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8वीं पास यह किसान अपनी तकनीक से सालाना 40 लाख की कमाई करता है, आप भी जानें इस प्रक्रिया को

हमारे देश में खेती का आलम कुछ यूँ है कि मौसम की मार अक्सर हमारे किसानों को झेलनी पड़ती है। कभी पानी की कमी से सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है तो कभी अधिक वर्षा के कारण बाढ़ के हालात हो जाते हैं। कहीं न कहीं इन्हीं अनिश्चितताओं के कारण आज बहुत बड़ी संख्या में हमारे देश के किसान खेती को छोड़ कोई अन्य काम करने को बेबस हो गए हैं। लेकिन आज भी कई ऐसे किसान हैं जो न केवल इस परिस्थितियों को मात दे रहे हैं बल्कि आधुनिक तरीकों को अपनाकर मोटा मुनाफ़ा भी कमा रहे है। आज हम एक ऐसे ही किसान की बात करने जा रहे हैं जो केवल आठवीं तक पढ़े होने के बावजूद आज एग्रीकल्चर साइंटिस्टों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

गजानंद पटेल छत्तीसगढ़ राज्य में महासुंद जिले के गांव छपोराडीह के रहने वाले हैं। 42 वर्षीय गजानंद अपनी खेती के दम पर सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चित हैं। महज आठवीं पास यह किसान हाईटेक खेती की बदौलत मुनाफ़े के मामले में भी देश के सबसे अमीर किसानों की सूची में शामिल है। पटेल के पास महज चार एकड़ की खेती की ज़मीन है। पहले वे भी अपने खेतों में पारंपरिक रूप से धान की फसल लगाते थे जिससे उन्हें ज्यादातर 80 हजार रुपए का ही मुनाफ़ा मिलता था और अगर प्रकृति की मार पड़ गयी तो वह भी नहीं। गजानंद नें कई बार कभी बारिश की कमी तो कभी पानी की अधिकता के कारण फ़सलों को बर्बाद होते देखा। एक बार दलालों के कारण भी उनके लाखों रुपए डूब गए थे।

क्या है पॉलीहाउस तकनीक

पर उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और किसानी को फायदे का सौदा बनाने का प्रण ले लिया। एक बार उन्हें पॉली हाउस की तकनीक द्वारा खेती के तरीके का पता चला। दरअसल इस विधि में खेती वाली जमीन को घर जैसे आकर में पारदर्शी पॉलीमर से ढ़क दिया जाता है जिसके अंदर ही खेती होती है। पॉलीहाउस के अंदर बाहर की हवा और पानी नहीं जा सकती, इस कारण फ़सलों में कीड़े-मकोड़े का प्रभाव न के बराबर होता है। यहाँ तक की इसमें  तापमान को भी जरूरत के मुताबिक नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह मौसम पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाती है। पॉलीहाउस के अंदर ही खाद, सिंचाई आदि की जाती है जिससे जितनी जरुरत हो उतना ही उपयोग किया जाता है क्योंकि पॉलीहाउस के अंदर उसका क्षय नहीं होता। सबकुछ संतुलित रूप से मिलने के कारण यह भी बहुत हद तक तय हो जाता है कि कितने समय में किसान को कितनी फसल मिलेगी।

खीरा और शिमला मिर्च की खेती से की शुरुआत

इस तरह के फायदे को देखते हुए गजानंद नें पॉली हाउस विधि से खेती करना शुरू किया। पटेल पॉलीहाउस खेती करने वाले प्रदेश के पहले किसान हैं। उन्होंने यहां पहले खीरा और शिमला मिर्च की खेती करनी शुरू की। देखते-देखते अच्छा मुनाफ़ा होने लगा। गजानंद पटेल ने बंजर हो रही मैदानी ज़मीन में खीरा और शिमला मिर्च की खेती से भरपूर मुनाफ़ा कर यह साबित कर दिया है कि कम लागत में अधिक मुनाफ़ा प्राप्त किया जा सकता है।

महज मिडिल स्कूल तक की शिक्षा प्राप्त किये इस किसान द्वारा तैयार वर्मी कंपोस्ट आज हार्टीकल्चर डिपार्टमेंट खरीद रहा है। विभाग की सलाह पर गजानंद ने लिलियम नामक फूल की खेती शुरू की और डेढ़ महीने में भोपाल बाजार से 17 लाख रुपए का मुनाफा कमाया। अब वे झरबेरा नामक फूल की की खेती करने की तैयारी में हैं, क्योंकि इसकी डिमांड भी मार्केट में बहुत है।

जिस जमीन पर गजानंद को कभी नुकसान का सामना करना पड़ता था, अब पॉलीहाउस द्वारा फल और सब्जी की खेती से इतनी ही जमीन से उन्हें अब 40 लाख से अधिक की सालाना कमाई हो रही है। गजानंद आज सिर्फ खुद मुनाफ़ा नहीं कमा रहे वे दूसरे किसानों को भी इसकी शिक्षा दे रहे हैं। उनके यहाँ दूर-दूर से किसान पॉलीहाउस विधि द्वारा खेती के तरीके को सिखने आते हैं। गजानंद उन सभी किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जो खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानते हैं।

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