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बाल काटते-काटते बने दिग्गज कारोबारी, देश के सैकड़ों शहरों में चलती है इनकी हजारों सैलून

फ्रेंच साहित्य में स्नातक करने वाले इस व्यक्ति ने कभी नहीं सोचा था कि वह बाल काटने के धंधे को अपना कैरियर बनायेंगें। हालांकि यह उनका पुस्तैनी पेशा था लेकिन उनके माता-पिता भी नहीं चाहते थे कि बेटा इसी पेशे के साथ आगे पढ़े। बचपन से ही बेहद अच्छे परिवेश में पले-पढ़े इस व्यक्ति ने अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से प्राप्त की। युवावस्था में उन्होंने अपने पुस्तैनी पेशे पर गहन रिसर्च किया और फिर स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद इसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने का फैसला किया।

आज वह व्यक्ति हेयर स्टाइलिंग की दुनिया के सबसे नामचीन सितारों की सूची में शुमार कर रहे हैं। जी हाँ, हमारी आज की कहानी मशहूर हेयर ड्रेसर जावेद हबीब के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिन्होंने साबित कर दिया कि बाल काटने का धंधा छोटा नहीं होता, इसे योजनाबद्ध तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

गौरतलब है कि जावेद के दादाजी नाजिर अहमद लॉर्ड माउंटबेटन और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु के आधिकारिक नाई हुआ करते थे। उसके बाद जावेद के पिता ने भी पुस्तैनी पेशे को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति भवन में हेयर स्टाइलिस्ट के रूप में कार्य किया। बचपन से ही जावेद पिता के पेशे को बेहद बारीकी से देखते हुए बड़े हुए। हालांकि कॉलेज स्तर की पढ़ाई करने तक उनकी इस क्षेत्र में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद उनके उपर भी उद्यमिता का भूत सवार हो गया।

नए शिरे से इस क्षेत्र में अनूठी शुरुआत करने का सपना लिए उन्होंने लंदन का रुख किया। लंदन के मौरिस स्कूल ऑफ हेयर ड्रेसिंग और लंदन स्कूल ऑफ फैशन से आर्ट एंड साइंस ऑफ हेयर स्टाइलिंग एंड ग्रूमिंग में दो साल का डिप्लोमा कोर्स करने के बाद जावेद वापस भारत लौटे। उन्हें इस बात का अहसास हो चुका था कि लोगों को हमेशा बाल कटाने की आवश्यकता होगी और इस क्षेत्र में एक बड़ी कारोबारी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इस क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी यह थी कि यह पूरी तरह असंगठित था।

इसी कमी को अपना कारोबारी आधार बनाते हुए जावेद ने महज पांच साल में ही देश के कई शहरों में 50 सैलून स्थापित किये। अधिकांश जगहों पर उन्होंने स्वयं स्टाफ को प्रशिक्षण दिया और फ्रैंचाइजी मॉडल की सहायता से कारोबार का विस्तार करते चले गये। जावेद लोगों को अपने सैलून की ओर आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के सेमीनार और जागरूकता शिविरों की सहायता ली। शुरुआत में उनके क्लाइंट ज्यादातर गृहिणियां और वैसे परिवार थे जो नए सैलून में अलग अनुभव के लिए आए थे।

आपको विश्वास नहीं होगा आज ‘द जावेद हबीब सैलून’ ब्रांड के बैनर तले देश भर के 92 शहरों में हजारों सैलून हैं और आने वाले समय में जावेद देश के गाँव-गाँव तक अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं। इतना ही नहीं केश सज्जा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के उद्येश्य से उन्होंने 30 से ज्यादा ट्राइकोलॉजी इंस्टिट्यूट की भी स्थापना की। भारत के अलावा मलेशिया और नेपाल में भी उनके इंस्टीट्यूट्स हैं।

मैंने मैकडॉनल्ड्स से बहुत कुछ सीखा है। उसने मुझे एक व्यापार बनाने का दृष्टिकोण दिया, क्योंकि अगर मैकडॉनल्ड्स दुनियाभर में बर्गर बेच सकता है, फिर बाल कटवाने की आवश्यकता तो अधिक महत्वपूर्ण है।

जावेद का सपना है कि उसके सैलून की श्रृंखला विश्व के हर शहर में हो। इसमें कोई दोराय नहीं है कि जावेद केश-सज्जा की कला को एक नई उंचाई तक ले जाने में काफी हद तक सफल रहे हैं। लेकिन इसके पीछे उनकी लगन और मेहनत छिपी है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि एक दिन में नॉन स्टॉप 410 हेयर कट्स को अंजाम देने वाले जावेद का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इसके अलावा भारत में रंगे हुए बालों को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। अपनी काबिलियत से केश-सज्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले इस मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट को पर्सनल केयर ब्रांड सनसिल्क ने अपना ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था।

जावेद की सफलता से हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है। पहली बात यह कि इस दुनिया में कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता। किसी छोटे काम को भी इनोवेटिव तरीके से करते हुए उसे बड़ा बनाने की ताकत हमारे भीतर ही मौजूद होती है। योजनाबद्ध तरीके से की गई हर एक शुरुआत सफलता के शीर्ष तक पहुँचती ही है।

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