,

जेब खर्च के लिए शुरू किया था धंधा, आज 150 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल हो रही इनकी सर्विस

वर्तमान में शायद कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसे हम करियर विकल्प के रूप में नहीं चुन सकते छोटे से छोटा काम भी हमे अप्रत्याशित सफलता के शिखर पर पहुंचाने में सक्षम है बशर्ते की अगर उसे पूरी मेहनत, विश्वास और जुनून के साथ किया जाए। कुछ ऐसा ही कार्य छोटे से स्तर पर अपने जेब खर्च को चलाने के लिए शुरू किया था पंजाब के चंडीगढ़ में रहने वाले नितिन गोयल ने।

नितिन बनना तो वकील चाहते थे लेकिन इंग्लिश से हिंदी भाषा में लेखों के ट्रांसलेशन का काम केवल इसलिए करना पड़ा क्योंकि कॉलेज के समय में अपना खर्च चलाने में उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जेब खर्च के लिए शुरू किया छोटा सा काम एक दिन बहुत बड़े स्टार्टअप का रूप लेगा आज पूरे विश्व के 150 देश उनकी कंपनी कृष्णा ट्रांसलेशन द्वारा किये गए अनुवादों पर आँख बन्द करके यकीन करते है। लेकिन इस सफलता की कहानी बाकी कहानियों से कुछ हटकर है।

नितिन के परिवार का पुश्तैनी काम आटा चक्की का है साथ ही उनकी कुछ कमर्शियल प्रापर्टी भी है लेकिन शुरू से ही नितिन कुछ अलग हटकर करना चाहते थे। समाज में बदलाव लाने के पक्षधर नितिन ने कॉलेज में आकर छात्र राजनीति का रुख किया वे एनएसयूआई छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। लेकिन उनका राजनीति में आना परिवार को मुनासिब नही लगा जिसके चलते परिवार ने नितिन का बिल्कुल समर्थन नहीं किया। पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रहे नितिन को जब परिवार ने मदद देनी बंद कर दी तो उनके लिए खुद का खर्च निकलना भी मुश्किल होने लगा और फिर उन्होंने जेब खर्च के लिए काम की तलाश शुरू कर दी

ऐसे समय में उनके एक पत्रकार मित्र ने उन्हें सलाह दी कि वे अनुवादक का काम करें जिससे उनका खर्च निकल सकता है। इस तरह लॉ की पढ़ाई के साथ ही शुरुआत में नितिन लेखों के अंग्रेजी से हिंदी और पंजाबी में अनुवाद का कार्य करने लगे। लेकिन बचपन से ही उनके मन में एक बात थी कि वह कुछ ऐसा कार्य करे जिसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो। धीरे-धीरे वे एक प्रसिद्ध अनुवादक कब बन गए उन्हें भी पता नहीं चला, इधर कानून की पढ़ाई भी पूरी हो गयी थी, उनका मन तो वकालत करने का ही था पर उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

नितिन बताते हैं कि “मैं वकालत को ही अपना कार्य क्षेत्र बनाना चाहता था क्योंकि वो मेरी प्राथमिकता थी और अनुवाद करने का कार्य केवल जेब खर्च चलाने के लिए चुना गया विकल्प था पर मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मेरा विकल्प मेरा प्रमुख कार्यक्षेत्र बन गया।

आज नितिन अपने अनुवादन के काम में इतना व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें वकालत के लिए समय ही नहीं मिलता है। अनुवाद का काम जारी रखते हुए उन्होंने कृष्णा ट्रांस्लेशन के नाम से अपनी वेबसाइट बना दी और क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय भाषाओं के पुस्तकों, लेखों और आवश्यक दस्तावेजों का अनुवाद करने का कार्य प्रारम्भ किया। आज नितिन कई लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं जो भाषा में रूचि रखते है। ऐसे व्यक्तियों को नितिन अनुवादक के तौर पर कार्य उपलब्ध कराते हैं केवल इस शर्त पर की अनुवाद में प्रमाणिकता हो जिससे की पढ़ने वाले को सही जानकारी उपलब्ध हो। अब तक नितिन 200 से ज्यादा भाषाओं में 1500 लोगों की विश्वव्यापी टीम के साथ अनुवाद का काम कर रहे है। नितिन ने अब वकालत का काम कम कर दिया और सिर्फ अनुवाद के काम पर उनका ध्यान केंद्रित किया है।

नितिन बताते हैं कि “हमारे पास 150 देशों से अनुवाद का काम रहा है। सबसे ज्यादा हमारे पास अदालत, पुलिस, मेडिकल और फिल्मों का काम होता है। सबसे ज्यादा काम पंजाबी भाषा का है उदाहरण के तौर पर जैसे यदि किसी पंजाबी पर कोई पुलिस केस हो गया तो उसने वहां की अदालत में बयान दे दिया कि उसे अंग्रेजी नहीं आती है तो पुलिस को सभी कागजातों और बयानों का अनुवाद पंजाबी में कराना होगा। जिसके लिए वे हमारी सहायता लेते हैं। इसके लिए पुलिस इंटरनेट के जरिए देखती है कि कौन सी भारतीय एजेंसी अनुवाद का काम करती है। उसके बाद वह वेबसाइट से संपर्क करती है और उन्हें अनुवाद का काम सौंपती है।

नितिन का काम अब इतना बढ़ गया है कि उनके पास अंग्रेजी फिल्मों के सबटाइटल के अनुवाद का काम भी आने लगा है। इस सफलता के बाद भी नितिन को केवल एक बात अखरती है कि आखिर क्यों लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा को भूलते जा रहे है। नितिन कहते हैहमारे पास जब भी क्षेत्रीय भाषा से संबंधित अनुवाद का काम आता हो तो हमे अनुवादक आसानी से नहीं मिलते है जबकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षेत्रीय भाषा के बहुत करीब होता है। ऐसे में लोगों को आगे आना चाहिए और अपनी भाषा का मान बढ़ाना चाहिए

वाकई नितिन गोयल ने अनुवादक के रूप में यह सिद्ध कर दिया कि आज भी प्रत्येक भाषा अपने पूर्ण अस्तित्व में है। नितिन का कार्य उन आलोचकों को करारा जवाब है जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय भाषाओं को निम्न दृष्टि से देखने लगे है।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

आपका कमेंट लिखें