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पर्यटक की तबीयत ज्यादा बिगड़ते देख इंस्पेक्टर ने उसे अपनी पीठ पर लादकर पहुँचाया अस्पताल

हर समाज एक तयशुदा तरीके से काम करता है। यहाँ हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से समाज के काम आता है। कुछ लोग किसानी करते हैं, कुछ व्यवसाय और कुछ अन्य नौकरी पेशे से जुड़े होते हैं, यह सभी लोग अपनी-अपनी तरह से समाज के लिए जरूरी हैं। लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि इस समाज को बेहतर ढंग से व्यवस्थित रखने एवं सुचारु रूप से कार्यशील बनाये रखने में अगर कोई अहम भूमिका निभाता है तो वो होती है हमारी पुलिस।

पुलिस का सबसे प्रमुख उद्देश्य समाज में लोगों की समस्याओं को दूर करना होता है और जन-कल्याण के ख़ातिर खुद को समर्पित करना ही उनका एक मात्र धर्म होता है। जहाँ पुलिस के बहादुरी के किस्से आये दिन हमारे सामने आते रहते हैं, वहीं उनकी मानवता एवं संवेदनशीलता के वाकये भी कम नहीं हैं। आज भी हम ऐसे ही एक पुलिस वाले की मानवता के किस्से से आपका परिचय कराने जा रहे हैं।

यह कहानी है उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कार्यरत एक दरोगा, लोकेन्द्र बहुगुणा की जिन्होंने एक बीमार यात्री को अपनी पीठ पर लादकर दो किलोमीटर दूर अस्पताल तक पहुंचाया। इस बीमार यात्री के लिए किये गए इस कार्य के चलते लोकेन्द्र को अपने पुलिस कप्तान से सराहना भी प्राप्त हुई।

अचानक हो गयी थी एक शख्स की तबियत खराब

भोपाल निवासी रांझी राजन, अपने परिवार के साथ यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए आये थे। वहां भैरव मंदिर के पास अचानक से उनकी तबियत बिगड़ने लगी। उनके परिवारजनों को एकदम से घबराहट ने घेर लिया, उन्होंने उनकी बिगड़ती हालत देख कर अन्य लोगों से आसपास मौजूद किसी डॉक्टर के बारे में पूछा। पर लोगों ने बताया कि आसपास कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, लेकिन वहां से 2 किलोमीटर दूर एक अस्पताल (यमुनोत्री सीजनल अस्पताल) जरूर है। अब समस्या यह थी कि रांझी उस अस्पताल तक कैसे पहुंच पाते क्यूंकि वो उठके खड़े होने में भी अक्षम हो गए थे। और वहां यातायात के कोई भी साधन मौजूद नहीं थे।

फिर मदद को आगे आये इलाके के दरोगा 

यहाँ रांझी की हालत बिगड़ती जा रही थी, वहीं उनके परिवारजनों की घबराहट भी बढ़ती जा रही थी। जब कोई उपाय नहीं सूझा तो उनके परिवार के लोगों ने वहां मौजूद अन्य लोगों से मदद की गुहार लगानी शुरू की। मदद की गुहार सुनकर वहां भीड़ जमा हो गयी और फिर जानकीचट्टी चौकी के इंचार्ज लोकेंद्र बहुगुणा वहां पहुंचे जिन्होंने वहां की परिस्थिति को समझने के पश्चात कहा कि वो रांझी को अस्पताल पहुँचायेंगे।

चूँकि उनके पास किसी प्रकार का कोई वाहन उस वक़्त उपलब्ध नहीं था, और अस्पताल भी ऊंचाई पर स्थित था इसलिए उनके पास रांझी को अपनी पीठ पर लाद कर अस्पताल ले जाने के सिवा कोई अन्य विकल्प नहीं था। फिर क्या था, उन्होंने रांझी को पीठ पर लादा और चल पड़े 2 किलोमीटर दूर अस्पताल तक की यात्रा पर।

2 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी करके पहुंचे अस्पताल

लोकेन्द्र को मालूम था कि अस्पताल पहुंचने के लिए 2 किलोमीटर की चढ़ाई पूरी करनी होगी, लेकिन उनके पास यह निर्णय लेने के लिए ज्यादा वक़्त नहीं था क्योंकि तबतक रांझी की हालत काफी नाज़ुक हो चुकी थी। इसलिए वो उन्हें पीठ पर लादकर पैदल यमुनोत्री सीजनल अस्पताल पहुंचे। वहां रांझी 4 घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रहे जिसके बाद उन्हें राहत मिली। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें माइनर हार्ट अटैक आया था और उनके समय रहते अस्पताल पहुंच जाने से उनको सकुशल बचाते हुए किसी अनहोनी को टाल दिया गया है। जब घर वालों को यह बात पता लगी तो पहले तो उन्होंने राहत की सांस ली, फिर उन्होंने विशेष रूप से लोकेन्द्र को धन्यवाद् किया।

पुलिस कप्तान ने की लोकेन्द्र के इस नेक कार्य की सराहना

लोकेन्द्र के इस नेक कार्य की हर जगह चर्चा फ़ैल जाने के बाद यह खबर स्वाभाविक रूप से जिले के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था, अशोक कुमार तक भी पहुंची, जिसके बाद उन्होंने कहा कि लोकेंद्र ने सारे पुलिस वालों के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने पुलिस मुख्यालय की ओर से लोकेंद्र को पांच हजार रुपये का नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया।

लोकेन्द्र ने जिस प्रकार से रांझी की मदद करते हुए अन्य पुलिस वालों के लिए मिसाल पेश कि वो वाकई में सराहनीय है। लोकेन्द्र ने किसी अन्य की मदद लिए बिना खुद रांझी को पीठ पर लादा और अस्पताल पहुंचा कर यह दिखा दिया कि वो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं और वक़्त पड़ने पर वो इस बात को साबित भी कर सकते हैं। उन्होंने सच में दिखा दिया कि पुलिस का एकमात्र धर्म जन-सेवा ही है और कुछ नहीं। हम उनके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें सलाम करते हैं।

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