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अशिक्षा के खिलाफ़ इस 25 वर्षीय लड़की की जंग समाज को एक प्रेरक सीख दे रही है

समाज में शिक्षा का महत्व एक स्त्री से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता, हम अपने आसपास अक्सर यह सुनते और देखते हैं कि किस प्रकार स्त्रियां समाज की हर बेड़ियों को तोड़ते हुए केवल खुद को शिक्षित कर रही हैं बल्कि अपने परिवार एवं समाज को भी शिक्षित करने का काम कर रही हैं। वास्तव में जब मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होता है तो उसके लिए यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वह औरों के लिए स्वयं ज्ञान का एक अहम् स्रोत बनकर उभरे। हमारे समाज में कई स्त्रियों ने औरों को शिक्षित करने की नेक मुहिम छेड़ रखी है, जिससे समाज का बेहतर विकास सुनिश्चित हो रहा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहाँ लोगों के पास अपनों के लिए सोचने की फुर्सत नहीं है, वहीं 25 वर्षीय एक युवती, निशिता राजपूत ने अपने जैसी तमाम लड़कियों को शिक्षित करने के बारे में सोचा। निशिता ने केवल अन्य लड़कियों को शिक्षित करने का सोचा बल्कि उस दिशा में ठोस प्रयास भी करके दिखाया। आज उनकी वजह से तमाम बच्चियों की पढ़ाई जारी है, जो शायद अधर में थी।

एक साल में 10,000 लड़कियों के लिए जुटाई फीस

निशिता राजपूत वडोदरा की एमएस युनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक युवती हैं, जिन्होंने ग़रीबों की शिक्षा के लिए सोचा और उन लोगों को शिक्षा मुहैया करवाई जिनके पास फ़ीस भरने तक के पैसे नहीं थे। शुरुआत में उन्होंने एक साल में 10,000 लड़कियों की फ़ीस जुटाने की ठानी और उन्होंने यह करके भी दिखाया निशिता ने बड़ी ही समझदारी से इस नेक काम को कर दिखाया। हालाँकि ये काम इतना भी आसान नहीं था। शुरुआती दौर में उन्हें प्रायोजक नहीं मिलते थे जिस वजह से काफी दिक्कतें होती थी, इसलिए उन्होंने खुद ही बच्चियों के लिए 1000 रुपये इक्कठे करने की शुरुआत की। धीरेधीरे उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा करके दिखाया और उनकी वजह से आज कितनी ही लड़कियाँ अपनी शिक्षा पूरी कर रही हैं, जिनके सामने कभी पैसा की कमी रुकावट बनकर रही थी।

नेक काम को अलग तरह से दिया अंजाम

निशिता ने इस काम को सामान्य तौर से करके, कुछ हटके किया। उन्होंने राशि देने वालों से सीधे पैसे लेने के बजाय, बच्चियों के स्कूल और पैसे देने वालों के बीच बस मीडिएटर का काम किया और वो पैसे के चेक को डोनर से लेकर स्कूलों तक पहुँचाती थी और फिर स्कूल से फ़ीस स्लिप लेकर डोनर को लाकर देती थी। निशिता बताती हैं कि उन्होंने कई ऐसी गरीब लड़कियों को देखा जिन्हें पैसे के अभाव में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, और तो और निशिता के घर में काम करने वाली महिला की भी पैसे के अभाव में शिक्षा पूरी नहीं हो पाई थी। उसकी तंगहाली देख निशिता ने ठान लिया की वह इन लोगों के लिए जरूर कुछ करेंगी क्योंकि उनका मानना है कि शिक्षा के जरिये लोगों के जीवन को हर प्रकार से बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने समाज में परिवर्तन लाने की मुहिम की शुरुआत पिता की मदद से की और आज उनके साथ तमाम लोग जुड़ चुके हैं। वो लगातार गरीब बच्चियों से मिलती रहती हैं और उनकी शिक्षा के जरूरी पैसों के इंतज़ाम में लगी रहती हैं।

अपने पिता को मानती हैं अपनी प्रेरणा का स्रोत

निशिता के पिता ने उनके इस नेक कार्य में विशेष योगदान दिया। वो बताते हैं कि सबसे पहले हम स्कूलों में गए और वहां से हमने ऐसे बच्चों की लिस्ट निकलवाई जो वाकई फीस देने में असहाय हैं, उसके बाद हम उन बच्चों के घर गए। खास बात यह है कि निशिता को लोगों की मदद करने का यह विशिष्ट गुण अपने पिता, गुलाब राजपूत से मिला जो खुद भी एक समाज सेवक हैं और वो गरीब बच्चियों को स्कूल और उनकी जरूरत के सामान देते हैं। यहीं से निशिता को प्रेरणा मिली और उन्होंने इन बच्चियों की शिक्षा के लिए कुछ करने की ठानी निशिता कहती हैं शुरुआत में उन्हें डोनर जुटाने में दिक्कत आई, इसके लिए उन्होंने लोगों को इस सम्बन्ध में फॉर्म बांटने शुरू किये और उन गरीब बच्चियों की स्थिति के बारे में अवगत कराया और अब देशविदेश के तमाम लोग इन बच्चियों की मदद करने के लिए आगे रहे हैं।

उनके इस नेक कार्य के बारे में पढ़कर यह ख्याल जरूर आता है कि कैसे एक व्यक्ति समाज में अच्छाई की परिभाषा विभिन्न तरह से गढ़ सकता है। निशिता यह भी बताती हैं कि उन्होंने इस कार्य को करने के दौरान अनेक बार लोगों से कई बातें सुनने को मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत हारी नहीं और वो बस इन बच्चियों के बारे में सोचती रही और आज उन्होंने काफी कुछ हासिल कर लिया है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी भी हैं। वो इसे अपनी शुरुआत भर समझती हैं और आगे वो और लोगों को भी इस नेक कार्य में भागीदारी दिखाने के लिए प्रेरित करती हैं।

हम निशिता के इस नेक कार्य के लिए उन्हें सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि हम सब भी किसी किसी प्रकार से उनके इस नेक कार्य में अपना योगदान दे पाएंगे और हम अपने आस पास मौजूद गरीब बच्चों कि हरसंभव प्रकार से मदद भी कर सकेंगे।

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