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शुरुआत में निराशा हाथ लगी लेकिन कभी हार नहीं माने और बन गए भारतीय बैडमिंटन जगत के सुपरस्टार

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार भारत की झोली में सोना-चांदी बरस रहा है, ऐसे में जरूरी है उन हीरों के बारे में जानना, जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं। इससे पहले जैसे ही उस बैडमिंटन खिलाड़ी ने फ्रेंच ओपन अपने नाम किया, हर जगह सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा था और वो था, किदांबी श्रीकांत का। आज किदांबी श्रीकांत की पहचान भारतीय बैडमिंटन जगत के नए सुपरस्टार के रूप में हो रही है। वे लगातार नये प्रतिमान गढ़ रहे हैं।

एक साल में चार सुपर टाइटल जीते

24 साल के श्रीकांत ने फ़्रेंच ओपन सुपर सिरीज़ के मेन्स फ़ाइनल में जापान के केंता निशीमोतो को हराकर पहली बार यह खिताब अपने नाम किया। श्रीकांत ने निसीमोतो को 21-14, 21-13 से हराया। श्रीकांत बैडमिंटन जगत में एक नई ताकत बनकर उभर रहे हैं, खास बात ये है कि वे भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिसने एक साल में चार सुपर सिरीज़ टाइटल जीता।

कॉमनवेल्थ गेम्स की इस जीत से पहले वह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और डेनमार्क ओपन भी अपने नाम कर चुके हैं। एक साल में चार सुपर सीरीज जीतने वाले श्रीकांत को स्पोर्ट्समैन ऑफ इ ईयर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

शुरुआत में निराशा हाथ लगी लेकिन हार नहीं माने

उपलब्धियों के बाद सभी ये जानना चाहेंगे कि एक साल में चार ईनाम अपने नाम करने वाले श्रीकांत ने आखिर इस खेल की बारीकियां कहां से सीखीं। श्रीकांत ने हैदराबाद में मशहूर पुलेला गोपीचंद अकादमी से बैडमिंटन खेल की बारीकियां सीखीं। ये वही अकादमी है जिसके संयोजक पर बायोपिक भी बन रही है, जिसमें श्रद्धा शर्मा मुख्य भूमिका में हैं। श्रीकांत बताते हैं कि मैंने एक साल में चार-चार उपलब्धियां अपने नाम कीं, लेकिन साल की शुरुआत को देखें तो मेरी रफ्तार काफी धीमी थी।

श्रीकांत ने कहा – मैंने खेले तो कई टूर्नामेंट लेकिन उन खेलों में मुझे शुरुआत में निराशा हाथ लगी। फिर, 18 जून को इंडोनेशिया ओपन में सम्मानजनक जीत हासिल हुई। इसी के बाद मुझ में हर टूर्नामेंट जीतने का ज़ज़्बा आ गया और खुद पर यकीन भी।

विश्व रैंकिंग में लगाई लंबी छलांग

राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के कोच गोपीचंद के शिष्य श्रीकांत की जीत का सिलसिला जारी रहा और उन्होंने आस्ट्रेलियन ओपन में भी जीत हासिल की। इन दोनों खिताबों को जीतने से पहले वह सिंगापुर ओपन के फाइनल तक का सफर तय कर गए थे। कई दिग्गजों को मात देते हुए एक टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचने और दो टूर्नामेंटों में ख़िताबी जीत हासिल करने वाले श्रीकांत विश्व रैंकिंग में 22वें स्थान से बड़ी छलांग लगाते हुए शीर्ष 10 खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए।

अब रैंकिग आने के बाद उनका पहला भारतीय होने का ऑपचारिक एलान हो जाएगा। 25 साल के श्रीकांत रैंकिंग सिस्टम शुरु होने के बाद नंबर-1 मुक़ाम हासिल करने वाले पहले भारतीय होंगे। 1980 में तीन टॉप टूर्नामेंट जीतने के बाद प्रकाश पादुकोण को नंबर-1 माना जाता था, लेकिन तब कंप्यूटराइज्ड रैंकिंग सिस्टम नहीं था।

बैडमिन्टन में नई पहचान

कॉमनवेल्थ गेम के बैडमिन्टन में श्रीकांत के रूप में देश को एक नई पहचान मिल गई है। कितनी नाकामियों से होकर श्रीकांत को अपने अनथक परिश्रम और लगन के बल पर यह सफलता का सुनहरा मुकाम हासिल हुआ है। रोमांचक खेल में सम्भावनायें तलाश रहे युवाओं के लिये श्रीकांत की कामयाबी की कहानी निस्संदेह उत्प्रेरक का काम ही करेगी।

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