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गरीब अनाथ बच्चों को गोद लेकर उनकी नौकरी लगने तक पूरी शिक्षा का खर्च उठाते हैं ये शख्स

मैं एक जुनूनी शिक्षा शास्त्री हूँ। मुझे अबतक पता नहीं क्यों, मगर मुझे इससे लगाव है”, डॉक्टर शैलेश ठाकेर अपने बारे में कहते हैं। विश्व प्रख्यात नेतृत्व गुरु और प्रबंधन विचारक पिछले 27 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और वे कहते हैं कि वो अंतिम सांस तक वह ऐसा करते रहेंगे। परंतु इस कड़ी में उनकी नई पहल बेहद सराहनीय है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. शैलेश ठाकेर ने अपने 58वें जन्मदिवस का जश्न 51 गरीब बच्चों के साथ मनाया। इतना ही नहीं उन्होंने फैसला किया कि वे उन सभी बच्चों को गोद लेंगे और उनकी नौकरी लगने तक पूरी शिक्षा का खर्च उठाने का फैसला किया है।

कुछ ऐसे हुई शुरुआत

शैलेश ठाकेर के घर के सामने एक बगीचा है। बगीचे से सटी हुई सड़क पर एक परिवार रहने के लिए आया। इस परिवार में 4 बच्चे हैं। सुबह की सैर करते समय डाॅ. शैलेश सोचते, “जिन्दगी में जरूरतें कितनी कम हैं।” वे अक्सर उनके लिए कुछ सामान, भोजन इत्यादि ले जाते। परंतु बहुत जल्द ही उन्होंने यह महसूस किया कि उन्हें रहने भर का आश्रय देने से उनकी कुछ ख़ास मदद नहीं हो रही है। फिर उन्होंने उन बच्चों को कुछ ख़ास तोहफ़ा देने को सोचा।

“मैं उनके बेहतर भविष्य के लिए कुछ करना चाहता था”

इससे उन्हें ‘चण्यादो’ नामक एक सामाजिक संस्था की शुरुआत करने की प्रेरणा मिली। यह एक गैर-सरकारी संगठन है, जो पूरे गुजरात से सड़कों पर रहने वाले परिवारों से आने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की दिशा में काम करता है।

चण्यादो एक गुजराती शब्द है जिसका अर्थ है ‘पेड़ के आश्रय में’। बेहद गरीब परिवार के इन सभी 51 बच्चों सुरक्षित भविष्य के लिए, बेहतरीन शिक्षा और वातावरण के लिए उनका दाख़िला चण्यादो में करवाया गया।

ऐसे करते हैं बच्चों का चुनाव

बच्चों का चुनाव एक परीक्षण के माध्यम से किया जाता है। इस चयन प्रक्रिया को शहर के एक जाने माने मनोचिकित्सक, हिमांशु देसाई ने प्रमाणिकता दी है। बच्चों का नामांकन ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) के तहत अँग्रेजी माध्यम विद्यालयों में पहली कक्षा में कराई जाती है। चण्यादो छात्रों के शिक्षा से लेकर रोजगार प्राप्त करने तक की जिम्मेदारी लेता है। वे बच्चों के हाॅस्टल शुल्क, अकादमिक, सह पाठ्यक्रम गतिविधियों और उन सभी बातों का ख्याल रखती है जो एक बच्चे के लिए आवश्यक है।

चण्यादो के साथ विभिन्न क्षेत्रों से 25 सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें मनोचिकित्सक, शिक्षाविद, पढ़ाई विशेषज्ञ, आहार विशेषज्ञ और बाल विकास विशेषज्ञ शामिल हैं। ये सभी बच्चों का ध्यान रखते हैं और उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हैं। इतने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी कोई आसान कार्य नहीं, इसलिए डाॅ. शैलेश ने इन बच्चों की देखरेख के लिए कुछ और भी गैर-सरकारी संस्थाओं से हाथ मिलाए।

1950 में अहमदाबाद में जन्मे डाॅ. शैलेश विश्व के 30 श्रेष्ठ नेतृत्व गुरुओं में शामिल हैं। कम से कम 62 देशों में उन्होंने 1850 से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन किया है। लगभग 500 प्रशिक्षकों के लिए डिज़ाइन, विकास और आचरण आदि से संबंधित प्रशिक्षण भी दी है। उन्होंने स्वालम्बंन पर 75 से अधिक पुस्तकें भी लिखी है।

डाॅक्टर शैलेश ठाकेर अपने अगले जन्म दिवस के लिए 51 बच्चों के चुनाव की तैयारी में हैं। इस बैच के बच्चें बेहतरीन शिक्षा सुविधाएं पा कर बेहद खुश है। डाॅक्टर शैलेश के भविष्य के प्रयासों के लिए हम उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं।

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