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इंजीनियरिंग छोड़ यह 25 वर्षीय लड़की अब करेगी भारत-तिब्बत सीमा पर दुश्मनों से दो-दो हाथ

हमारे देश की महिलाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। लेकिन समाज के कुछ लोगों की संकीर्ण मानसिकता के कारण वे आगे बढ़ने से वंचित रह जाती हैं। लेकिन बदलते वक़्त के साथ महिलाएं समाज के डर को दरकिनार कर घरों से बाहर निकल रही हैं। वे अब खुद के दम पर कुछ हासिल करने की ललक से लबरेज़ नज़र आती हैं। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़कर पुरुषों के कंधे से कंधे मिला रही हैं। वे शिक्षा, पत्रकारिता, कानून, चिकित्सा व इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तो उल्लेखनीय सेवाएं दे ही रही हैं साथ-ही-साथ पुलिस और सेना जैसे साहसिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शायद ही कोई क्षेत्र हो जहाँ महिलाओं नें अपने नाम का लोहा ना मनवाया हो।

आज हम एक ऐसी ही युवा महिला की बात करने जा रहे हैं जो बनने जा रही हैं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की पहली महिला ऑफिसर।

बिहार के समस्तीपुर जिले से ताल्लुक रखने वाली 25 साल की प्रकृति ने इतिहास रच दिया है। प्रकृति अब क़रीब 83,000 जवानों वाली भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की पहली महिला अधिकारी बनने जा रही हैं। अभी वह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित आईटीबीपी के बेस पर तैनात हैं। देहरादून में उनका प्रशिक्षण पूरा हो जाने के बाद उन्‍हें असिस्‍टेंट कमांडेंट के पद पर अगले साल से तैनात किए जाने की संभावना है। उन्‍हें भारत-चीन सीमा के निकट नाथुला दर्रा जैसे स्‍थानों पर अग्रिम मोर्चे पर तैनाती दी जाएगी।

प्रकृति नें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। यूपीएससी की परीक्षा में अपने पहले प्रयास में ही उन्हें सफलता हासिल हुई। उसी दौरान 2016 में सरकार की ओर से आईटीबीपी में महिलाओं की तैनाती को मंजूरी देने का ऐलान किया था। प्रकृति नें इसके बाद आईटीबीपी में करियर बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के जरिए यह मुकाम हासिल किया। अपने लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से उन्होंने जी-जान लगा कर पढ़ाई की। उनकी मेहनत का परिणाम यह निकला कि उन्होंने यह परीक्षा भी अपने पहले ही प्रयास में पास कर ली।

फ़िलहाल उनका प्रशिक्षण चल रहा है और वे कॉम्बैट अफ़सर के पद पर तैनात होने को तैयार हैं। वैसे आईटीबीपी में इस वक़्त क़रीब 1,600 महिलाएं हैं जो की कुल फोर्स का लगभग 2 प्रतिशत है। पर इनमें से अधिकतर सिपाही ही हैं। प्रकृति एक अधिकारी के रूप में आईटीबीपी नें प्रथम महिला होंगी। प्रकृति के पिता वायुसेना में हैं और उनके पिता ही उनके लिये सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। शुरू से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करना उनका लक्ष्य था जो कि पूरा हो गया है।

अक्सर जहाँ ऐसी नौकरियों में घर वाले लड़कों भी जाने देने से मना करते हैं, वहीं प्रकृति के माता-पिता ने उनका पूरा सहयोग किया। प्रकृति को अपने करियर के लिए स्वयं फैसले लेने की पूरी छूट दी गयी थी। वह अपने माता-पिता की आशाओं पर बिल्कुल खरी उतरी। एयर फ़ोर्स में कार्यरत उनके पिता भी इस बात से गौरवान्वित हैं कि उनकी बेटी भी देश की रक्षा में अपना योगदान देने वाली है।

प्रकृति नें सिर्फ अपने माता-पिता को ही नहीं पूरे देश को उनपर फख्र करने का मौका दिया है। प्रकृति उन हर युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी मेहनत और जज़्बे के दम पर सब कुछ हासिल करने की सोच रखती है।

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