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अपाहिज बच्चे को लाखों रुपये के कृत्रिम पैर दिलवाकर इस पुलिस वाले ने पेश की दरियादिली की मिसाल

भारत के इतिहास को अगर गौर से देखा जाए तो हम यह पाएंगे की हमेशा से यहाँ दूसरों की मदद करने की परंपरा रही है। फिर वो भले ही शोषित समाज को उनके अधिकार दिलाने की बात हो, या किसी इंसान को उसकी असहाय अवस्था से बाहर निकालने की बात हो। ऐसा ही एक किस्सा अभी हाल में सुर्खियों में आया जहाँ एक अपाहिज बच्चे, शिवा विश्वकर्मा की मदद करके यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात भारत भूषण तिवारी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं।

बच्चे की पढ़ाई के प्रति रूचि देखकर की उसकी मदद

बात दरअसल उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की है, जहाँ के शक्ति नगर थाना में  भूषण बतौर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे जब एक दिन अपनी गाड़ी से गश्त के दौरान उन्होंने एक अपाहिज बच्चे को देखा, जो बड़ी मासूमियत से एक प्लास्टिक की चटाई पर कुछ पुरानी किताबें लेकर बैठा पढ़ रहा था। उसे देखकर वो उसके पास जाकर खुद को उससे बात करने से रोक न सके। उसी बातचीत के दौरान उन्हें पता चला की वह अपाहिज बच्चा पढ़ने में काफी रूचि रखता है लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वो औपचारिक शिक्षा नहीं ले सकता। वहीं उसी वक़्त उन्होंने उस बच्चे की मदद करने का ठान लिया।

लगवाया बच्चे को कृत्रिम पाँव

शिवा से बातचीत के दौरान उन्हें इस बात का पता चला कि उसके माँ बाप के पास इतने रूपये भी नहीं की वो उसकी शिक्षा का खर्च उठा सकें इसलिए भारत जी ने सबसे पहले तो उसकी शिक्षा का दारोमदार अपने कंधे पर लेने का फैसला लिया और उसके बाद उन्होंने उसके अपाहिज होने की बाधा को दूर करने का भी हल निकाला। उन्होंने शिवा के लिए कृत्रिम पाँव लगवाने का भी फैसला लिया जिससे वो खुद चल कर विद्यालय जा सके और आम बच्चों की तरह शिक्षा ग्रहण कर सके।

आपको बता दें कि बचपन में हुए एक हादसे के कारण शिवा ने अपना पाँव खो दिया था, और उसके बाद से वो न केवल आर्थिक रूप से बल्कि शारीरिक रूप से भी असहाय हो गया था।

लगे कृत्रिम पाँव से शिवा के सपनों को पंख

सब-इंस्पेक्टर भारत भूषण ने शिवा के कृत्रिम पाँव लगवाकर इंसानियत की एक बेहतरीन मिसाल दी है। आज वो ने केवल स्कूल खुद अपने पैरों पर चलकर जाता है बल्कि स्कूल के क्रीड़ा स्थल में दौड़ता भी है। वास्तव में भारत भूषण हम सब के लिए एक मिसाल हैं जिन्होंने अपनी पुलिस की ड्यूटी को केवल अपने थाने तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि उसके आगे भी लेकर गए और एक असहाय बच्चे की मदद की. हम उनके इस फैसले को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ऐसे हम सब एक दूसरे की मदद करें जिससे की सभी लोगों के पंखों को नयी उड़ान मिले। भारत भूषण ने शिवा की मुश्किलों को चुटकी में हल कर दिया और उसे एक नयी जिंदगी ही दे दी।

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