,

“इंटरनेट साथी” बना रहा है देश की लाखों ग्रामीण महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर

समय बदल रहा है आज भारतीय महिलाएं सिर्फ रसोई व घर तक ही सीमित नहीं रह गयी है। आधुनिकता के इस दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपने पैर तेज़ी से पसार रही है। वे अपने घर व बाहर दोनों ही से जुड़ी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। उनके इस प्रयास में उनका साथ दे रहा है इंटरनेट जिससे वह देश-विदेश की हर खबर से खुद को जोड़ रही है। ऐसा ही एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं असम की ग्रामीण महिलाएं जिनका पूरा जीवन “इंटरनेट साथी” नामक प्रोग्राम ने बदल दिया है।


असम के नलबाड़ी, कामरूप, बारपेटा और बक्सा जिलों में गूगल व टाटा ट्रस्ट के सहयोग से “इंटरनेट साथी” परियोजना का संचालन ग्राम्य विकास मंच द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना असम के अलावा देश भर के दस राज्यों में भी चलाई जा रही है। इस परियोजना के संचालन के लिये देश भर में करीब 16 हज़ार महिलाये इंटरनेट साथी के रूप में काम कर रही हैं। इस परियोजना से आसामी महिलाओं के जीवन में काफी सकारात्मक बदलाव आ रहे है। करीब 160 इंटरनेट साथी असम के इन चारो क्षेत्र में प्रत्येक सुबह महिलाओं के समूह से मिलकर इंटरनेट संबंधित जानकारियां देती है। वे उन्हें मोबाइल के द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल ,ज्ञानवर्धक वीडिओ यू -ट्यूब पर डाउनलोड करना और देश विदेश से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करना बताती है।

2016 मार्च में शुरू हुए इस प्रोग्राम के वाईस प्रेजिडेंट प्रांजल चक्रवर्ती की मानें तो इस परियोजना का उद्देश्य बारपेटा, बकसा, कामरूप और नलबाड़ी के अंतर्गत आने वाले 557 गावों की लगभग 1,20,000 महिलाओं को आधुनिक रूप से सशक्त बनाना है। हम लोग 90 प्रतिशत महिलाओं को उनके घर जा कर इंटरनेट के द्वारा प्रशिक्षित करने का सफल प्रयास कर रहे हैं।

इस बेहतरीन परियोजना में इंटरनेट साथियों को एक टेबलेट 3G कनेक्शन के साथ मिलता है। इसके अलावा स्मार्टफ़ोन व उसको चार्ज करने लिए पॉवर बैंक, धूप और बरसात से सुरक्षित रहने के लिए छाता भी उपलब्ध करवाया जाता है। आने व जाने लिए एक विशेष रूप से डिजाइन की गयी साइकिल दी जाती है, जिसमे एक बॉक्स बना होता है और सारे उपकरण वे उसी में रखती हैं। इस परियोजना का लक्ष्य इंटरनेट के ज़रिये इन महिलाओं को प्रशिक्षित करने के साथ ही उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करना व उनको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी है।

इस परियोजना से जुड़ी 50 वर्षीय सरला कहती है कि वह हमेशा हर जानकारी के लिये अपने पति व बेटों पर निर्भर रहती थी, परन्तु अब वह इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गयी हैं। तीस वर्षीय निजारा तलुकदार काफी गरीबी में पली-बढ़ी हैं और बुनकर का काम करती है जिससे उनकी थोड़ी कमाई होती थी लेकिन अब वो बहुत खुश है क्यूंकि इंटरनेट के ज़रिये उनकी इनकम 30 से 40 प्रतिशत बढ़ गयी है। पहले वह सीमित डिज़ाइन बुनती थी जिससे ग्राहक कम आकर्षित होते थे लेकिन जब से उन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू किया है। वह नए-नए डिज़ाइन देखकर कपड़ा बुनती है जिससे अब उनके पास डिज़ाइन की कई वैराइटी है और इसके कारण उनकी सेल भी बढ़ गयी है और तो और अब ग्राहक उनके काम की तारीफ भी करते हैं।

आज इंटरनेट साथी से न सिर्फ गरीब और अनपढ़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं बल्कि छात्रों को भी लाभ हो रहा है। इसका उदहारण है दसवीं कक्षा की मधुमिता दास जिन्होंने इंटरनेट की मदद से नई तरह की पेंटिंग सीखी है। इंटरनेट साथी की कोशिशों से वर्तमान में 1 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं इंटरनेट के प्रति जागरूक हो गयी हैं, कुछ महिलाएं तो अपने पतियों को खेती से जुड़ी जानकारी प्राप्त करा रही है, जिसमे बीज, खाद और मौसम से जुड़ी जानकारियाँ प्रमुख है।

किसी भी समाज में यदि स्त्री सशक्त है तो समाज खुद ब खुद प्रगति व खुशहाली की राह पर चल देता है यही संदेश देते हैं इंटरनेट साथी से जुड़े गांव।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

आपका कमेंट लिखें