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दिल्ली की छवि का कमाल, जॉब करते हुए CAT की परीक्षा में हासिल की 100 पर्सेंटाइल

कुछ समय पहले आई फ़िल्म दंगल का एक डायलॉग काफी प्रसिद्ध हुआ जिसमे आमिर खान कहते हैं कि “म्हारी छोरियां छोरों से कम है के” सच कहे तो यह सिर्फ एक फ़िल्म का डायलॉग ही नहीं बल्कि हक़ीक़त हैं क्योंकि जिस तरह से हमारे देश की बेटियां सफलताओं के शिखर को छू रही हैं वह वाकई हमारे लिए सम्मान का विषय है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट स्कूल आईआईएम समेत शीर्ष बिज़नेस स्कूलों में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) 2017 में क्योंकि इस कठिन मानी जाने वाली परीक्षा में पहली बार टॉप-20 में दो बेटियों ने अपना कब्ज़ा जमाया है।

आईआईटी दिल्ली से पास आउट छवि गुप्ता ने इसी साल पहली बार कैट की परीक्षा दी और अपनी मेहनत के दम पर 100 पर्सेंटाइल के साथ टॉप-20 में अपनी जगह सुनिश्चित की।

छवि बताती हैं कि “मैंने आईआईटी दिल्ली से साल 2016 में बीटेक और एमटेक ड्यूल डिग्री हासिल की। उसके बाद से ही मैं निजी कंपनी में कार्य कर रही हूँ। हालांकि अच्छी नौकरी के लिए एमबीए डिग्री बेहद जरूरी है। इसीलिए मैंने पहली बार कैट की परीक्षा दी और सौ पर्सेंटाइल हासिल किया मैं बहुत खुश हूँ कि अब मेरा आईआईएम अहमदाबाद में एमबीए के लिए दाखिला लेने का सपना पूरा हो जाएगा।”

खास बात यह है कि आईआईटी की तर्ज पर ही बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार आईआईएम में भी सुपर न्यूमेरी कोटा लाने की योजना पर विचार कर रही हैं। आईआईटी व एनआईटी में 20 फीसदी सुपर न्यूमेरी गर्ल्स कोटा इसी सत्र से लागू किया गया है। यह कुल सीटों पर अतिरिक्त सीट होती हैं, जिन पर बेटियों को दाखिला मिलेगा।

छवि आगे बताती है कि “अब तो आईआईएम बिल पास हो चुका है। तो खुशी का पैमाना दोगुना बढ़ गया है क्योंकि अब मुझे एमबीए की डिग्री मिलेगी। पहले भारत में आईआईएम डिप्लोमा को डिग्री की तरह ही समझा जाता था। लेकिन विदेश में जाने पर इस विषय में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था लेकिन अब ऐसा नही होगा और हम भी गर्व से कहेंगे कि हमने आईआईएम से एमबीए डिग्री हासिल की हैं।”

हमारी बेटियां जिस रफ़्तार से आगे बढ़ रही है वह वाकई गर्व का विषय हैं लेकिन कुछ लोग का नज़रिया अब भी आलोचनात्मक ही है जो यह कहते है कि “टॉप-20 में दो लड़कियों के शामिल होने बड़ी बात नही हैं कैट का प्रश्न पत्र आसान रहा होगा।” तो उन्हें हम बता देते है कि पिछले साल की तुलना में इस बार प्रश्न पत्र बेहद कठिन था और टॉप 20 में जगह बना पाना मेहनत और लगन के बिना सम्भव नहीं है।

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