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‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ’ मुहिम में मील का पत्थर साबित होगा इस रिटायर्ड शिक्षक का अनूठा प्रयास

प्रसिद्ध लेखक एवं अमेरिकी अधिवक्ता रोबर्ट जी. इंगरसोल ने कभी कहा था कि मदद करने वाले हाथ, दुआ मांगने वाले होठों से ज्यादा महान होते हैं और जब हम दूसरों की मदद करने के लिए आगे आते हैं तो हम समाज के साथ-साथ अपना स्वयं का उत्थान भी करते हैं और जब बात समाज में बदलाव की अलख जगाने की हो, तो यह काम शिक्षा से बेहतर कौन कर सकता है? जैसा की नेल्सन मंडेला ने भी कहा था कि दुनिया को बदलने के लिए शिक्षा से बेहतर कोई हथियार नहीं होता वास्तव में जो समाज शिक्षा के महत्व को समझ जाता है, वो समाज फिर खुद खुद अच्छे भविष्य के रास्ते पर चल पड़ता है। जरुरत है तो बस एक पहल की, एक पहल जिसके जरिये यह सुनिश्चित हो सके की समाज का हर व्यक्ति केवल शिक्षित हो बल्कि वो समाज के काम भी सके। ऐसी ही एक पहल को अंजाम दे रहे हैं राजस्थान में सीकर जिले में बुडानिया के शारीरिक शिक्षक जयसिंह झाझड़िया जी। आइये उनकी जिंदगी के बारे में पढ़ते हैं।

उठा रहे हैं 13 बालिकाओं की पढ़ाई का खर्च

जयसिंह जी शहीद देवकरण सिंह राजकीय आदर्श माध्यमिक विद्यालय से शारीरिक शिक्षा के शिक्षक के रूप में मार्च 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे। 33 साल के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ऐसी कई सारी मुहिम में भागीदारी दिखाई थी जिनका लक्ष्य समाज को शिक्षित करना था। वो पिछले 13 सालों में 13 बालिकाओं की पढ़ाई का खर्च उठा चुके हैं और वो समाज को शिक्षित करने को अपनी एक नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं। उन्होंने पिछले 13 सालों में हर वर्ष किसी एक बालिका/छात्रा को गोद लेकर उसकी पढ़ाई का जिम्मा संभाला और आज वो पूरे गाँव में प्रेरणा का एक स्रोत बनकर उभर रहे हैं। समाज को शिक्षित करने के अलावा वो पर्यावरण संरक्षण को भी अहम् महत्व देते हैं।

जब बकरियां चराने वाले की बेटी को दिलवाया स्कूल में दाखिला

जयसिंह जी यह मानते हैं की समाज को शिक्षित करने की राह में हमे बालक एवं बालिकाओं को समान रूप से शिक्षित करने पर जोर देना होगा और तभी समाज समुचित रूप से शिक्षित हो सकेगा। इसी क्रम में उन्होंने एक दिन एक बकरियां चराने वाले व्यक्ति की बेटी, सरिता को देखा। सरिता उस वक़्त अपनी बकरियां को खाना खिलाकर अपने पिता का काम में हाथ बनता रही थी। जयसिंह जी उसके पास गये और पूछा की क्या वो विद्यालय पढ़ने जाती है? इस पर उसके पिता ने कहा की उनके पास इतने पैसे नहीं की वो अपनी बेटी को विद्यालय भेज सकें। यह सुनकर जयसिंह ने तुरंत ही उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने का निर्णय ले लिए और उसका दाखिला विद्यालय में दिलवाकर पहले उसे 10वीं पास करवाई और उसके बाद उसे नर्सिंग का कोर्स करवाकर उसकी जिंदगी ही बदल दी। आज वो अपने पैरों पर खड़ी हो सकी है और अपने जीवन में जयसिंह जी को उम्मीद की किरण के रूप में देखती है।

तमाम मौकों पर समाज परिवर्तन की मुहिम का बने हैं अहम् चेहरा

मार्च 2017 में एक शिक्षक के रूप में सेवानिवृत्त होते वक़्त उन्होंने विद्यालय में प्रोत्साहन कोष स्थापित किया और स्वयं उसके लिए 1 लाख रूपये का योगदान दिया, जिससे बाकि ग्रामवासियों और विद्यालय के अन्य स्टाफ को भी इस कोष में अनुदान देने की प्रेरणा मिली। ऐसा तय किया गया है की इस कोष की राशि और उसके सालाना ब्याज से विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों एवं खेल प्रतिभाओं की मदद करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। केवल यह कोष स्थापित करने में उनका अहम् योगदान रहा बल्कि उन्होंने 2013 में पर्यावरण को साफ़ सुथरा एवं प्रदुषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत, आमजन और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से इलाके के दर्जनों गांवढाणियों में पर्यावरण संरक्षण यात्रा निकाली। इसके अलावा उन्होंने लोगों के हाथों फल एवं छायादार वृक्षों पर राखियां बंधवाई और पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित करने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने इस मौके पर लोगों से पौधारोपण भी करवाया।

जीवन को दूसरों की सेवा में लगाना है सबसे जरुरी

वो मानते हैं की व्यक्ति को केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि औरों के लिए भी सोचना चाहिए और समाज के उत्थान में हर व्यक्ति को अपना एक अहम् योगदान देना चाहिए। वो पर्यावरण संरक्षण और शिक्षित समाज की ओर जोर देते हैं और मानते हैं की हर कठिन कार्य की शुरुआत एक मजबूत सोच से होती है। जरुरत है तो बस परिवर्तन के उस बीज को दिमाग में गहराई से बोने की।

वास्तव में जयसिंह जी के जीवन से हमें अपार प्रेरणा मिलती है कि प्रकृति ने यह जीवन हमें समाज की भलाई में अपना योगदान देने के लिए दिया है और हम सभी इस दुनिया में किसी किसी मकसद से आये हैं। हमे इस समाज को बदलने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए और कोशिश करनी चाहिए की हम समाज के विकास में खुद की भागीदारी भी सुनिश्चित करें। जयसिंह जी को हमारी पूरी टीम की तरह से सलाम और हम उम्मीद करते हैं की उनकी प्रेरणादायक जीवन के विषय में पढ़कर हम सभी लोग अपने अपने स्तर से समाज में परिवर्तन लाने की मुहिम में जुट जायेंगे। हमें यह याद रखना होगा की जरुरी यह नहीं की हम क्या नहीं कर सकते बल्कि जरुरी यह है कि हमारे पास जो कुछ भी स्रोत उपलब्ध हैं उसके हिसाब से हम समाज के लिए क्या कर सकते हैं? और फिर परिवर्तन होकर रहता है।

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