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गरीबी को मात देकर बनी सरपंच, आज स्वछता और नशाबंदी अभियान के चलते है लोगों की आँखों का तारा

तूफानों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अक्सर ये पंक्तियाँ हम सुनते आये हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं जिन्होंने इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया हैं और अपनी कोशिशों के दम पर एक अलग पहचान बनाई है। हमारी आज की कहानी एक ऐसी महिला प्रधान की है जिसने कई मुश्किलें आने के बाद भी अपने संकल्प को पूरा किया। आज हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की ग्राम पंचायत थरजूण जो कि कहने को एक छोटासा गांव है लेकिन वहाँ की प्रधान जबना चौहान के प्रयासों से आज यह पूरे देश के आगे एक मिसाल बनकर खड़ा है।

प्रधान जबना केवल हिमाचल की ही नहीं बल्कि देश की सबसे युवा प्रधान है। छोटी उम्र में मजबूत इरादों वाली जबना ने शराबबंदी जैसा प्रस्ताव आम सभा में सर्वसम्मति से पास करवाकर अपने प्रयासों से अपनी ग्राम पंचायत और राज्य का नाम पूरे देश में रोशन किया है। युवा नेतृत्व सशक्त महिला प्रधान जबना को उनके सराहनीय कार्यों के लिए  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है

जबना का जन्म हिमाचल के एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन से ही वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को देखती बड़ी हुई। बचपन से ही उनके अंदर यह चाहत पैदा हुई कि बड़ी होकर वह अपने गाँव थरजूण को एक आदर्श ग्राम बनाने में यथासंभव योगदान देंगी। जबना ने स्थानीय स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर की शुरुआत एक न्यूज चैनल में रिपोर्टर और एंकर के तौर पर की। लेकिन उनका मन तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का था। कुछ अलग करने का जज्बा रखने वाली जबना ने 22 साल की उम्र में गांव के प्रधान पद के लिए होने वाले चुनाव में अपना नामांकन दाखिल किया।

जबना बताती है कि  “मैं जब प्रधान का नॉमिनेशन करने जा रही थी तो मन में सिर्फ एक सपना था कि अपनी पंचायत को नशा मुक्त करना है क्योंकि थरजूण पंचायत एक ऐसी पंचायत थी जहां लोग सुबह से ही शराब पीना शुरू कर देते थे।

जबना के जज़्बे और सकारात्मक सोच का ही प्रभाव था कि उनकी ग्राम पंचायत के निवासियों ने एक 22 साल की युवा को गाँव के नेतृत्व की बागडोर सौपीं। अपनी जीत के बाद उन्होंने सबसे पहले यह निर्णय लिया कि ग्राम पंचायत में कोई शराब नहीं पियेगा। इस निर्णय के बाद उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

कुछ लोग शराब पीकर मुझे फ़ोन करते और कहते की तुमने बहुत गलत फैसला लिया है, अपना फैसला बदल दो नहीं तो हम तुम्हें जान से मार देंगे।

लेकिन जबना अपने निर्णय पर अडिग रही जबना का उन लोगों को जबाव था कि “मुझे मारोगे तो इस देश में बदलाव लाने वाली मेरे जैसी कई जबना खड़ी हो जाएंगी।” उन्होंने प्रधान बनने के मात्र एक साल के अंदर ही पंचायत में शराबबंदी की पहल कर वो काम कर दिखाया जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। नशे के खिलाफ शराबबंदी जैसा प्रस्ताव पंचायत की आम सभा की बैठक में पारित करवाकर जिले की इस युवा महिला प्रधान ने एक उदाहरण पेश किया। इसके आलावा उन्होंने स्वच्छता के क्षेत्र में भी अपनी पंचायत को जिले में शीर्ष पर पहुंचाकर देश के सामने एक मिसाल पेश की।

हाल ही में देश की इस बेटी को स्वच्छता अभियान और शराबबंदी के लिए जनता को जागरूक करने हेतु अभिनेता अक्षय कुमार ने भी अपनी फिल्म टॉयलेटएक प्रेम कथा के प्रमोशन समारोह के दौरान सम्मानित किया। जिसके बाद उनकी चर्चा हर तरफ होने लगी है।

इसके साथ ही सुंदरनगर के सामाजिक जागरण मंच ने थरजूण की प्रधान जबना चौहान को नशाबंदी और सरकार द्वारा चलाये जा रहे नशाबंदी को गति प्रदान करने के लिए ब्रैंड एंबैस्डर भी बनाए जाने की मांग रखी है। जबना को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए पंजाब और हिमाचल के मुख्यमंत्रियों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। साथ ही उन्हें बेस्ट सरपंच के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जबना समाज से अपील करते हुए कहती है किस्वछता, नशामुक्ति आदि कामों में तेजी लाने के लिए और इस पक्ष में माहौल बनाने के लिए समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आना होगा और अपना सहयोग देना होगा।

थरजूण पंचायत जबना के प्रयासों की वजह से आज एक आदर्श पंचायत बन गई है। जबना की ही तरह देश के हर युवा को आगे आना होगा और स्वच्छ भारत के इस मिशन में अपना योगदान देना होगा। तभी हम स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के सपने को पूरा कर पाएंगे। 

जबना के प्रयासों की सराहना नीचे कमेंट बॉक्स में करते हुए इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

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