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अपनी नेतृत्व क्षमता से लोहा मनवाने वाली प्रतिभा और प्राची की उपलब्धि जान आप भी करेंगे सैल्यूट

समाज के जिस रूढ़िवादी तबक़े ने महिलाओं के लिए लाख पहरे लगाये, उन्हें उपेक्षित रखने के भरसक प्रयास किये आज वही लोग उनके सबसे बड़े प्रशंसक बनने लगे हैं। कहते है न डर के आगे जीत है महिलाओं के आगे बढ़ने के हौंसले ने रूढ़िवादी समाज की हर जंजीर को तोड़कर अपने रास्तों का निर्माण किया है।

आज की महिला पुरुषों के बराबर नहीं बल्कि उनसे कई गुना तेज़ी से आगे बढ़कर अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं। मेट्रो ट्रेन से लेकर फाइटर प्लेन और हवाई जहाज तक चला रही हैं। आज की महिला अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।

हमारी आज की कहानी भी बदलते भारत की दो बेटियों की है जिन्होंने अपनी क़ाबिलियत के दम पर अपनी पहचान बनाई है। प्रतिभा शर्मा और प्राची शर्मा उन दो बेटियों के नाम है जिन्होंने लखनऊ मेट्रो ट्रेन को चलाकर भारत के विकास में अपना योगदान दिया है। यह बात और भी खास तब बन जाती है क्योंकि मेट्रो एक बहुत ज्यादा सुविधा जनक और सुरक्षित रेल माना जाता है लेकिन मेट्रो को चलाने में महिलाओं की सहभागिता बहुत ही कम है। भारत की सभी मेट्रो सिटीज में 3% से भी कम महिलाओं को रेल चालक की नौकरी दी जाती है लेकिन यह बदलाव की बयार तब चली जब देश में ऐसा पहली बार लखनऊ में 1 दिसंबर 2016 को मेट्रो रेल को ट्रैक पर दौड़ने की जिम्मेदारी प्राची और प्रतिभा के सशक्त हाथों में सौंपी गई।

प्रतिभा और प्राची ने 4 कोच वाली लखनऊ मेट्रो को पहले ही दिन 6 किमी तक दौड़ाई। 6 स्टेशनों से गुजरते हुए प्रतिभा और प्राची ने ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो डेपो से शुरू होते हुए लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर आकर मेट्रो के संचालन का श्री गणेश किया। दोनों की इस उपलब्धि के लिए उन्हें रानी लक्ष्मी बाई बहादुर पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

आपको बता दें कि लखनऊ मेट्रो में साढ़े 8 किमी के ट्रैक पर लगभग 2 हजार करोड़ रूपए खर्च हुए हैं जिसमे करीब 650 करोड़ रूपए सिविल वर्क में खर्च किए। लखनऊ मेट्रो को बनने में 4 हजार मजदूर और 790 दिन का समय लगा था।

प्राची और प्रतिभा ने अपनी क़ाबिलियत का परिचय तो दिया ही साथ ही मेट्रो ट्रेन चलाकर उन महिलाओं के लिए एक आदर्श स्थापित किया है जो आज भी हर छोटी बात पर घबराने लगती हैं।

प्रतिभा और प्राची दोनों इलाहबाद की रहने वाली है। दोनों ने ही ट्रेन ऑपरेटर्स में बीटेक की डिग्री हासिल की है। प्रतिभा ने जहाँ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की है तो प्राची ने मिर्जापुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की पढ़ाई की है। दोनों ने ही बतौर स्टेशन कंट्रोलर एलएमआरसी लख़नऊ में काम करना शुरू किया था। और जब एलएमआरसी में ट्रेन ऑपरेटर के 97 पद के लिए आवेदन मांगे तो उसमें करीब 3,827 महिलाओं के आवेदन में दो आवेदन प्राची और प्रतिभा के भी शामिल थे।

लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों ने प्रतिभा और प्राची का चयन करते हुए उन्हें मेट्रो रेल की लॉन्चिंग वाले दिन ही रेल चलाने की जिम्मेदारी दे दी। प्रतिभा और प्राची ने भी बख़ूबी हिम्मत के साथ अपने कर्तव्य का निर्वाह किया।

एलएमआरसी की माने तो “पहली बार मुख्यमंत्री और आम लोगों के सामने मेट्रो चलाने के लिए दो महिला चालकों को चुना गया वो भी इसलिए क्योंकि ये दोनों ही महिला ड्राइवर आत्मविश्वास से लबरेज और मेट्रो चलाने के लिए इतनी उत्साहित थी कि ये परिक्षण के दिन ही मेट्रो चलाने की इच्छा रखती थी। मेट्रो चलाने के लिए प्रतिभा और प्राची को पूर्ण प्रशिक्षित किया गया है उन्हें एलएमआरसी के सेंटर ऑफ़ एक्सलेंस से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।”

इन बेटियों ने मेट्रो को रफ़्तार देकर साबित कर दिया है की अब भारत की बेटी रुकने वाली नहीं निरंतर आगे बढ़ना ही उसका लक्ष्य है।

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