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रियल लाइफ हीरो हैं कांस्टेबल शिंदे, आग की लपटों में झुलस रहे 8 लोगों को बाहर निकाल दिया जीवनदान

अाग लगने की घटना के वक्त तत्परता जितनी महत्त्वपूर्ण है उतना ही या उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण होता है उस भयावह स्थिति में दिलेरी दिखाने की। वहाँ न सिर्फ आग पर काबू पाना होता है बल्कि उसमें फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने की भी जिम्मेदारी होती है और ऐसे में हिम्मत, युक्ति और सूझबूझ के साथ त्वरित कार्य करते हुए निर्णय करने होते हैं। यही निर्णय कइयों के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं।

हाल ही में मुंबई के कमला मिल के मोजो लाउंज में लगी भीषण आग ने 14 लोगों को दर्दनाक मौत दी, वहीं मुंबई पुलिस के बहादुर कांस्टेबल सुदर्शन शिंदे जैसे लोग के हौसले की वजह से कई जाने बच भी पाई वरना आँकड़े और भी दर्दनाक हो सकते थे।

मुंबई में लोअर परेल इलाके की इस इमारत में लगी आग की खबर मिलते ही इस परिसर के सबसे नजदीक वर्ली पुलिस स्टेशन के जवान फायर ब्रिगेड से पहले पहुंचकर राहतकार्य में जुट गए थे। जब शिंदे घटना स्थल पर पहुंचे तो हर तरफ से आग निकल रही थी। अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए बाहर खड़े लोग सोच रहे थे। वे फायर ब्रिगेड की मदद करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने सीढ़ियों की तरफ दौड़ लगाई और जो घायल आग और धुएं के चलते काफी बुरी हालत में थे उसे कंधे पर उठा कर बाहर ले आए। शिंदे वर्ली पुलिस स्टेशन में तैनात हैं।

वर्ली पुलिस स्टेशन के जवान सुदर्शन शिंदे ने घटना स्थल पर बगैर स्ट्रेचर के लाशें निकालीं, एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक शिंदे हर बार 7-7 मंजिल ऊपर जाकर तीन लाशें नीचे लाए। सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें शिंदे अपने कंधों पर एक महिला को उठाकर बाहर ला रहे हैं।

घटना पर बात करते हुए खुद सुदर्शन शिंदे ने बताया कि- ‘जब मैं ऊपर पहुंचा तो सब कुछ जल चुका था। घटनास्थल पर शराब की बोतलें और गैस सिलेंडर से विस्फोट की आवाजें आ रही थीं। वहां कुछ हुक्का रखे हुए थे, जो आग को और बढ़ा रहे थे। मुझे एक महिला दिखी जो खांस रही थी। शायद घुटन की वजह से उन्होंने बाद में दम तोड़ दिया।” शिंदे के अलावे और भी पुलिसकर्मियों ने इस दौरान राहतकार्य में बेहद तत्परता दिखाई।

मेयर विश्वनाथ महादेश्वर और पुलिस कमिश्नर दत्ता पदासगेलकर ने सुदर्शन शिंदे को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया। कमला मिल कंपाउंड में लगी आग में फँसे कई जानों को बचाने का श्रेय शिंदे को जाता है। इस घटना में 14 जानें गई जबकि 55 घायलों को आस-पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जिनमें से 41 को घर जाने की इजाज़त दे दी गई थी और 14 घायलों का इलाज के लिए अस्पताल में रखा गया।

कमला मिल कंपाउंड मुंबई के सेनापति बापट मार्ग पर है। ये इलाका बड़ी कंपनियों के दफ्तरों का कमर्शियल हब है। सुरक्षा इंतज़ामों को लापरवाही और अवैध निर्माण के चलते आग पर काबू करने में काफी समय लगा। रात के समय कमला मिल कंपाउंड में छत पर आग लगी थी। बीएमसी आपदा प्रबंधन को देर रात 12.30 बजे कमला ट्रेड हाउस में रूफटॉप रेस्तरां पब बिस्ट्रो द मोजो में आग लगने की खबर मिली। घटना स्थल पर 8 दमकल और 6 पानी टैंकरों की मदद ली गई।

ऐसे भयानक हादसों पर सुदर्शन शिंदे का पराक्रम अनुकरणीय है। हर जान कीमती है जिसे बचाने का हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उनके इस शौर्य के लिए उन्हें तहे दिल से सलाम है।

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