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अपनी अरबों की विरासत छोड़ यह लड़की कैंसर पीड़ितों के लिए जो कर रही है, वह क़ाबिले तारीफ़ है

जिंदगी एक रिमोट कंट्रोल की तरह होती है, और आपके पास दो ही विकल्प होते हैं या तो चलाएं या रोकें। एक तीसरा विकल्प भी है जो हमारे कंट्रोल से बाहर होता है – बंद (stop)। जब हमारे किसी करीबी का जीवन समाप्त हो जाता है, जिंदगी हमें तोड़ कर रख देती है। हालांकि कुछ समय बाद हम अपना साहस बटोरकर फिर से खड़े हो जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, भले ही पहले जैसे रफ़्तार से नहीं।   

हम अभी भी दर्द और नुकसान के बारे में बात नहीं करते और कितने मुश्किल से हम इन सब से बाहर आते हैं। और यदि यह एक रोग है, विशेष रूप से कैंसर, तो इसे दुनिया का अंत माना जाता है।   

समारा महिंद्रा, महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा की चचेरी बहन, ने अपनी अरबों की विरासत को छोड़ दिया, जीवन में आये एक बदलाव की वजह से। आज समारा अपने गैर लाभकारी सामाजिक कल्याण संगठन कैंसर रिकवरी एंड रिहैबिलिटेशन (CARER) के द्वारा कैंसर पीड़ितों की मदद कर रही हैं।

जब समारा तीन वर्ष की थी, उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उसके बाद जीवन में माँ के अलावा उन्होंने किसी को भी स्वीकार नहीं किया। उनकी आदर्श, उनकी माँ ने उन्हें आत्मनिर्भर और काबिल बनाया। और तब उन्होंने एक सफल बिज़नेस खड़ा किया, परन्तु एक दिन अचानक आये एक तूफान ने सब कुछ पलट कर रख दिया, जब पता चला कि उनकी माँ को कैंसर हो गया है।    

कुछ सालों के ट्रीटमेंट से गुजरने के बाद, उनकी माँ ने इस बीमारी के आगे घुटने टेक दिए। इस घटना ने समारा को हिलाकर रख दिया। तब इन्होंने महसूस किया कि भारत में अभी भी कैंसर केयर में बहुत सी की कमियां हैं। एक अरबपति परिवार से आने के बाद भी उनकी दिलचस्पी स्वास्थ्य और कल्याण की ओर थी। उन्होंने तय किया था कि वे भारत में अपना खुद का स्पोर्ट्सवेयर का ब्रांड खोलेंगी परन्तु उन्हें कुछ कमी सी लग रही थी। समारा एक सफल लेबल बनाना नहीं चाहती थी, परन्तु स्वास्थ्य और फिटनेस के क्षेत्र में काम करना चाहती थी। समारा ने न्यूयॉर्क जाकर अमेरिकन अकादमी से पर्सनल ट्रेनिंग ली। उन्होंने कैंसर में एक विशेष रूचि विकसित की जिसमें विशेष आबादी के लिए मूवमेंट थेरेपी एक हिस्सा थी। वे एक कैंसर एक्सरसाइज विशेषज्ञ और ब्रेस्ट कैंसर रिकवरी ट्रेनर बनी और एक गैर लाभकारी संगठन  के द्वारा डांस थेरेपी सेशंस लेकर कैंसर पीड़ितों का पुनर्वास करती। समारा को लगा यह बेहतर है।

समारा को स्वीकार करने में मुश्किल हो रही थी कि उनकी माँ का निधन इसलिए हो गया क्योंकि भारत में इस बीमारी के लिए जागरूकता कम थी। न्यूयॉर्क में समारा ने देखा था कि कैंसर पीड़ित को केवल चिकित्सा के द्वारा ही नहीं बल्कि समग्र रूप से उनका इलाज किया जाता था। यह सच था कि उनकी माँ पर समग्र रूप से ध्यान नहीं दिया गया था। एक दिन उन्होंने तय किया कि वे भारत में भी यह एप्रोच ला कर रहेंगी।

भारत में इस तरह का ट्रीटमेंट लाना कोई आसान काम नहीं था परन्तु समारा किसी भी कीमत पर यह बदलाव चाहती थी। सबसे पहले उन्होंने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से शुरूआत की और बाद में कैंसर पीड़ितों के लिए सस्ते दामों में CARER प्रोग्राम की शुरूआत की। CARER का लक्ष्य है होलिस्टिक थेरेपी, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना और बीमारी के पुनरावर्तन से बचाव करना। इसके साथ ही साथ खान-पान और पोषण का  ध्यान, योग थेरेपी, मरीज और उनके परिवार वालों की मदद करना शामिल है। यह इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करता है और समझाता है कि इसे रोका जा सकता है और यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है।

“जब मैं देखती हूँ कि लोग बेहतर हो रहे हैं, इससे मुझे आशा मिलती है और इससे कुछ हद तक मुझे अच्छा महसूस होता है।”

आज CARER अच्छी गुणवत्ता का स्वास्थ्य देखभाल देकर बहुत से कैंसर पीड़ितों की जान बचा रहा है। वे इस रोग की जड़ को दूर करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बहुत से हॉस्पिटल्स और ऑन्कोलॉजिस्ट से टाई-अप किया हुआ है। वे सोशल मीडिया से अनुरोध किये हुए मरीजों से सीधे संपर्क में रहते हैं।

समारा ने बहुत सी जिंदगियों को बचाया है और उनमें आशा की एक लहर जगाई है। उन्होंने लोगों में यह विश्वास जगाया है कि कोई भी बीमारी लाइलाज़ नहीं है और सिर्फ एक सही दृष्टिकोण की जरूरत है। उन्होंने लोगों को एक नई जिंदगी देने के लिए अपनी अरबों की विरासत छोड़ दी।

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