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साइकिल जत्था जो 2000 किमी ट्रेवल कर भारतीय सैनिकों को सलामी देकर करेगा नए साल का आगाज

चमन के फूल भी उन्हें गुलाब कहेंगे, हम ही नहीं सभी उनके काम को लाजवाब कहेंगे
साइकिल पर निकले है वो सेना को सलाम करने, हम ही नहीं सभी उन्हें प्रेरणा की किताब कहेंगे

यदि सीमा पर हमारे सैनिक सुरक्षा नहीं करते तो भारत का कोई भी व्यक्ति चैन की नींद नही सो सकता था। हम भारतीय सेना के जवानों के साथ अपनी तुलना नहीं कर सकते क्योंकि वो श्रेष्ठ नहीं श्रेष्ठतम हैं। आज उनकी सीमा पर निगहबानी के कारण ही हम और हमारा भारत सुरक्षित है। दुश्मनों को मुँह तोड़ जवाब देने वाली सेना के प्रति हमारा भी कुछ फर्ज बनता है उसी फर्ज को निभाते हुए भारतीय सेना को सलाम करते हुए महाराष्ट्र के मराठा वॉरियर का दल पुणे से रवाना होकर हाल ही में झीलों की नगरी उदयपुर पहुँचा। जब केनफ़ोलिओज़ की टीम को उनके बारे में पता लगा तो हमने उनसे मिलकर उनका सन्देश आप तक पहुँचाने का प्रयास किया।

मराठा वॉरियर का यह दल भारतीय सेना में शामिल होने की अपील करते हुए 2000 किमी की साइकिल यात्रा पर निकला है। मराठा वॉरियर का 10 सदस्यों का यह दल 14 दिसम्बर को पुणे से रवाना होकर 2000 किमी की यात्रा तय करते हुए भारत के 4 राज्यों महाराष्ट्र , गुजरात ,राजस्थान और पंजाब होते हुए वाघा बोर्डर पहुँच कर देश की सुरक्षा के प्रहरी हमारे भारतीय सैनिकों को सलामी देकर नए साल का आगाज करेगा।

दल के सदस्य प्रदनेश मोलक ने बताया कि “हमारा लक्ष्य यह है कि भारत का प्रत्येक नागरिक भारतीय सेना का सम्मान करें और सेना में शामिल होना को अपना लक्ष्य बनाये। हम लोग अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को बताते हैं कि हमें भारतीय सेना ज्वॉइन करनी चाहिए। साथ ही भारतीय सेना में शामिल होने हेतु आवश्यक योग्यताओं के बारे में भी बात करते हैं। जिससे हमारे देश के बच्चों के मन में सेना में शामिल होने की और देश की रक्षा हेतु कार्य करने की भावना उत्पन्न हो।”

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की मराठा वॉरियर के सभी सदस्य अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े है लेकिन अपने कर्तव्य को समझते हुए और आज के भागदौड़ भरे जीवन से समय निकाल कर साइकिल यात्रा पर निकले हैं। यह सेना के प्रति सम्मान का जज़्बा ही है जो उन्हें साइकिल से 2000 किमी की यात्रा के लिए प्रेरित करता है। हम सभी जानते हैं कि आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली में हम अपने लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे और यह दल मार्ग की तमाम मुश्किलों को झेलते हुए सर्दी की मार सहते हुए आगे बढ़ता हुआ भारतीय सेना के लिए प्रति अपना थोड़ा सा ही सही पर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपना फर्ज़ अदा कर रहा है।

प्रदनेश ने बताया कि ” हमारी सेना हमारा गौरव है और यदि उनके लिए हम कुछ कर सकें तो इससे ज्यादा गर्व की बात हमारे लिए कुछ भी नही है। और रही बात हमारी राह में आने वाली समस्याओं की तो हमारे लक्ष्य के आगे वो कुछ भी नहीं है। वाघा बार्डर पहुँच कर जो अनुभव मिलेगा जो उत्साह जागेगा उसके लिए कितनी भी यात्रा क्यों ना करनी पड़े हम करेंगे।”

इस दल में बड़े ही नही बल्कि एक नन्हा सिपाही अंशुमान धावड़े भी शामिल है जिसकी आयु केवल 10 वर्ष है लेकिन जज़्बा ऐसा की बड़े-बड़े दाँतों तले उंगलियां दबा ले। अंशुमान बिना रुके इस साइकिल यात्रा को उसके लक्ष्य तक पहुँचाने को लेकर ख़ास उत्साहित हैं।

साथ ही इस दल में राम फूगे, बजरंग मोलक, संदीप शिंदे, नीलेश धावड़े, प्रशांत जाधव, सन्तोष दारेकर, विजय हरगुडे और विश्वास काशिद शामिल है। इन सभी की आपसी समझ देखकर हमें तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आ गई जिसमें उन्होंने कहा है
बाधाएं आती है तो आये , घिरे प्रलय की घोर घटाएं

पांवों के नीचे अंगारे , सर पर बरसें यदि ज्वालाएँ

निज हाथों में लेकर अंगारे कदम मिलाकर चलना होगा।

केनफ़ोलिओज़ की पूरी टीम की ओर से हम सलाम करते हैं मराठा वॉरियर के साहस को और उनके लक्ष्य को जो प्रत्येक भारतीय में देशभक्ति का जज़्बा उत्पन्न करता है।

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