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लागत से 20 गुना ज्यादा की कमाई करनी है तो गुजरात के इस किसान से सीखिए खेती करने के गुर

अगर आपसे कोई सवाल करे कि किस काम में नाम और पैसा मिलेगा तो आपका जवाब क्या होगा। शायद आप कहें डॉक्टरी, इंजीनियरिंग या कारोबार। लेकिन शायद ही कुछ लोग होंगे जो खेती का नाम लेंगे। आजकल किसान खेती छोड़ते जा रहे हैं और अपने बच्चे को खेती करने की सलाह नहीं दे रहे हैं। उन्हें लगता है कि इसमें न तो पैसे हैं और न ही कोई भविष्य। लेकिन बदलते समय के साथ नई पीढ़ी के कुछ लोगों ने आगे आकर खेती-किसानी को गले लगाते हुए सफलता की शानदार कहानी लिखी है। उन्होंने उन लोगों के सामने मिसाल कायम की है जो खेती-किसानी को कम आंकते हैं।

आप यकीन नहीं करेंगे सिर्फ कुछ आधुनिक तकनीक को अपना कर कई ऐसे किसान हैं करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही सफल किसान की है जो हैं तो महज़ 7वीं पास लेकिन उनकी सालाना कमाई लगभग 50 लाख है।

गुजरात के सफल किसानों में शुमार खेताजी सोलंकी ने केनफ़ोलिओज़ से ख़ास बातचीत में अपनी खेती-किसानी के सफ़र को साझा किया।

41 वर्षीय खेताजी सोलंकी गुजरात के बनासकाठा जिले और डिसा तहसील में स्थित छोटे से गांव चंदाजी गोलिया के रहने वाले हैं। खेताजी आधुनिक तरीके से खेती करने में विश्वास रखते हैं और यही है उनके सफलता की सबसे बड़ी वजह। उनके तरीके के साथ-साथ उनकी सोच भी आधुनिक है। खेती-किसानी उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिताजी सोनाजी सोलंकी भी खेती करते थे। लेकिन जिन खेतों में सोनाजी पारंपरिक खेती कर घर भी मुश्किल से चला पाते थे, वहीं उनके पुत्र खेताजी सालाना लगभग 50 लाख की कमाई कर रहे हैं।

खेताजी का कहना है कि “मैं अपने पिता का बहुत ही लाडला था इस लिए पढ़ाई पर कभी ध्यान नहीं दिया। मुझे घर द्वारा अपनी मर्जी के अनुरूप काम करने की छूट थीं। यहां तक कि मैंने अपनी पढ़ाई भी महज 7वीं कक्षा तक ही की है। शुरू से मैंने पिताजी को खेती करते देखा है लेकिन शुरुआत में मुझे खेती का कोई शौक नहीं था। मैंने एक दो बिज़नेसों में भी हाथ आज़माया पर मजा नहीं आया। फिर मैंने कुछ आधुनिक तरीके अपना कर खेती करने का फैसला लिया। इसके लिए मैंने इंटरनेट और मोबाइल एप का सहारा लिया। इसके माध्यम से मुझे आधुनिक खेती की बारीकियां और मौसम के अनुसार खेती के हर तकनीक को सीखने का मौका मिला। आज के दौर में किसानों के लिए सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हैं बस जरूरत है तो थोड़ी टेक्नोलॉजी के समझ की। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितना पढ़े लिखे हैं।”

3 सीजनों में लगाते हैं अलग-अलग फसल

खेताजी अपने 5 एकड़ के खेतों में खेती करते हैं एवं अन्य 5 से 7 एकड़ में अन्य किसानों द्वारा भी खेती करवाते हैं। 3 सीजनों में वे अलग-अलग फसल लगाते हैं। वे एक सीजन में आलू, एक में लाल और काले टमाटर और एक सीजन में खरबूजे की फसल उगाते हैं। मतलब एक ही साल में उनके खेतों से तीन अलग फसलें निकलती हैं। एक सीजन में उनके खेतों में लगभग 120 टन आलू, 180 टन टमाटर और 140 टन खरबूजा उपजता है।

गुजरात में अक्सर किसान आलू उगाया करते थे और इस मिट्टी में खरबूजा भी हो सकता है यह किसी को मालूम नहीं था।

उन्होंने अपने सात बीघा के खेत में इस बार खरबूजे की फसल लगाने का फैसला किया, इसके लिए उन्होंने आधुनिक तथा वैज्ञानिक तकनीकों की खूब सारी मदद भी ली। खेताजी सोलंकी ने बढ़िया किस्म के बीज, टपक सिंचाई और साथ में सोलर वॉटर पंप का प्रयोग किया। फसल लगाई और लगभग तीन महीने बाद उनकी फसल तैयार भी हो गई। मार्केट के रेट से इनके पूरे खरबूजे के 21 लाख रुपये मिले, जो की लागत से 20 गुना ज्यादा है।

खेताजी के खेत में बंपर 140 टन खरबूजे की पैदावार हुई, जिसमें उन्हें कुल 1 लाख 20 हजार रुपये की लागत आयी थी।

खरबूजों की खेती से उन्हें इतना लाभ हुआ है कि आस-पास के किसान भी खेताजी से इसकी जानकारी हासिल करने आने शुरू कर दिए।

अक्षय उर्जा का किया सही इस्तेमाल

खेताजी ने अपने खेतों में सोलर पंप लगवाएं ताकि बिजली के अभाव में सिंचाई की समस्या से नहीं जूझना पड़े। यूं तो सोलर पंप लगाने में 8 से 10 लाख रुपए तक की लागत लग गई। लेकिन ज्यादातर पैसे उन्हें सरकार द्वारा सब्सिडी से ही प्राप्त हो गए। उन्हें करीब 40 हज़ार ही अपनी जेब से लगाने पड़े।

खेताजी का कहना है कि “सरकार किसानों को बहुत सारी सुविधाएं मुहैया करवा रही है और जैविक खेती के लिए सब्सिडी भी दे रही है। यहां तक कि अगर किसान कुछ इक्यूपमेंट भी खरीदना चाहे तो सरकार उसके लिए सब्सिडी देती है। किसानों को चाहिए कि वह अभी आधुनिक तरीके अपनाए ताकि सरकार भी उनकी मदद कर सके।

खेताजी को गुजरात की सरकार भी उत्कृष्ट खेती के लिए पुरस्कृत कर चुकी है। जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी भी मन की बात में उनकी चर्चा करने वाले हैं, पीएमओ द्वारा उनको इसकी सूचना भी मिल गई है। सरकार अब उन्हें इज़राइल जैसे देश खेती के गुण सीखने को भेजने की तैयारी में है, ताकि खेताजी वहां से खेती के अन्य आधुनिक तकनीक को सीख कर यहां के किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखा सकें।

खेताजी ने अपनी सूझ-बूझ से खेती-किसानी के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जो अन्य किसानों के सामने एक बड़ी सीख के रूप में है।

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