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नौकरी छोड़ यह इंजीनियर सीखा रहा खेती के नए तरकीब, सुदूर गांवों में किसान हो रहे मालामाल

हमारे देश की यह कैसी विडम्बना है कि एक ओर टमाटर का उचित मुल्य न मिल पाने के कारण किसान टमाटर सड़कों पर फेंक रहे हैं या खेतों में ही जला दे रहे। इतनी मेहनत और अच्छी फसल के बावजूद किसान कर्ज में डूबे हैं उन्हें लागत मुल्य भी नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ टोमैटो साॅस बनाने के लिए 60 फीसदी टमाटर दूसरे देशों से आयात करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है कि किसान टमाटर की उन्नत किस्मों का इस्तेमाल नहीं करते हैं और दूसरा उपज के सही रख-रखाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह जल्दी खराब होने लगते हैं। इस वजह से किसान सस्ते दाम पर बचौलियों को बेचने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में टमाटर किसानों की स्थिति में सुधार लाने के लिए आवश्यक है कि उनमें जगरुकता लाई जाए और उन्हें यह सिखलाया जाए कि टमाटर की खेती से कैसे ज्यादा कमाई की जा सकती है।

किसानों को सबल बनाने और ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए पेशे से इंजिनियर वाराणसी निवासी हिमांशु पाण्डे आगे आए और किसानों को इस क्षेत्र में बेहतरीन जानकारी मुहैया कराने और काम सिखाने की जिम्मेदारी ली। जल्द खराब होने के कारण टमाटर को सस्ते दर पर बेचना मजबूरी हो जाती है। ऐसे में हिमांशु ने टोमैटो कैचअप और दूसरे उत्पाद बनाने का फैसला लिया। इसका प्रमुख कारण देश में टोमैटो कैचअप की बढ़ती माँग तो है ही साथ ही टमाटर के कुल उत्पादन का मात्र 1% ही प्रोसेसिंग युनिट तक पहुंच पाना है जबकि पश्चिमी देशों में यह प्रतिशत 25 से 30% तक है।

इंजीनियर हिमांशु पाण्डे हमेशा से ही किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने विदर्भ में किसानों की आत्महत्या के बारे में सुना। 2014 में सिर्फ उस इलाके में 450 किसानों ने आत्महत्या की थी।

इन सब से प्रभावित हिमांशु ने 2016 में नौकरी छोड़ “यूथ फाॅर इंडिया” फैलोशिप के जरिए किसानों से जुड़ने का फैसला किया। फैलोशिप प्रोग्राम के तहत उन्हें 13 महीने गाँव में किसानों के बीच जा कर काम करना था। चयन प्रक्रिया के बाद हिमांशु बीड गये और वहाँ किसानों के आत्महत्या के कारणों की पड़ताल की तो पता चला कि किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। बैंकों का 2,000 करोड़ रुपये बकाया था। हिमांशु ने जब वहाँ के लोगों से बात की तो पता चला फसल उपजाना परेशानी नहीं बल्कि उसे बेच पाना प्रमुख समस्या है। उन्हें फसल की लागत के बराबर भी मुल्य नहीं मिल पाता है। इसका कारण यह भी है कि वहाँ कानून के अनुसार किसान एक साल तक अपने उत्पाद जमा नहीं रख सकते हैं। इस अध्ययन के बाद हिमांशु ने फसल की कटाई के बाद की समस्या पर ध्यान केन्द्रित किया और फिर इस समस्या के निपटान के लिए लिए एक महिने तक रिसर्च किया।

इसके बाद पिछले साल वे मैसूर के एक गाँव सिंहहल्ली में काम करने आए। कावेरी जल विवाद पर सुप्रिम कोर्ट के फैसले से यहाँ के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। जहाँ पहले किसान चावल और गन्ने जैसी ज्यादा पानी की फसल उपजा करते थे, वहीं अब टमाटर की पैदावार करने लगे। जिसके परिणामस्वरुप माँग से ज्यादा सप्लाई हो गई और टमाटर के दाम नीचे गये। किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा था। एक दो रुपये तक में बेचने को किसान मजबूर थे तो कहीं उन्होंने फसल तोड़ा भी नहीं, वहीं खेतों में जला दिया। यह सब हिमांशु ने अपनी आँखों से देखा।

हिमांशु गाँवो में जाकर सर्वे करने के बाद 18 सदस्यों वाली “उमंग महिला ग्रुप” के साथ मिलकर काम करना शुरु किया। इसके बाद संगठन की महिलाओं को मैसूर के डिफेंस फूड रिसर्च लेबोरेटरी में एक हफ्ते के लिए टोमैटो कैचअप बनाने की ट्रेनिंग दिलवाई। फिर समस्या आई टमाटर की क्योकिं जिस प्रजाति की टमाटर यहाँ उपजाई जाती थी वह कैचअप बनाने के प्रयोग में नहीं आती। कैचअप के लिए जामुन टमाटर का प्रयोग किया जाता है जिसमें अधिक मात्रा में गुदा होता है। हिमांशु ने उन महिला किसानों की पहचान की जो पहले जामुन टमाटर की प्रजाती की खेती में थे। इसके बाद उन महिलाओं को ट्रेनिंग के लिए चुना जो इस काम को पसंद करती है। इसके बाद 2 लीटर का कैचअप बैग तैयार करके स्वाद और गुणवत्ता जाँच के लिए लेबोरेटरी भेजा गया जल्द ही रजिस्ट्रेशन आदि का काम पुरा होने के बाद इसे बाजार में उतारा जा सकेगा जिससे इसका सीधा लाभ किसानों को मिल सके। फिलहाल ग्रुप लिडर कमला के घर पर ही 50 लीटर कैचअप हर महीने तैयार किए जा रहे हैं।

24 वर्षीय हिमांशु जैसे पढ़े-लिखे युवा ने जिस कुशलता से किसानों की समस्या का निराकरण किया, वह सचमुच काबिल-ए-तारीफ है। उपज होने के बाद की जटिल समस्याओं का निराकरन और प्रसंस्करण आवश्यक है ताकी पैदावार का समुचित लाभ किसानों को मिल सके। देश के कुछ ऐसे ही पढ़े लिखे नवयुवक किसानों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी को उठा ले तो वह दिन दूर नहीं होगा जब किसान स्वालंबी और खुशहाल जीवन बसर कर सकेंगे।

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