,

उद्यमिता द्वारा राष्ट्र निर्माण करती यह है विश्व की सबसे लम्बी रेल यात्रा

आदमी के सुनहरे सपने के लिए, सभ्यता के महकते चमन के लिए,
इस धरा के लिए, इस गगन के लिए, बस अमन के लिए बस अमन के लिए ||

नवसृजन के लिए एक आवाज़ दोऔर वो आवाज हैजागृतिकी। 15 अगस्त 1947 को जब बरसों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजादी की नयी किरण ने हमारे जीवन में दस्तक दी तो प्रत्येक भारतीय ने निश्चय किया की अब स्वयं को इतना सक्षम बनाना है कि संपूर्ण विश्व हमारे आगे नतमस्तक हो और हमें गुलाम बनाने की कल्पना भी कर सकें। समय बदला आजादी के मायने बदले, आज हम विश्व में शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाते हुए आजादी के 71वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। आज ऐसा कोई क्षेत्र नही जहाँ भारतीयों ने अपना डंका नहीं बजाया है। आज स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर केनफ़ोलिओज़ आपको रूबरू करवाने जा रहा है एक ऐसी यात्रा से जो अपने आप में अलग है, भारत निर्माण जिसका उद्देश्य है। भारत की एकता का प्रतीक है युवाओं के सपनों को हक़ीक़त में बदलने का जज़्बा रखती है। हम बात कर रहे हैं उद्यमिता द्वारा भारत निर्माण के स्वप्न को साकार कर रही विश्व की एकमात्र एवं सबसे बड़ी रेल यात्रा की जिसका नाम हैजागृति यात्रा

जागृति यात्रा नाम से ही अनुभव होने लगता है कि ये कोई आम रेल का सफर नहीं बल्कि एक ऐसा सफर है जो भारत के युवाओं को जागृत और प्रेरित करता है, एक नए सशक्त भारत के निर्माण की मशाल को देश के प्रत्येक क्षेत्र तक ले जाने की। जागृति यात्रा की शुरुआत शशांक मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर शुरु की गयी थी।

मैं अपने आई.आई.टी के करियर को सवांरने के बाद एक दिन आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर बैठकर सोच रहा था की आज़ादी के 50 साल बाद हमारे देश ने कितनी प्रगति की है, यह जानना आवश्यक है और आगे की प्रगति में हमारा क्या योगदान रहेगा, कैसे रहेगा यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इसी सोच के साथ उद्यमिता द्वारा भारत निर्माण की सोच ने जन्म लिया और 1997 में जागृति यात्रा शुरू हुई। यह एक परिवर्तनकारी यात्रा थी जिसने शशांक मणि को ‘India, A Journey through a Healing Civilization’ नामक पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया, जिसका प्रकाशन वर्ष 2007 में हार्पर कॉलिंस द्वारा किया गया इस पुस्तक ने यात्रा को पुनर्जीवित करने के लिए प्रेरित किया जागृति यात्रा बोर्ड के सदस्य राज कृष्णमूर्ति और रेवती प्रभु ने शशांक मणि के साथ मिलकर इस यात्रा को प्रारम्भ किया। इस महत्वकांक्षी यात्रा का उद्देश्य था युवाओं की उद्यमशीलता का लाभ गाँव के किसानों तक पहुँचाकर उन्हें उद्यमशीलता से जोड़ना। गीतांजलि भट्टाचार्य और स्वप्निल दीक्षित ने सबसे पहले जागृति यात्रा का नेतृत्व किया। विश्व की सबसे लंबी 8000 किमी की यह रेल यात्रा अपने 15 दिनों के सफर में देश के 12 शहरों से जागरण का बिगुल बजाते हुए गुजरती है।

जागृति यात्रा के कार्यकारी निदेशक आशुतोष कुमार ने केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में बताया कि ‘‘हम जागृति यात्रा के माध्यम से युवा भारत के अंदर छिपी उद्यमिता की भावना को जगाना चाहते हैं ताकि वे स्वयं रोजगार का सृजन करें ना की रोजगार मांगने वाले बनेंये युवा देश के कर्णधार हैं और देश के सामने मौजूद विकास की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं।

जागृति यात्रा का मुख्यालय मुंबई में है और यह उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित एक गैर लाभकारी संगठन जागृति सेवा संस्थान के द्वारा संचालित किया जाता है। जागृति यात्रा अभियान में शामिल आशुतोष कुमार असाधारण प्रतिभा के धनी और उद्यम सह नेतृत्व विकास के लिए समर्पित हैं। वे 2008 में जागृति में शामिल हुए इसके पूर्व वह एक वर्ष से अधिक तक चेन्नई में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं, वह एक थियेटर कलाकार हैं वे पिछले 4 वर्षों से जागृति यात्रा का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। साल 2008 में जागृति यात्रा की कल्पना को पहली ट्रेन चलाकर साकार किया गया। वर्तमान में 24 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच जागृति यात्रा का आयोजन  किया जाता है। जिसमें देश की प्रगति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के सपने को लेकर 450 युवा शामिल होते हैं जिन्हें यात्री कहा जाता है।

जब हमने पहली बार रेल के माध्यम से इस तरह की यात्रा के बारे में सोचा तो चुनौतियां बहुत थी क्योंकि इस तरह की कल्पना को साकार करना बहुत जिम्मेदारी भरा काम था। कई तरह के प्रश्न थे भारतीय रेलवे से सामंजस्य बैठना, यात्रियों का चयन, महिला सुरक्षा, ट्रेन के पड़ाव, जागरूकता लाने के लिए किस तरह के प्रशिक्षण हो आदि काफी सारे प्रश्न थे — आशुतोष

सबसे पहले रेल के पड़ाव निर्धारित किये गए, जहाँ से आज भी जागृति यात्रा अनवरत अपना सफर तय कर रही है। ये सफ़र मुंबई (महाराष्ट्र) से शुरू होकर दक्षिण में हुबली और बेंगलुरू उसके बाद मदुरै और चेन्नई, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश), बेरहामपुर (ओडिशा), राजगीर (बिहार) और देवरिया (उत्तर प्रदेश) से राजधानी नई दिल्ली तक का सफर तय करती है। उसके बाद तिलोनिया (राजस्थान ) और अहमदाबाद (गुजरात) होते हुए सम्पूर्ण भारत की एकता का अविस्मरणीय स्वरूप यात्रियों की आँखो में लिए पुनः आर्थिक राजधानी मुंबई लौट आती है। यात्रा के दिनों की रूपरेखा भी सृजनात्मक रूप से व्यस्त करने वाली होती है। पूरा दिन चर्चाओं और प्रेजेंटेशन के अलावा कला, संगीत आदि के कार्यक्रमों से भरपूर होता है जो नए जोश का संचार करता है।

जागृति यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर यात्री युवाओं को यात्रा के सहभागी, लाभकारी और गैर लाभकारी क्षेत्र के ऐसे तमाम सफल उद्यमियों और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से रूबरू करवाया जाता है, जो यात्रियों से अपनी सफलता की कहानी साझा करते हैं और उन्हें विकट परिस्थितियों में भी निरंतर मंजिल तक बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जागृति यात्रा की टीम अपने यात्रियों को जिन उद्यमियों से रूबरू करवाती है, वो उद्यमी आमतौर पर विकास के आधारभूत क्षेत्रों कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, उत्पादन, जलस्वच्छता, कला और संस्कृति तथा खेल में विशेष योग्यता रखते हैं। जागृति सेवा संस्थान के लिए उद्यम शब्द का मतलब सिर्फ कारोबार नहीं है बल्कि शिक्षण, सामाजिक, कार्य और कला तक के क्षेत्रों में अवसरों का निर्माण करना है। जागृति यात्रा का अर्थ भारत के 60 करोड़ युवाओं को विकास और नवसृजन के लिए प्रोत्साहित करना है।

जागृति यात्रा का उद्देश्य युवाओं के उस वर्ग से है जो शिक्षित है, उसके सिर पर छत है, उसके पास खाने पीने की भी कोई कमी नहीं है लेकिन उसके सामने कोई मकसद नहीं है। बस जागृति यात्रा उन्हें उनके मकसद से अवगत कराने के क्रम में एक प्रयास हैं।

हर साल जागृति यात्रा का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश से हजारों आवेदन आते हैं। अधिकतर सहभागी 20 से 27 वर्ष की आयु वर्ग से संबंधित होते हैं साथ ही 25 वर्ष से ज्यादा की उम्र के उन लोगों के लिए भी स्थान आरक्षित रखे जाते हैं जो युवा सहयात्रियों को प्रोत्साहित करने के कार्य करते हैं। आवेदकों को 30 लोगों की चयन समिति, जिसमे शिक्षण, कला, उद्यम विशेषज्ञ, युवा नेतृत्व, पूर्व यात्रियों के द्वारा पूछे गए 7 आसान से सवालों का जवाब देना होता है। तीन चयनकर्ता हर आवेदन की समीक्षा करते हैं और फिर छांटे गए आवेदन को मुख्य चयनकर्ता के पास भेजा जाता है जो अंतिम निर्णय करते हुए यात्रियों का चयन करते हैं। साथ ही आवेदकों का टेलीफोन पर भी एक इंटरव्यू लिया जाता हैं जिससे उनके बारे में अधिक जानकारी एकत्रित की जा सके।

उम्मीदवारों का चयन करते समय हम यह समझने का प्रयास करते हैं कि उसके अंदर एक उद्यमी बनने का जुनून किस हद तक है और हमारे देश के सामने मौजूद विकास की चुनौतियों के समाधान के लिए उसके पास कौन से नए नए उपाय हैं।

जागृति सेवा संस्थान इस मामले में उम्मीदवारों के लिए आर्थिक बाधाओं को भी कम करने का प्रयास करता है। आर्थिक आवश्कताओं को ध्यान में रखते हुए भुगतान की अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई है। जागृति यात्रा भारत के छोटे बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु कटिबद्ध है। आशुतोष बताते हैं कि “यात्रा में छोटे शहरोंगाँवों की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है तभी हम एक नए भारत का निर्माण कर सकते हैं जागृति यात्रा संगठन महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है। यात्री महिलाओं को ट्रेन में पूर्ण सुरक्षा मुहैया करवाई जाती है। जिसका परिणाम है कि अभी तक के दस साल के सफर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटी है क्योंकि हमारी टीम हमेशा ट्रेन में मौजूद होती है। इसलिए महिलाएं पूर्ण विश्वास के साथ इस यात्रा में आजादी के साथ शिरकत करे।

जागृति यात्रा का लक्ष्य वर्ष 2022 तक एक लाख उद्यमियों को तैयार करना है जिसके तहत 10 लाख रोजगारों का सृजन किया जा सके। इस लक्ष्य को पूरा करने में पूर्व यात्रियों के उद्यम भी अब मददगार बन कर सामने रहे हैं। जागृति यात्रा हमारे देश की युवा पीढ़ी की एक ऐसी ही सोच का नतीजा है जिसमें तो कोई राजनेता जुड़ा है, कोई तथाकथित सेलीब्रिटी, इसका कोई प्रचार है, कोई दिखावा। मगर इस यात्रा से जुड़े युवाओं ने उन ग्रामीणों, किसानों और गाँव के युवाओं की सुध ली है जो अपनी क्षमता, सामर्थ्य और श्रम के वाजिब मूल्य से वंचित थे।

समान सोच वाले युवाओं का नेटवर्क देश के साथ सारी दुनिया का परिदृश्य बदल कर रख देने की क्षमता वाला है। जागृति यात्रा की सफलता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि 16% यात्रियों ने यात्रा के बाद स्वयं का उद्यम प्रारंभ किया है। साथ ही प्रतिवर्ष लगभग 45 उद्यम का निर्माण यात्रियों द्वारा किया जाता है जागृति यात्रा ने युवा कार्यक्रम की एक वैश्विक मिसाल कायम की है अमरीका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और फ्रांस ने इस तरह के प्रोग्राम में बहुत रूचि ली है, एवं वे अब इसी तरह के प्रोग्राम विकसित कर रहे हैं

अमरीका में अगस्त 2013 में जे. वाई. यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र ने मिलेनियम ट्रेन जर्नी का सफलतापूर्वक संचालन किया था। आज जागृति यात्रा को कई बड़ी कंपनियों के साथ ही संगठनों और सामाजिक संस्थानों का सहयोग मिल रहा है। वाकई में जागृति यात्रा रोजगार के क्षेत्र में जो स्वतंत्रता प्रदान करने की मुहीम चला रही है वो अपने आप में अद्भुत है, गर्व है हमें जागृति यात्रा पर जो लाखों करोड़ो युवाओं को विकसित राष्ट्र की दिशा में अपना योगदान देने हेतु जागरूक कर रही है।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें