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बम विस्फोट में दोनों हाथ खोने के बावजूद हार नहीं मानी, आज हैं लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत

कहते हैं हाथों की रेखाएं भाग्य की रेखाओं तक जाती हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार भी और कर्म विज्ञान के अनुसार भी कर्म करने वाले हाथ ही भाग्यशाली बनने का गौरव प्राप्त करते हैं। लेकिन 13 मई 2002 को मालविका के जीवन में जो घटित हुआ उससे बुरा कुछ नहीं हो सकता था और उसके बाद जिस बहादुरी से उन्होंने अपने दुर्भाग्य को हराया ऐसी कुछ मिसालें ही धरती पर देखने को मिलती हैं।

मालविका अय्यर का जन्म तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ लेकिन उनकी परवरिश राजस्थान के बीकानेर में हुई। महज 13 साल की उम्र में वह एक भयानक हादसे का शिकार हुई थी। दरअसल उसे उनके घर के पास ही एक ग्रेनेड पड़ा मिला था। नजदीक के ही एक एमुनेशन डिपो में आग लगने के चलते इलाके में उसके शेल बिखर गए थे। वह ग्रेनेड मालविका के हाथों में ही फट गया। जिसके चलते उनके दोनों हाथों के अलावा दोनों पैरों में भी कई फ्रैक्चर्स और नर्व सिस्टम डैमेज हो गया। इलाज के लिए उसे चेन्नई के एक हॉस्पिटल में दो साल रहना पड़ा। वह अपने दोनों हाथ खो चुकी थीं और दोनों पैरों में अपंग हो गई।

तीन महीने तक बिस्‍तर पर असहनीय पीड़ा झेल रही मालविका ने हाथ ही खोए थे जीने की इच्छा और कुछ बनने की प्रतिज्ञा नहीं। 10वीं कक्षा में कड़ी मेहनत करके 500 में से 483 नंबर लाकर मालविका रातोंरात सुपरस्टार बन गई। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया गया। इसके बाद उसने दिल्ली जाकर सेंट स्टीफन कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स की डिग्री ली। इतना ही नहीं, उन्होंने आगे पढ़ाई जारी रखते हुए दिल्ली स्कूल से सोशल वर्क में मास्टर्स और मद्रास स्कूल से एम. फिल की पढ़ाई पूरी की। अपने बेहतरीन काम की बदौलत उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर भी कई अवॉर्ड्स मिले। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मालविका ने एक ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने हादसे में हाथ गंवाने के बाद पहली बार खाना पकाया और उसके लिए मशहूर शेफ विकास खन्ना ने तारीफ भी की।  

आज मालविका मोटिवेशनल टेड एक्‍स स्पीकर, पीएचडी स्कॉलर हैं। दिव्यांगों के लिए बने डिजाइनर कपड़ों की मॉडलिंग करने वाली मालविका की खूबसूरती उनके साथ हुए हादसे की मोहताज नहीं है। नार्वे, साउथ अफ्रीका, इंडोनेशिया जैसे देशों में विशेष रुप से कॉन्फ्रेंस के लिए उन्‍हें आमंत्रित किया गया।

स्कॉट हैमिल्टन के शब्दों पर विश्वास रखने वाली मालविका मानती हैं कि जिंदगी की सबसे बड़ी विकलांगता आपका बुरा व्यवहार है। मालविका का मानना है नई शुरुआत करें, अभी करें, चाहे मन में डर हो, दर्द हो, निराशा हो, आवाज कांप रही हो, हाथ कांप रहे हो, बस नई शुरुआत करें और लक्ष्य को पाने तक आगे बढ़ते रहें क्योंकि यही अग्नि परीक्षाएं सफलता के सूर्य तक आप को ले जाएंगी।

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