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जन्मजात अपंगता के बावजूद जिस तरह इन्होंने चुनौतियों को हराया, वह जीवन जीने की कला सिखाती है

हम अक्सर जीवन भर उन चीज़ों के लिए क़िस्मत और खुदा से शिकायत करते रहते हैं जो हमारे पास नहीं होतीं और उन कमियों में उलझे, तड़पते रहते हैं; और हम यह भूल जाते हैं कि खुदा की जो नेमतें हमारे पास होती हैं वे कितने ही लोगों के लिए सिर्फ हसरतों में होतीं हैं। जो लोग अपने जीवन में जन्मजात शारीरिक दोषों के साथ होते हैं या बड़ी दुर्घटनाओं से गुजरते हैं उनमे से कितने ही लोग ताउम्र अपाहिज बन कर रह जाते हैं।

ग्यारह वर्षीय कमलजीत सिंह एक ऐसे ही जन्मजात शारीरिक दोष के साथ पैदा हुए जिसकी वजह से उनके बाज़ू लगभग बेकार हो चुके थे, परन्तु उसने कुछ भी नहीं करने से, कुछ अच्छा करना बेहतर समझा। आज उनकी ज़िन्दगी लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है।

कंजेनिटल (जन्मजात) बीमारी की वजह से कमलजीत अपने बाजुओं का इस्तमाल नहीं कर सकते थे। इसके साथ ही उनके एक पैर की पूरी उंगलियां नहीं थी और दूसरे पैर में केवल चार ही उंगलियां थीं; और उन चारों में से भी केवल तीन उंगलियां काम कर रही थीं। इस कंजेनिटल बीमारी को ठीक करने के लिए उन्हें दो बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा था।

उनके पिता एक वेल्डर हैं जो केवल 7000 रुपये प्रति माह कमाते हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। पिछले साल अपनी आर्थिक स्थिति की वजह से कमलजीत का ऑपरेशन नहीं हो पाया था। तब एक नवचेतना बाल-भलाई कमीटी नामक एक NGO ने उसे मार्च में गोद ले लिया और उसके बाद शुरू हुआ कमलजीत का इलाज़।

बहुत सारी कठिनाइयों के साथ पैदा होने के बावजूद कमलजीत ने कभी हार नहीं मानी। उनके पास जो कुछ था उसमें ही उन्होंने कुछ करना चाहा। उसने अपने पैरों की दो उँगलियों का उपयोग कर लिखना शुरू किया। शुरुआत में कई बार वह असफल रहा परन्तु बाद में उसने सफलता हासिल कर ली।

मनुष्यों में अधिकतर जिन अंगों का इस्तेमाल ज्यादा होता है उन अंगों का विकास भी ज्यादा होता है, कमलजीत ने इस तथ्य के इर्द-गिर्द अपने जीवन की रणनीति रखी । बिना हार माने, उसने लगातार तीन साल तक अभ्यास किया। आज उसकी हैंडराइटिंग बड़े-बड़ों को मात देती है।  

वे पंजाब के सहौली के सरकारी प्राइमरी स्कूल के छात्र हैं। पढ़ाई के लिए अपने उत्साह, अपनी लगन और विकलांग होते हुए भी प्रवेश-परीक्षा में बैठ कर उन्होंने पंजाब के लुधियाना के पंडोरी गांव के गोल्डन अर्थ कान्वेंट स्कूल में दाख़िला पा लिया है।

वे जल्द ही अपनी पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देंगे। और उन्हें पूरा विश्वास है कि वे उसमें आसानी से पास हो जायेंगे। कमलजीत अपने दोस्त सनी के काफी शुक्रगुज़ार हैं जिन्होंने इतने सालों तक उनकी पढ़ाई में मदद की है।

“मेरा दोस्त सनी बहुत ही मददगार है। उसका सपोर्ट ही मुझे प्रेरित करता है। उसने मुझे बहुत सारी चीज़ें सिखाई हैं जैसे स्कूल बैग से किताबें निकालना, पेन  पकड़ना और भोजन के अनमोल होने का सबक़ भी।”

ICSE बोर्ड से सम्बद्ध इस स्कूल ने सनी को भी दाखिला दे दिया है ताकि दोनों स्कूल में पूरे समय साथ-साथ रह सकें। स्कूल किताबें, यूनिफार्म और ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा भी दोनों बच्चों को प्रदान कर रही है। कमलजीत का घर स्कूल से 14 किलोमीटर दूर स्थित है परन्तु फिर भी कमलजीत स्कूल जाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और हर दिन कुछ नया सीखते हैं।

उनके स्कूल के साथी भी कमलजीत को शारीरिक मदद तो करते ही हैं साथ में नैतिक मदद भी करते हैं। कमलजीत की सहूलियत के लिए प्रिंसिपल ने उनका क्लासरूम लड़कों के वाशरूम के पास कर दिया है। उनके लिए एक विशेष बेंच और सीट भी बनवाया गया है ताकि पैर  से लिखने में उन्हें सुविधा हो।

प्रिंसिपल बताते हैं, “मैंने कमलजीत सिंह का एक वीडियो बनाकर यू ट्यूब में डाला है। मैं उसके पढ़ाई के लगन को देखकर ख़ासा प्रभावित हूँ। वह बहुत ही प्रतिभावान विद्यार्थी है और उसकी लिखावट भी बहुत ही सुन्दर है। हमने उसे गोद लेने के लिए उनके माता-पिता से भी बातचीत की है।”

कमलजीत का धैर्य और उनकी सहनशीलता उन्हें जीवन में बहुत दूर तक ले कर जाएगी और निश्चित रूप से उनकी दृढ़ता उन्हें भविष्य में एक नए मुक़ाम तक लेकर जाएगी। उनके जीवट ने न केवल विकलांग, बल्कि सामान्य लोगों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया है।

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