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बिचौलियों को सबक सिखाने के लिए 10वीं पास किसान ने किया तकनीक का प्रयोग, अब हो रही दोगुनी कमाई

कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है क्योंकि हमारी जरूरतें ही हमें कुछ नया ईजाद करने की प्रेरणा देती हैं। अक्सर इंसान केवल अपनी आवश्यकताओं के चलते बल्कि अपनी जिज्ञासा की पूर्ती के लिए भी विभिन्न प्रयोगों के जरिये कुछ ऐसा निर्मित कर देता है कि दुनिया उसे सलाम करती है। अगर हमारे आस-पास के समाज पर एक नजर डाली जाये तो हम यह पाते हैं कि हमारे आस-पास तमाम ऐसी समस्याएं हैं जो केवल हल की तलाश में हैं और एक दिन ऐसा आता है कि हम और आप में से ही कोई उठकर उन समस्याओं को अपनी बुद्धिमत्ता एवं कार्यदक्षता के चलते हल कर देता है। जरूरी है तो बस समस्या के लिए संवेदनशील होने की और उसे करने के लिए ज़ज़्बा और हिम्मत पैदा करने की

ऐसी ही कहानी है गुजरात के युवा उद्यमी नीलेश गुस्सर की, जिन्होंने अपने जैसे तमाम किसानों की मेहनत और पैदावार के दाम का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों के पास जाते देखा और फिर उन्होंने एक ऐसी मशीन बना डाली जिसके जरिये उन्होंने बिचौलियों की भूमिका को अपने और अपने ग्राहकों के बीच से एकदम समाप्त कर दिया। आइये विस्तार से जानते हैं नीलेश एवं उनकी इस रोचक मशीन के बारे में।

बचपन से ही थी कुछ अलग करके दिखने की इच्छा

नीलेश बचपन से ही कुछ नया करने के इच्छुक थे और हमेशा समाज में अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते थे। वो एक किसान होने के साथ-साथ एक दुग्ध विक्रेता भी हैं। उन्होंने अपना व्यवसाय करने के दौरान यह पाया कि उनकी तरह तमाम किसानों, दुग्ध विक्रेताओं की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों के हिस्से चला जाता था। उन्होंने अपने आस-पास तमाम लोगों को इस परेशानी से जूझते देखा। उन्हें यह सब देखकर हमेशा लगता था कि इन बिचौलियों को कैसे भी करके अपने और अपने ग्राहकों के बीच से हटाना होगा जिससे कि उन्हें और उनके जैसे तमाम लोगों को उनकी मेहनत एवं पैदावार का उचित दाम मिलता रहे। काफी सोच विचार के बाद इस उद्यमी ने ऐसी तरकीब लगाई कि बिचौलियों को हटाने के लिए उन्होंने एक मशीन ही बना डाली। हैरत की बात यह है कि वे ग्यारहवीं कक्षा भी पास नहीं हैं। उन्होंने अपनी मशीन कोएटीएम मिल्क मशीनका नाम दिया और अब उनकी इस मशीन से उनके जैसे अनेक किसान लाभ उठा रहे हैं।

इंटरनेट से जुटाई जानकारी और बना दी क्रांतिकारी मशीन

गौरतलब है कि नीलेश ने यह मशीन बनाने से लेकर उसे चलाने तक की सारी जानकारी इंटरनेट के जरिये ही जुटाई। हाल ही में उन्होंने इस मशीन को फिंगर प्रिंट से जोड़ कर कैशलेस भी बना दिया है। वैसे तो मिल्क वेन्डिंग मशीन या मिल्क एटीएम यानी आटोमेटेड टेलर मशीन कोई नवीन आविष्कार नहीं है। लेकिन एक 11वीं पास व्यक्ति द्वारा ऐसी मशीन बना देना अपने आप में ही एक बड़ी बात है। हालाँकि यह मशीन कई मायनों में अलग भी है क्योंकि इसे बहुत ही कम लागत में बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण के अपने ही देश में तैयार कर लिया गया है। नीलेश ने अपनी दक्षता से बहुत ही कम लागत में यह संभव करके दिखाया है। नीलेश द्वारा बनाई इस मशीन का लाभ उनके जैसे और भी छोटे किसान उठा रहे हैं खासकर के वो लोग जो दुग्ध बेचने का काम करते हैं। वे सभी नीलेश के इस आविष्कार से खुश हैं क्योंकि बिचौलिये अब उनके रास्ते से हट रहे हैं और उपभोगताओं को सीधे बिक्री से अब लाभ भी उन्हें सीधा मिल रहा है।

मिलने लगा है किसानों को वाजिब मुनाफा, परेशानियों को देखते हुए आया मशीन बनाने का ख्याल

इस मशीन से किसान मन मुताबिक दाम पर दूध बेच रहे हैं। नीलेश द्वारा बनाई गयी इस मशीन से देशभर में उनका नाम हुआ है। वो बताते हैं कि उनका लक्ष्य व्यापार में मौजूद उन बिचौलियों को खत्म करना था, जो किसानों का फायदा उठाते थे। नीलेश भी एक उद्यमी बनने से पहले किसान ही थे, इसीलिए वे इन किसानों की समस्याओं को बखूबी समझते थे। उनके पास 6 गायें थीं, जिनका दूध वे सहकारी मंडी में बेचते थे। नतीजा यह होता था कि उन्हें और दुग्ध विक्रेताओं एवं किसानों की तरह ही वाजिब दाम नहीं मिलता था। जिस दूध की कीमत शहर में 50 रुपये थी, उसको उन्हें सिर्फ 25 रुपए में बिचौलियों को बेचना पड़ता था। इन्हीं दिक्कतों से निपटने के लिए उन्होंने एटीएम मिल्क मशीन बनाने का फैसला किया और यह कारनामा करके भी दिखाया।

ऐसे बनायीं मशीन, अबतक 30 किसानों को बेच चुके हैं यह मशीन

नीलेश कहते हैं, “जिन किसानों के पास तीन से ज्यादा गाय या भैंसे होती हैं उनके लिए यह मशीन काफी फायदेमंद है आपको बता दें कि सबसे पहले तो उन्होंने इंटरनेट पर इस विषय में थोड़ा शोध किया और फिर अलगअलग शहरों से मशीन बनाने के पुर्जे मंगवाए। उन्होंने नोट के सेंसर और फिंगरप्रिंट की मशीन ताइवान से मंगवाई। खास बात यह है कि तकनीकी ज्ञान के बिना ही केवल अपनी इच्छा शक्ति के दम पर इस किसान ने अपने शौक और मेहनत से एक मशीन तैयार कर डाली है, इसके लिए उन्होंने कहीं से ट्रेनिंग नहीं ली ही कोई कोर्स किया। अब यह मशीन शुरुआती दौर के बाद धीरेधीरे और भी हाइटेक बना दी गई है उन्होंने इस मशीन में बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंटिंग, आईडी और पासवर्ड, प्रीपेड कार्ड जैसे फीचर जोड़ दिए, ऐसा करने से यह मशीन डिजिटल तरीके से काम करने लगी है और कैशलेस हो गई है। वे इस मशीन को किसानों को बेचते हैं ताकि वे बिचौलियों से बच सकें। इस मशीन से किसानों को काफी फायदा हो रहा है। नीलेश ने 2017 में 30 एटीम मिल्क मशीन किसानों को बेची थीं। इस मशीन में 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से दूध निकाला जा सकता है। लेकिन अब उन्होंने इसे कैशलेस बना दिया है ताकि फिंगर प्रिटिंग के जरिए भी मशीन से दूध प्राप्त किया जा सके।

ऐसे करती है मिल्क एटीएम काम, हैं इसके कई फायदे

इस मशीन की कीमत 75 हजार से लेकर एक लाख के बीच है। इसमें 250 लीटर तक दूध एकत्रित किया जा सकता है। इसमें फ्रिज के साथ ही पावर बैकअप है ताकि लाइट जाने पर एकत्रित किए हुए दूध को खराब होने से बचाया जा सके। ग्राहक अपना फिंगरप्रिंट इस मशीन में रजिस्टर करवाकर एक निश्चित मात्रा में दूध निकाल सकते हैं। इसके साथ ही यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए भी प्रीपेड कार्ड द्वारा ग्राहक दूध निकाल सकते हैं, हालंकि इसे प्रीपेड कार्ड में उन्हें शुरुआत में कुछ पैसे डालने होंगे। इस मशीन के अनेक फायदे हैं, पहला यह कि इसमें दूध को एकत्रित किया जा सकता है, दूसरा ये कि इससे किसानों को पहले के मुकाबले डेढ़ गुना दाम मिलता है औऱ वे सिर्फ एक साल में ही इस मशीन का दाम रिकवर कर सकते हैं। इस मशीन को कहीं भी आसानी से ले जाया सकता है। नीलेश ने इस तरह की पांच कैशलेस मशीनें बनाई जिन्हें वे तमिलनाडु, उड़ीसा और राजस्थान के किसानों को बेच चुके हैं।

नीलेश की इस कहानी को पढ़कर लगता है कि एक व्यक्ति द्वारा किए अच्छे काम से जाने कितने लोग फायदा पा सकते हैं और इससे केवल स्वयं व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है बल्कि पूरे समाज में अच्छाई की एक अलख जल सकती है। हमारे देश में जहाँ हर रोज किसी किसी किसान की मौत की खबर आती है, वहीं ऐसी मशीन किसानों का एक बेहतर सहारा बन सकेंगी। वास्तव में अगर किसानों, दुग्ध विक्रेताओं को अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल मिलता रहे तो शायद समाज का बहुत भला होगा। हम नीलेश के इस प्रयास की सराहना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ऐसे प्रयास लगातार चलते रहेंगे और हम सबके जीवन को बेहतर बनाते रहेंगे।

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