,

इस युवा किसान ने अनूठे तरीके से खेती कर पेश किया मिसाल, राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित

आज लोग अपने छोटे से फायदे के लिए किसी भी हद तक गिर जाने को तैयार हो जाते हैं। यह जानते हुए भी की आगे चलकर उन्हें भी इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है। किसान जिसे अन्नदाता कहा जाता है, आज उनमें से कुछ किसान अपने फायदे के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने में ज़रा भी जुरेज़ नहीं करते। खेती में रासायनिक खादों व केमिकल के इस्तेमाल का कीड़ा उनके दिमाग में इस कदर घर कर गया है कि वे इसका धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। जिससे आगे चलकर न केवल प्रकृति एवं स्वास्थ्य को बल्कि उसके खेतों को भी नुकसान पहुँचने वाला है। लेकिन छत्तीसगढ़ के एक किसान ने इस मानसिकता को बदलते हुए जैविक खेती कर बनाई अपनी पहचान।

इस किसान का नाम है रोहित राम साहू जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के पाटन तहसील के अचानकपुर नामक गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने गाँव के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई की व गाँव के ही एक डिग्री कॉलेज से राजनीती शास्त्र में ग्रेजुएशन भी किया है।

अपने गाँव के नाम की तरह ही करीब 2 साल पहले अचानक उनके दिमाग में यह बात आई कि अभी के समय में किसान भाई रासायनिक खादों का इस्तेमाल इतनी बड़ी मात्रा में करने लगे हैं जिससे फसल के पोषक तत्वों में बहुत कमी आ रही है और ज़मीन भी धीरे-धीरे बंजर होती चली जा रही है। रासायनिक खादों व केमिकलों का खर्च भी अधिक होता है जिसका सीधा फर्क फसल की कीमत और किसान की जेब पर पड़ता है। इन्हीं कारणों से उन्होंने रासायनिक खादों का प्रयोग बंद करने की पहल की और जैविक कीटनाशक दवाइयों की खोज करनी शुरू कर दी।

उन्होंने अपनें गाँव में ही एक टैंक का निर्माण करवाया और 10 देशी गायों के मूत्र व् गोबर को उसी टैंक में स्टोर करना शुरू किया। इसके अलावा वेे नीम,कनेर,धतूरा, बेलपत्र,करण जैसे वनस्पतियों को बारीक़- बारीक़ काट उसी मूत्र-गोबर वाले टैंक में मिलते थे। और इन सबको वे एक वॉटर पंप के द्वारा मिश्रित करते थे। उसके बाद 21 दिनों तक वे इसे ऐसे ही छोड़ देते थे और 21 दिनों के बाद तैयार कीटनाशक लिक्विड दवाई को बोतलों में भर कर रख दिया जाता था। इससे उनका रासायनिक खादों में खर्च होनें वाला करीब 30 हज़ार रुपया बचनें लगा और उनका मुनाफ़ा बढ़ गया। बस उस मिश्रण को बनाने में ही जो मामूली खर्च लगता लगता वो पूरी लागत होती है।

शुरुआत में जब उन्होंने जैविक खेती करनी शुरू की तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे और उनपर हँसते भी थे। बाकि किसानों के मन में यह बहम घर कर गया था कि बिना रासायनिक खादों और केमिकल के खेती संभव ही नहीं है। लेकिन आज उन्हें देख अन्य किसानों ने भी उनके फॉर्मूले को अपनाना शुरू कर दिया है। आज उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि बिना केमिकल और रासायन के भी अच्छी खेती हो सकती है। उनके इस फॉर्मूले से आसपास की महिलाओं को भी फायदा हुआ व स्वरोज़गार मिला है, वे अब इस जैविक लिक्विड को बनाकर उसे दूसरे किसानों को बेचती है।

रोहित को अब अन्य जगहों से ही सहायता मिलनी शुरू हो गई है। वे अब सरकारी गौशालाओं से ही गोबर व गोमूत्र इकठ्ठा करते हैं। सरकार नें भी उनकी पहल को देखते हुए, उन्हें 40 हज़ार का फंड देने की व्यवस्था की है। आज रोहित दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। उन्हें राज्य सरकार द्वारा उत्कृष्ट कृषक पुरुस्कार से सम्मानित भी किया गया।

रोहित की सफलता उन तमाम लोगों के लिए मिसाल है जो जैविक खेती की ओर ध्यान नहीं देते हुए पारम्परिक खेती का ही अभ्यास कर रहे हैं।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

आपका कमेंट लिखें