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खेतों में काम कर माँ ने बेटे को पढ़ाया, IPS बन बेटा अब करेगा 2.3 लाख पुलिस कर्मियों का नेतृत्व

जिंदगी में अथक धैर्य और कड़ी मेहनत से सबकुछ जीता जा सकता है, कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। कड़ी से कड़ी परीक्षा में भी व्यक्ति अगर हिम्मत जुटा कर रखता है तो सफलता एक दिन उसके कदम चूमती नजर अवश्य आती है। बस जरूरत है तो हमें जिंदगी में मिल रही असफलताओं पर ध्यान देने की, हार  मानने की और फिर सफलता खुद आप तक पहुँचती है। ऐसी ही कुछ कहानी है वरिष्ठ आईपीएस ऑफिसर ओम प्रकाश सिंह जी की भी, जो अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस अर्थात पुलिस महानिदेशक बनाये गए हैं। आइए जानते हैं इनके यहाँ तक पहुँचने के सफर के बारे में।

बचपन में किया माँ ने संघर्ष

बिहार के गया में जन्में . पी. सिंह ने कड़ी मेहनत और लगन के बलबूते जिंदगी में मुकाम दर मुकाम हासिल करते चले गए। उनसे जुड़े लोगों का मानना है कि उनकी सफलता में उनके मां और भाई का विशेष योगदान रहा है। जहां कम उम्र में उनके पिता की मृत्यु हो गई वहीं उनकी माताजी ने जिंदगी के समस्त मोर्चे खुद संभाली और अकेले दम पर खेतों में जा कर खेती की। ऐसी मान्यता है कि बिहार में ऊंची जाति की महिलाएं खेतों में जाकर काम नहीं करती। लेकिन समाज की परवाह किए बगैर ओम प्रकाश की माँ लगातार खेतों में जाकर खेती करती थी और अपनी परिवार को गरीबी से ऊपर उठाने में काफी मदद की।

पारिवारिक स्थिति ख़राब होने के बावजूद की अच्छी शिक्षा ग्रहण

उनके परिवार से जुड़े लोग बताते हैं कि, उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी पारिवारिक हालत सही नहीं थी और परिवार के पास उचित पैसे भी नहीं थे जिससे ओम प्रकाश सिंह और उनके भाई को अच्छी शिक्षा मिल सके लेकिन उनकी मां ने कई सारी कुर्बानियां देकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और उनके सुनहरे भविष्य को भी सुनिश्चित किया। नतीजा यह था कि उनके बड़े भाई डॉक्टरी की पढ़ाई कर पाए और वह खुद सेंट जेवियर्स कॉलेज से अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सके। आगे उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी और मद्रास यूनिवर्सिटी से भी विभिन्न डिग्री हासिल की। दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट . पी. सिंह वहां शिक्षण कार्य में लग गए जिसके बाद पारिवारिक स्थितियाँ सुधरने लगी।

मिल चुका है राष्ट्रपति से मैडल

आपको बता दें कि ओपी सिंह को उनके द्वारा किए गए सराहनीय सेवाओं के लिए 2005 में राष्ट्रपति मेडल भी मिल चुका है और 1993 में बहादुरी के लिए भारतीय पुलिस सेवा मेडल भी मिल चुका है। वो वर्तमान में सीआईएसएफ डीजी के पद पर तैनात हैं। वह 1983 बैंच के यूपी कैडर के आईपीएस ऑफिसर हैं। एवं केंद्र और यूपी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं।

सुलझे स्वाभाव के हैं .पी. सिंह

अपने शांत स्वभाव और सौम्यता के लिए जाने जाने वाले पी सिंह के छात्र जीवन के दौरान भी उनके साथ रहे दिल्ली पुलिस के पूर्व जॉइंट कमिश्नर एस.बी.एस बताते हैं कि .पी. सिंह बहुत ठहरे और सुलझे स्वाभाव के अधिकारी हैं और यूपी पुलिस को उनके गाइडेंस में अच्छी दिशा निर्देश मिलेगा। एनडीआरएफ के साथ काम करते हुए उन्होंने काफी उत्कृष्ट सेवाओं का प्रदर्शन किया जो क़ाबिले तारीफ है। यहां तक कि गृह मंत्रालय में भी उन्हें काफी सम्मान की नजरों से देखा जाता है और गृहमंत्री राजनाथ सिंह उनकी कई बार सराहना करते रहे हैं।

उनके कार्यकाल में सफलताएं मिली अपार

उन्होंने उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में कार्यभार संभालते हुए नेपाल स्थित सीमा के इलाकों में आतंकवाद का बहुत कड़ाई से खत्म करने में अहम् भूमिका निभाई। लखनऊ में पुलिस अध्यक्ष होने के नाते शियासुन्नी के बीच लम्बे समय से चले रहे विवाद को भी सुलझाने में अहम् भूमिका निभाई। एनडीआरएफ में कमान संभल रहे .पी. सिंह ने जम्मू कश्मीर, नेपाल, चेन्नई एवं अन्य प्राकृतिक आकस्मिक घटनाओं के प्रभाव काम करने में भी विशेष योगदान दिया।  

जिंदगी में कभी नहीं मानी हार

उनकी जिंदगी में काफी कठिनाइयां आई और उनके करियर के दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। लखनऊ और उत्तर प्रदेश में काफी चर्चित हुआ गेस्ट हाउस काण्ड, ऐसी ही एक घटना है। जब जून 1995 में .पी सिंह लखनऊ जिले के एसएसपी बनाए गए, उसी दिन लखनऊ का एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण गेस्ट हाउस कांड हुआ जिसमें कथित रूप से मायावती के साथ अभद्र व्यवहार हुआ, जब वह गेस्ट हाउस में मौजूद थी। उक्त घटना का इस कदर विरोध हुआ कि कई सारे दबाव में आकर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पी सिंह को निलंबित कर दिया था। इस बात से वह बहुत सदमे में गए थे कि किस प्रकार प्रशासन ने पूरा इल्जाम उनपर डालते हुए उन्हें जिम्मेदारियों से निलंबित कर दिया गया था।

जो लोग .पी सिंह को करीब से जानते हैं उनका यह मानना है कि वह मुलायम सिंह यादव के बहुत नजदीक थे लेकिन मायावती सरकार में उनकी कोई पूछ नहीं थी और वह बहुत साइडलाइन किए गए यहां तक कि मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव के शासनकाल में भी उनको कोई खास तवज्जो नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने केंद्र का रुख किया पर शायद उन्हें भी उम्मीद नहीं थी कि उन्हें कभी प्रदेश में फिर से लौट आना पड़ेगा।

अब डीजीपी बन करेंगे 2.3 लाख पुलिस कर्मियों का नेतृत्व

जब उनकी प्रदेश में लौटने की उम्मीद धूमिल होती जा रही थी ऐसे समय में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें उत्तरप्रदेश का DGP नियुक्त कर दिया। यह अपने आप में उनके लिए बहुत सम्मान की बात हुई और उनकी जिंदगी से हमें भी काफी कुछ सिखने को मिलता है।

कभी भी जिंदगी में हार नहीं माननी चाहिए और कड़ी मेहनत करते रहना चाहिए फिर भले ही आपको उम्मीद स्वरूप परिणाम   रहे हो लेकिन आप अपनी लगन से जरूर एक दिन वह मुकाम हासिल कर लेंगे जिसकी तलाश आपको हमेशा से रही है।  पी सिंह की जिंदगी से सबसे बड़ी सिख यह मिलती है कि व्यक्ति को बस कड़ी मेहनत करते रहना चाहिए और फिर सफलता आपके कदम चूमती नजर आएगी।

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