सिर्फ दुःख हुआ बल्कि इस बात ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया।

उस वक्त शरद की उम्र बहुत छोटी थी और वह सिर्फ 11वीं क्लास में पढ़ते थे। इसके बाद वे मेडिकल और सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए, हालाँकि उनकी इच्छा समाज सेवा की ही थी। पढ़ाई में मन न लगने के कारण उनके भाई ने उन्हें रेमन मैग्ससे अवार्ड विजेता डॉक्टर संदीप पांडे से मिलवाया। संदीप कई समय से गरीबों की शिक्षा के लिए काम कर रहे थे। शरद ने सामाजिक कामों में रुचि दिखाई और संदीप ने उन्हें सोशल वर्क में मास्टर करने की सलाह दी।

2013 में उन्हें एक भिखारी मिला, शरद ने उसे भीख के बजाय खाना खिलाया। इसके बाद शरद को गरीबों की मदद करने का रास्ता दिखा। इस घटने के बाद से ही वह अपना अधिकतर वक़्त गरीबों के साथ बिताते और उनसे जानकारी जुटाते। शरद को हैरानी हुई कि पुनर्वसन केंद्र के बावजूद कई गरीब सड़क पर रहने और सोने को मजबूर थे, कारण पता चला कि गरीबों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी। इसके बाद शरद सरकार के बनाये लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी, आगरा, मथुरा, इलाहाबाद और कानपुर के पुनर्वसन केंद्र में गए और जायजा लिया। इन सेंटर में शरद को एक भी भिखारी नहीं मिला, जबकि सरकार उनके पुनर्वास के लिए हर महीने 4 से 5 लाख रुपये खर्च करने का दावा करती है।

शरद पटेल ने 2 अक्टूबर 2014 को ‘भिक्षावृति मुक्ति अभियान’ नाम से एक मुहिम की शुरूआत की। इस दौरान उन्होंने कई गरीबों से मुलाकात की और उसमें से 98 प्रतिशत ऐसे भिखारी थे, जो भीख मांगना छोड़ना चाहते थे। एक साल के भीतर शरद ने 7 गरीबों को भीख मांगना छुड़वा कर किसी न किसी काम में लगा दिया। और आज शरद के प्रयास से 27 गरीब और भिखारी रोजगार पा रहे हैं। उनमें से कोई पुताई का काम करता है तो कोई रिक्शा चलाता है। धीरे धीरे कई भिखारी इस मुहिम से जुड़ने लगे ही 2015 में बदलाव संस्था की शुरुआत हुई।

शरद पटेल न सिर्फ गरीबों को रोजगार दिलाने का काम कर रहे हैं बल्कि उन्हें शिक्षा भी दे रहे हैं। लखनऊ के दुबग्गा इलाके में 30 ऐसे बच्चे हैं जो पहले भीख मांगते थे। लेकिन अब वे शरद के सेंटर में पढ़ाई करने आते हैं। यहां आस-पास के और भी गरीब बच्चे शिक्षा लेने आते हैं। इसके बाद ये सभी बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए इस सेंटर में टीचर भी हैं, जो बच्चों को पढ़ाई के अलावा जीवन से जुड़ी और भी चीजें सिखाती हैं।

यदि शरद पटेल जैसे और भी लोग तैयार हो गए, तो भारत से गरीबी का नामोनिशान मिट जाएगा।

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