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पिता-पुत्र मिलकर कचड़े से बना रहे हैं करोड़ों रुपये, देश के हर शहर में है ऐसे स्टार्टअप की जरूरत

हमारे आस पास हर रोज न जाने कितनी ऐसी वस्तुएँ दिखती है जो भले ही व्यर्थ मान कर फेंक दी गयी हों, पर उन वस्तुओं में उपयोगिता जीवित रह जाती है। हम अक्सर उन वस्तुओं पर इसलिए ध्यान नहीं देते क्योंकि हमें उनके सही उपयोग की जानकारी नहीं होती। हम उन्हें या तो कूड़े में फेंक देते हैं या कबाड़ में बेच देते हैं। लेकिन कहते हैं न कि असली हीरे की पहचान केवल एक जौहरी को ही होती है, उसी प्रकार से ऐसी वस्तुओं की उपयोगिता केवल कुछ लोगों द्वारा ही समझी जाती है। ऐसे ही एक जौहरी मणिपुर के इम्फाल में भी रहते हैं। वहां रहने वाली पिता-पुत्र की जोड़ी एक सफल रीसाइक्लिंग कार्यक्रम के जरिये न केवल वातावरण का बचाव कर रही है बल्कि इसके जरिये शहर के हज़ारों लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।

सदोकपम ईतोम्बी सिंह एवं उनके पिता सदोकपम गुणकांता ने इम्फाल में वर्ष 2007 में प्लास्टिक-वेस्ट रीसाइक्लिंग यन्त्र को स्थापित किया था। जिसके जरिये प्लास्टिक के कचरे से पाइप, फूलों का गमला, टब एवं अन्य घरेलू उत्पाद बनाये जाते हैं। आइये उनके इस कार्य को विस्तार से समझते हैं।

सांकेतिक तस्वीर

वर्ष 2007 में हुई 1.5 लाख से शुरुआत, आज कंपनी करती है 1.5 करोड़ का कारोबार

पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने वर्ष 2007 में केवल रीसाइक्लिंग के उद्देश्य से अपने यन्त्र को स्थापित किया था। हालाँकि उनकी सफलता की उड़ान का आलम कुछ यह रहा कि उन्होंने वर्ष 2010 में विनिर्माण इकाई में और मशीनों को जोड़ देने के पश्चात इसे एक पूर्ण कंपनी में तब्दील कर दिया। इस कंपनी का नाम एसजे प्लास्टिक इंडस्ट्रीज़ है और यह इम्फाल जिले के सगोलबंद सदोकपम लेइकै इलाके में स्थित है। इस इकाई का संचालन करने वाली पिता-पुत्र की जोड़ी में जहाँ पिता ने सरकारी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है तो वहीं बेटे ईतोम्बी एक कंप्यूटर एप्लीकेशन के विद्यार्थी रहे हैं। उनके द्वारा व्यापार के क्षेत्र में यह सफलता पाना अतुलनीय है।

मकसद है शहर को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

जैसा की हम जानते हैं कि सरकार से लेकर तमाम गैर सरकारी संगठन एवं सामाजिक कार्यकर्ता हमेशा से इस बात पर जोर देते आये हैं कि हम सभी को प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इसके कारण होने वाले प्रदूषण से हमारा भविष्य अंधेरे में पड़ सकता है। इस बात को इस पिता-पुत्र की जोड़ी ने गंभीरता से समझा और अपने राज्य में प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल की रोकथाम के लिए उसे रीसायकल करने का सोचा और फिर स्थापित की अपनी विनिर्माण इकाई। इसके जरिये वो अपने इलाके के जीवन यापन स्तर को भी बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं।

ईतोम्बी ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि, “प्लास्टिक एक बेहद ही ज़रूरी उत्पाद है और उतना ही जरूरी है इसे खत्म करने का इंतज़ाम करना।”

पहले प्लास्टिक इकट्ठा करके भेजते थे गुवाहाटी और दिल्ली

इस पिता पुत्र की जोड़ी का पर्यावरण से पुराना प्रेम है। 90 के दशक में अपने इलाके में गुणकांता प्लास्टिक कचरे को रीसायकल करने का प्रयास अपने अकेले दम पर किया करते थे। इसमें उनके बेटे भी उनका साथ दिया करते थे। वो दोनों मिलकर अपने इलाके में कचरे को बटोर कर नई दिल्ली एवं गुवाहाटी में स्थित रीसाइक्लिंग प्लांट में भेजा करते थे। अभी भी राज्य में पाए जाने वाले 120 प्रकार के प्लास्टिक में 30 प्रकार के प्लास्टिक मणिपुर में रीसायकल कर लिए जाते हैं, बाकि 90 प्रकार के प्लास्टिक को अब भी गुवाहाटी और दिल्ली भेजना पड़ता है। हालाँकि एसजे इंडस्ट्रीज़ के इम्फाल में कार्यशील हो जाने के बाद प्रदेश में बहुत हद तक प्लास्टिक रीसाइक्लिंग की समस्या हल हुई है।

पिता-पुत्र की इस जोड़ी के प्रयासों को देख कर यह जरूर कहा जा सकता है कि पर्यावरण को बचाते हुए एवं लोगों को रोज़गार देते हुए उनके द्वारा बेहद नेक कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस बात को बेहद गहराई से समझा कि चूँकि प्लास्टिक को रीसायकल किया जा सकता है और इससे पहले की उनके बढ़ते उपयोग के कारण हमारे पर्यावरण एवं पानी को नुक्सान पहुंचे, उसका सही इस्तेमाल होना चाहिए एवं उसको रीसायकल करते रहना चाहिए। इसी सोच के साथ इस जोड़ी ने अकेले दम पर न केवल एक सफल व्यापार की शुरूआत की बल्कि यह भी दिखा दिया की अगर व्यक्ति चाहे तो समाज में परिवर्तन की मुहिम अकेले अपने कन्धों पर उठा सकता है।

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