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पति की असामयिक मृत्यु के बाद पत्नी ने जो किया उसकी हर तरफ हो रही है प्रशंसा

आज के स्वार्थपरख युग में परोपकारिता का यदि कोई उदाहरण मिल जाए तो अपने आप में अद्भुत और अकल्पनीय होगा। आज हम आपके सामने एक ऐसा ही उदाहरण लेकर आए हैं जो खुद तो दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन कई लोगों की जिंदगी में नए रंग भर गए। उनका नाम है राजीव पुट्टम जिन्हें आज के युग का दधीचि कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हैदराबाद के रहने वाले 45 वर्षीय स्वर्गीय राजीव पुट्टम एक ऐसा इतिहास रच गए हैं जो कोई भुलाये नहीं भूल सकता। राजीव खुद तो इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन अपने अंगदान से कई लोगों को जीवनदान दे गये। राजीव टैक्सस में एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के तौर पर कार्यरत थे। लेकिन एक दिन भाग्य चक्र कुछ ऐसा घूमा की मस्तिष्क में अत्यधिक आंतरिक रक्तस्त्राव के कारण उनकी असामयिक मृत्यु हो गई राजीव की पत्नी भाग्य, 11 वर्षीय पुत्र और 15 वर्षीय बेटी के लिए उनका चले जाना किसी त्रासदी से कम नहीं था, उन पर तो मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। लेकिन उनकी पत्नी भाग्य ने अपने आप को संभाला और राजीव की बातों को याद करते हुए निर्णय लिया राजीव के सभी अंग दान करने का, जिससे राजीव हमेशा किसी और की सांसे बनकर जिंदा रहें।

टैक्सस में उपासना कला केंद्र नामक संगठन का प्रबंधन करने वाली अनिशा राजेश ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिये बताया कि “उनके यहाँ नृत्य सीख रही छात्रा कीर्तना पुट्टम के पिता राजीव पुट्टम का निधन हो गया। कीर्तना का परिवार उपासना कला केन्द्र से शुरूआती वर्षों से ही जुड़ा रहा है। राजीव और भाग्य के उपासना कला केन्द्र के बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं। राजीव और भाग्य ने हमेशा हमारे सभी कार्यों में मदद का हाथ बढ़ाया है। राजीव और भाग्य 6 साल से हमारे परिवार का हिस्सा थे।

साथ ही अनिशा पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताती हैं कि “रोज की तरह 9 सितंबर की सुबह राजीव ने 7 बजे अपनी बेटी कीर्तना को डान्स क्लास के लिया छोड़ा और घर वापस चले गए। लेकिन 7.40 पर अचानक उन्हें कुछ असहज महसूस हुआ और वे जमीं पर गिर पड़े। राजीव को तुरंत ही मेमोरियल हरमन अस्पताल हवाई जहाज़ द्वारा पहुँचाया गया। जहाँ पता चला की स्थिति बहुत ही गंभीर थी और उनके मस्तिष्क में भारी रक्तस्त्राव हो रहा था जिसके चलते अवरोध उत्पन्न होने लगा था। कई कोशिशों के बाद भी डॉक्टर राजीव को बचाने में नाकामयाब रहें। काल को भला कौन टाल सका है।

राजीव तो दुनिया में नही रहे परन्तु अपने पति को जीवित रखने की उम्मीद में उनकी पत्नी भाग्य ने उनके अंग दान का निर्णय लिया। राजीव के अंग दान द्वारा उनकी एक किडनी एक 53 वर्षीय महिला को ह्यूस्टन में ही दान की गयी जो पिछले बारह दिनों से जीवन रक्षकप्रणाली के सहारे जीवन संघर्ष से जूझ रही थी। राजीव की दूसरी किडनी को ह्यूस्टन में ही एक 64 वर्षीय पुरुष को दान किया गया जिससे उसका जीवन भी बचाया जा सका। यही नहीं राजीव का दिल सफल प्रत्यारोपण के बाद एक 41 वर्षीय व्यक्ति में धड़क रहा है। तो दूसरी और एक 21 वर्षीय व्यक्ति जिसे राजीव के फेफडें दान किये गए, अब वह अपने जीवन में और अधिक साँस ले सकता है।

राजीव उनके परिवार का एकमात्र सहारा थे। दुःख की इस घड़ी में राजीव के परिवार को सहायता की आवश्यकता है जिसके लिए $2 लाख डॉलर के लक्ष्य के साथ स्थापित एक निधिस्थापनाकर्ता अब तक को 62,000 डॉलर से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी हैं। अमेरिका के लोग आगे आये हैं और इस भारतीय परिवार के लिए जो कुछ भी सहायता कर सकते है कर रहे हैं।

राजीव परोपकार का जो पाठ हमें पढ़ा गए हैं उसके लिए तो सदियाँ उनकी कर्जदार रहेंगी। सच ही कहा गया है कि परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

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