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मिलिए 15 साल के अभिजीत से: ठेलाचालक का यह बेटा है भारतीय फुटबॉल टीम का चमकता सितारा

पूरा विश्व बेसब्री से FIFA U-17 के दिल थाम देने वाले मुकाबला देख रहा है। इस स्पर्धा में नये युवा प्रतिभाओं की विशिष्टता को चमक मिलती है। उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन से दौलत और शौहरत कमाने का सुनहरा मौका मिलता है। इस स्पर्धा में भारतीय टीम की तरफ से खेल रहे एक खिलाड़ी ने सबके नजर में अपनी पहचान बनाई है। दिग्गज खिलाड़ी भी उसके प्रदर्शन से उसमें एक उभरता सितारा देख रहे हैं।

अभिजीत सरकार भारतीय फुटबॉल टीम का एक एेसे ही उभरते सितारे हैं। जो मैदान में डट कर उन अवसरों को अपना बना लेना चाहते हैं। अपने कंधों पर बचपन की गरीबी का बोझ लिए हुए अभिजीत को फुटबॉल के बारे में तब पता चला, जब फुटबॉल जगत के पूर्व दिग्गज ब्राजील के खिलाड़ी कार्लोस अल्बर्टो ने उन्हें 2014 में एक लाल फुटबॉल देते हुए कहा, “अपनी जिन्दगी इसके साथ जियो। हर रात, जब तुम रात में सोते हो यह फुटबॉल तुम्हारा साथी होना चाहिए।” कार्लोस अलबर्टो 2014 में FIFA ट्राफी के परिभ्रमण पर कोलकत्ता आए हुए थे। तब से फूटबाॅल ही उनकी दुनिया बन गई है।

वे यथार्थ में वही करते हैं जो उस अपूर्व खिलाड़ी ने उन्हें सलाह दी थी। वे फूटबाॅल के लिए ही खाते हैं, सोते हैं और जीते हैं।

हमेशा से अभिजीत के मार्गदर्शक और फुटबॉल कोच अशोक मौण्डल रहे। अशोक पहले एक कलम निर्माता कंपनी में काम किया करते थे। पर उन्होंने उस काम को अलविदा कह दिया। वे अबतक अविवाहित हैं और टोटो-रिक्शा चलाते हैं क्योंकि वे आर्थिक रुप से पिछड़े उन बच्चों की मदद करना चाहते थे जिनका सपना एक बेहतर फूटबाॅल खिलाड़ी बनने की चाहत रखते हैं। उन्होंने अभिजीत के लिए फूटबाॅल, खेलने के जूते और जर्सी (jersy) खरीदने में मदद की और आगे भी उसे हर तरफ की सहायता प्रदान की।

आज फुटबॉल के कारण चर्चा और प्रसिद्धी पाए अभिजीत के पीछे एक गरीबी की दिल दहला देने वाली कहानी है। कोलकत्ता से 40 किलोमिटर दूर बंडेल जिले में एक गरीब घर में पैदा हुए अभिजीत अपने माँ पिता की एकलौती संतान हैं। हेमंता बासु काॅलोनि निवासी, उनके पिता, हारेन हाथ गाड़ी पर माल ढुलाई करते हैं। यद्यपि वे सुबह 3 बजे बंडेल के चौकबाजार जा कर मछली खरीद कर लाते हैं और उसे पड़ोस के शहर चिनसुराह के बाजार में बेचते हैं। जिससे उन्हें मुश्किल से हर दिन 200-250 रुपये के कमाई हो जाती है। अभिजीत की माँ आलोका जो अक्सर बीमार रहती हैं वह भी अपने घर के प्रतिदिन के आय में 20-25 रुपये का सहयोग करने के लिए पड़ोस के दुकान के लिए दिनभर बीडी बाँधती है। 10×12 स्क्वाॅयर फीट के लकड़ी के घर में रहने वाला यह परिवार अपने संघर्षों के बावजूद अपने बेटे के सपने के लिए हर संभव प्रयास करता है।

अभिजीत के माता-पिता उनके लिए फुटबॉल की सहायक समाग्री खरीद पाने में अक्षम हैं परंतु वे इतने समृद्ध हैं कि वे उन्हें अपने सपने को जीने और साकार करने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं। अभिजीत के माता पिता को उनकी क्षमता पर पूर्ण विश्वास था वे आश्वस्त थे कि वह उनके लिए अच्छे दिन लाएँगे। उनके लिए अच्छे दिन का तात्पर्य यह नहीं की उनके पास पैसे हो जाएँगे बल्कि वह आज का दिन है जब अभिजीत अपने लिए नाम और शौहरत कमा रहे हैं और समाज में सम्मान पा रहें हैं।

अभिजीत पाँच वर्ष की उम्र से फुटबॉल खेलते थे। पर यह यात्रा तब शुरु हुई थी जब वे सब-जूनियर (U-13) राष्ट्रीय टूर्नामेंट में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने गये थे। वहाँ उन्हें चयन समिति द्वारा चिन्हित किया गया और 2013 में अाॅल इण्डिया फुटबॉल फेडरेशन अकादमी (AIFF) में उन्हें ट्रेनिंग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। उसके बाद वे AIFFA परिक्षण के लिए कोलकत्ता गये और फिर गोवा भी उनका जाना हुआ। इसके बाद अभिजीत ने कभी भी अपने करियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा आज उनके प्रशंसकों की कतारें हैं। अभिजीत मोहन बागान फुटबॉल कल्ब के कट्टर समर्थक है जबकि उनके पिता ईस्ट बंगाल के पक्षपाति है। उन्होंने अपनी माध्यमिक परिक्षा तब पास की जब वे U-15 राष्ट्रीय टीम में गोवा गये हुए थे।

आज पूरा भारत इस वर्ष FIFA U-17 में अपने चमकते सितारे अभिजीत की प्रभा को देख कर खुश है। अभिजीत के माता पिता भी अभिजीत के इस खेल प्रदर्शन पर उन करोड़ो लोगो की तरह ही गर्व करते हुए उनके दमकते देख रहें हैं। मगर हारेन और आलोका अपने बेटे को खेलते हुए नहीं देख पाने का दुःख है। अभिजीत बतौर मिडफिल्ड स्ट्राईकर खिलाड़ी टीम में खेल रहे हैं। अभिजीत को 10 नम्बर की जर्सी दी गई है। 10 नम्बर की जर्सी दिग्गज खिलाड़ीयों की जर्सी संख्या रही है। डियेगो माराडोना, लियोनेन मैसी, नेमार और भी कई भूतपूर्व और वर्तमान खिलाड़ी ने पहना हैं जिस पर टीम बेहतरीन प्रदर्शन की जिम्मेदारी समझती है। उसी परंपरा के तहत अभिजीत को भी 10 नम्बक की जर्सी दी गई है।

गरीबी दैवीय अभिशाप नहीं, मानवीय सृष्टि है। महात्मा गाँधी का यह कथन को साबित किया अभिजीत सरकार ने। अपनी क्षमता और लगन से अभिजीत न सिर्फ अार्थिक कुचक्र को तोड़ा बल्कि नाम शौहरत और समाजिक प्रतिष्ठा भी पा रहें हैं। मानवीय सृष्टी गरीबी से बाहर आने के अनेकों विकल्प है जरुरत है तो बस अपने अन्दर की क्षमता को पहचानने की और आत्मविश्व, लगन और जोश के साथ अथक प्रयास करने की जैसा अभिजीत सरकार ने किया।

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