,

शिक्षा के बल पर सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर सरकारी नौकरी करने वाली प‍हली महिला ट्रांसजेंडर

रूढ़िवादिता जब समाज के किसी एक तबके को अपनी परिभाषाओं से सीमित कर देती है तो वह दायरा तोड़ पाना उस विशेष तबके के लिए सामाजिक घृणा का कारण भी बन जाता है, यह एक भयानक सामाजिक विकृति है जो आज भी हमारे देश में देखने को मिल जाती है। लेकिन अपनी योग्‍यता के बल पर जानकी ने समाज की इस विकृति का हर कदम पर मुकाबला किया और अपनी सफलता से स्‍वयं को साबित भी कर दिखाया।

जानकी का जन्म आंध्र प्रदेश के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ जन्म से उसके किन्नर होने का पता परिवार वालों को था लेकिन उन्होंने जानकी पर हमेशा लड़के जैसा व्यवहार करने का दबाव रखा। 19 वर्ष तक परिवार वालों की शर्म के इस बोझ तले जानकी ने दिखावटी जीवन जिया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सरकारी कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में डिग्री भी हासिल की। सामाजिक मानसिकता का विकृत रुप कॉलेज में भी जानकी को झेलना पड़ा लेकिन अपने शिक्षकों की प्रेरणा से जानकी ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ही ली। आगे पढ़कर वह बैचलर ऑफ एजुकेशन की डिग्री भी लेना चाहती थी। साथ ही जानकी अपनी असलियत को अब और नहीं छुपाना चाहती थी इसलिए अपने परिवार को छोड़ने का फैसला ले लिया। कुछ डॉक्टरों और समाज के सहायक लोगों की मदद से ट्रांसजेंडर करवाकर जानकी ने एक महिला के रूप में अपने व्यक्तित्व को विकसित किया और अपनी पढ़ाई जारी रखी।

सामाजिक विकृति ने अब भी जानकी का पीछा नहीं छोड़ा। दो-दो शैक्षणिक डिग्रियां होने के बावजूद उसे कहीं नौकरी नहीं मिली। बेघर जानकी को रहने के लिए एक धर्मशाला में शरण लेनी पड़ी और सड़कों पर भीख मांग कर गुजारा करने पर विवश हो गई। कुछ समय पहले जानकी को अपनी सहेली के साथ डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास राशन एवं आधार कार्ड के सिलसिले में जाना पड़ा जहां कलेक्टर ने जानकी की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जानकर हाउसिंग डिपार्टमेंट में नौकरी का आवेदन करने के लिए जानकी को कहा। सौभाग्य की बात ये रही कि जानकी ने यह परीक्षा पास कर ली और उसे शुरू में ही 15000 रुपए महीने की पगार पर डाटा एंट्री ऑपरेटर की सरकारी नौकरी भी मिल गई। जानकी बड़ी ही कर्तव्य परायणता के साथ अपनी नौकरी कर रही है, इस आशा के साथ कि उसे आगे गणित में मास्टर की डिग्री भी लेनी है।

अपने परिवार द्वारा अभी भी स्वीकार नहीं किए जाने का दर्द जानकी के हृदय में है क्योंकि जानकी की नौकरी की खबर मिलने पर भी उसके परिवार ने उसे वापस नहीं बुलाया। जानकी अपनी मां के प्रति अपने प्यार को छुपाना नहीं चाहती इसलिए पहली पगार से अपने लिए किराए का घर और मां के लिए उपहार लेना चाहती है।

जानकी ने जिस रुप में जन्म लिया उसमें उसका कोई दोष नहीं था। लेकिन अपनी लगन और मेहनत से वह जिस मंजिल की तरफ जा रही है वास्तव में यह प्रशंसनीय है और जानकी के परिवारवालों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। जानकी की कहानी को पाठकों द्वारा पसंद किया जाना प्रत्यक्ष रुप से जानकी के परिवार को उसे स्वीकार करने का आह्वान होगा।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें