,

मुश्किल हालातों में पली-बढ़ी, पति ने वेश्यावृत्ति के लिए किया मजबूर, अब पेश कर रही है मिसाल

कहते हैं समय बदलते देर नहीं लगती, आपकी मेहनत, आपका संघर्ष एक न एक दिन रंग जरूर लाता है। और वैसे भी भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। हम आपको इसी मेहनत और संघर्ष की दास्तान सुनाते हैं कि आखिर कैसे किसी शख्स की मेहनत और लगन ने उसे कामयाब बनाया। आज की कहानी भी एक ऐसी ही महिला की है, जिसने बचपन से लेकर जवानी तक सिर्फ और सिर्फ अंधेरा ही देखा, लेकिन वो अपने बच्चों को इस अंधेरे में नहीं भेजना चाहती थी इसीलिए उसने कदम उठाया और उसके एक कदम ने आज उसकी ज़िंदगी बदल दी है।

नूतन की ज़िंदगी का बुरा दौर तब शुरू हुआ, जब वह गांव से 10 साल की उम्र में अपने माता-पिता के पास मुंबई आई। यही वो वक़्त था जब उसे अपने पिता की सच्चाई पता चली कि वो शराबी हैं और माँ के साथ गाली गलौज और मारपीट करते हैं। कुछ ही समय में उसकी शादी कर दी गई और फिर…

नूतन के कदम ने बदली जिंदगी

नूतन की माँ वेश्यावृत्ति करने को मजबूर थी। उसके पिता और माँ के बीच अक्सर मारपीट और गालियों में ही संवाद होता था। माँ को नूतन के पिता ने जबरन रेड लाइट एरिया में धंधा करने को भेज दिया था। जब बेटी नूतन बड़ी हुई तो उसकी कम उम्र में ही शादी कर दी गयी ताकि उसे ये सब न झेलना पड़े लेकिन पिता की तरह पति भी गाली गलौज और मार पीट करता था। इसके अलावा नूतन का पति भी उसे जबरन रेड लाइट एरिया भेजना चाहता था, वह खुद भी उस गली में जाता था। कुछ ही समय बाद नूतन के बच्चों का भी वही हाल होने लगा, उसकी तरह बच्चों की भी पिटाई होने लगी।

एनजीओ से पटरी पर आई जिंदगी

यही वो समय था, जब नूतन ने कदम उठाया, वह अपने बच्चों का ये हाल नहीं देख सकती थी। उसने ठान लिया था कि अब वह बर्दाश्त नहीं करेगी। ससुराल के बाद अपने बच्चों के साथ वह फिर मायके आई लेकिन तब तक उसके लिए वहां के भी दरवाजे बंद हो चुके थे, उसके बाद नूतन ने एक एनजीओ से संपर्क किया। इस एनजीओ ने उसकी ज़िंदगी में रौशनी लौटी और दो महीने के अंदर ही उसकी ज़िंदगी पटरी पर लौट आई। आज वह दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

डिजाइनर बनना चाहती है नूतन

आज नूतन आत्मनिर्भर है, अपने पिता और पति से दूर अपनी ज़िंदगी जी रही है और बच्चों की अच्छी परवरिश भी कर रही है। नूतन एनजीओ में ही रह कर सिलाई-बुनाई का काम सीख रही हैं। वह डिज़ाइनर बनना चाहती हैं। वह चाहती है कि वह अपनी जैसी तमाम लड़कियों को छुड़ा सके, जो जबरन धंधा करने को मजबूर है।

न जाने ऐसी कितनी नूतन इस देश में होंगी जो हालातों के आगे मजबूर होकर हार मान बैठती हैं। लेकिन इस महिला की कहानी उन तमाम लोगों के लिए मिसाल है और उन्हें परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगी।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें