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गंदे पानी का अनूठे तरीके से इस्तेमाल कर इस लड़की ने बिजली उत्पादन कर सबको हैरत में डाल दिया

हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, और ही कमी है युवाओं के जोश में। हम यह भी देखते हैं कि देश में युवाशक्ति ने हर बार कुछ कुछ अलग कर दिखाया है और देश का नाम वैश्विक पटल पर रोशन किया है। हालाँकि देश में प्रतिभा के साथ-साथ कुछ समस्याएं भी व्याप्त हैं, जिसमे से प्रमुख समस्या है गंदगी की। हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत के अपने मिशन के अंतर्गत भारत को गंदगी मुक्त बनाने का एक बेहद जरूरी फैसला लिया है जिसके कारण समाज में काफी परिवर्तन देखने को मिल भी रहा है। हम अपने आस-पास सीवर के पानी को देखते ही आम तौर पर आँख मुंह सिकुड़ने लगते हैं। लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा है कि शायद इस पानी का उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन किया जा सकता है और देश के दूर दराज इलाकों में व्याप्त अंधेरों में रोशनी लाई जा सकती है? शायद नहीं, लेकिन आईआईटी की एक छात्रा, राम्या वीरूभोतला ने ऐसा करने का सिर्फ सोचा बल्कि इस गंदे पानी से एक आविष्कार करके भी दिखा दिया। उन्होंने इस गंदे पानी का अनूठे तरीके से इस्तेमाल करते हुए बिजली उत्पादन कर सबको हैरत में डाल दिया।

सीवर के पानी से बना डाली बैटरी और जीता 10 लाख का इनाम

आईआईटी खड़गपुर में पढ़ने वाली बायो टेक्नोलॉजी की छात्रा राम्या वीरूभोतला ने सीवर के गंदे पानी का इस्तेमाल करते हुए बिजली का उत्पादन करने वाली बैटरी बना डाली। आईआईटी से पीएचडी करने वाली राम्या ने सालाना आयोजित होने वाली प्रतियोगिता ‘केपीआईटी स्पार्कल 2018′ में अपना यह इनोवेशन पेश किया। केपीआईटी स्पार्कल 2018, एक नेशनल डिज़ाइन और डवलपमेंट इनोवेशन प्रतियोगिता है, जो हर साल आयोजित किया जाता है। इस प्रतियोगिता में राम्या के प्रोजेक्ट को प्रथम स्थान मिला और इसके लिए उन्हें 10 लाख रुपये का इनाम भी हासिल हुआ है। इस प्रतियोगिता में देश भर के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभागिता दिखाई थी।

बचपन से सुनती थी दूषित पानी की समस्या के बारे में, बड़े होकर उसी का किया उम्दा उपयोग

राम्या ने इस बैटरी का निर्माण करने से पहले दूषित पानी पर काफी शोध किया और उन बैक्टीरिया की पहचान की जो बिजली उत्पादन में मददगार साबित हो सकते हैं। आईआईटी खड़गपुर में पढ़ने वाली राम्या को बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा थी और वो अक्सर अपने आस-पास के लोगों से दूषित पानी की समस्या का हल मांगते हुए देखा करती थी और फिर उन्हें एक दिन यह विचार आया कि क्यों दूषित पानी से कुछ अलग करके दिखाया जाए, उसी का परिणाम है कि आज उन्होंने पेपर के इस्तेमाल से यह बैटरी बना डाली, जिसे गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया से चलाया जाता है। ऐसा करते हुए बिजली का उत्पादन संभव होता है। उन्होंने केपीआईटी स्पार्कल 2018 में भाग ले रहे 12,000 प्रतियोगियों को पछाड़ते हुए 10 लाख का यह पुरस्कार अपने नाम किया।

दूषित पानी से पैदा होती है बिजली

यह बैट्री सीवर के पानी में मौजूद बैक्टीरिया से बिजली उत्पन्न करती है। बस इस बैटरी में दूषित पानी में पनपने वाले बैक्टीरिया इंजेक्ट करने की आवश्यकता होती है। फिलहाल इस बैटरी से अभी तक कुछ माइक्रो वाट बिजली ही बनाई जा सकी है, हालाँकि इस बैटरी में जितने ज्यादा बैक्टीरिया डालें जायेंगे, उससे उतनी ही ज्यादा मात्रा में बिजली उत्पन्न की जा सकेगी। यह बैट्री किसी भी कार्बन बेस्ड मटेरियल से बनाई जा सकती है। बैट्री की सबसे खास बात यह है कि यह पेपर प्लेटफॉर्म पर आधारित हैऔर डिस्पोजेबल भी है। इसकी एक और विशेषता यह है कि यह पेपर से बनाई गई है, इसीलिए अन्य बैटरियों की तरह यह ज्यादा वजनी भी नहीं है।

सिर्फ 10 सेकंड में बिना प्रदूषण के पैदा की जा सकती है बिजली

बक़ौल राम्या अन्य बैटरी की तरह इससे बिजली उत्पादन में ज्यादा समय नहीं लगता और महज़ 10 सेकंड में इससे बिजली पैदा की जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि यह बैटरी किसी प्रकार का प्रदूषण पैदा नहीं करती और यह 100 प्रतिशत बायोडिग्रेडेबल भी है। भविष्य में इसका इस्तेमाल बायो इलेक्ट्रिक टॉयलेट बनाने में भी किया जा सकता है। इस इनोवेशन में राम्या का सहयोग आईआईटी खड़गपुर के मेकैनिकल फैकल्टी ने भी किया, जिन्होंने राम्या के इस प्रोजेक्ट को जीता जागता रूप देने में विशेष मदद की। फिलहाल राम्या पेपर के जरिए बनाई गई इस बैटरी को और बेहतर बनाने कि दिशा में काम कर रही है ताकि आगे चलकर इसका उपयोग और बेहतर तरह से किया जा सके।

राम्या के इस अनूठे आविष्कार के बारे में जानने के बाद यह अवश्य कहा जा सकता है कि उन्होंने समाज कि भलाई के लिए एक बेहद ही उम्दा कार्य किया है। वास्तव में उन्होंने समाज में व्याप्त समस्या का एक बेहतर हल भी निकाला है और दूषित पानी में भी कुछ कुछ उपयोगी चीज़ चिन्हित करते हुए उसका उपयोग एक बेहतर चीज़ के लिए किया है। हम उनकी इस जीजिविषा को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि हम भी अपने आस-पास रची बसी समस्याओं का हल ढूंढने का प्रयास करेंगे और समाज के काम सकेंगे।

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