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18 की उम्र में शादी के दबाव से घर से भागने को हुई थी मजबूर, आज पूरी दुनिया में है इनके फैशन का जलवा

पसीने से लथपथ और हांफती हुई एक युवती बिना पैसों और बिना किसी सामान के पागल सी रेलवे स्टेशन की तरफ भागती है। उसके दिमाग में न तो कोई योजना है और न ही जाने को कोई ठिकाना। वह सिर्फ अपने घर-परिवार से दूर चली जाना चाहती थी। आज वैशाली शडांगुले बॉलीवुड सितारों जैसे सोनम कपूर, विद्या बालन, विपाशा बसु और बहुत सारी हिरोइनों की ड्रेस डिज़ाइनर है। वैशाली, खुद के दम पर मक़ाम खड़ा करने की महत्वाकांक्षा रखने वालों के लिए जैसे प्रकाश-स्तम्भ बन चुकी हैं।

आज वह वेस्टर्न वियर को ट्रेडिशनल हैंडी-क्राफ्ट टेक्सटाइल के साथ मिक्स करके फ्यूज़न कपड़े डिज़ाइन कर रही हैं। उन्होंने अपने डिज़ाइन को विल्स इंडिया लाइफस्टाइल फैशन वीक और अमेज़न के फैशन वीक स्प्रिंग समर 2016 कलेक्शन में प्रदर्शित कर चुकी हैं। ऐसी ख्याति शायद ही वैशाली के अलावा और किसी को मिली होगी। परन्तु उनकी जीवनयात्रा इतनी आसान नहीं थी। इस मक़ाम तक पहुँचने में वैशाली को पंद्रह साल संघर्ष करना पड़ा। उनके ऊपर बशीर बद्र साहब का यह शेर एकदम सटीक बैठता है;

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं! तुमने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा।   

सपनों को पूरा करने के लिए घर से भाग निकली

वैशाली मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 57 किलोमीटर दूर एक छोटे से शहर विदिशा के एक रूढ़िवादी परिवार में बड़ी हुई। पुरानी विचारधारा के चलते तब लड़कियों की उच्च-शिक्षा बीच में ही छुड़ा दी जाती थी और माँ-बाप के लिए करने को सबसे ज़रूरी काम होता था कि किसी भी तरह अपनी बेटी के हाथ पीले कर दिए जाएँ। पर जब यह सब वैशाली के साथ हुआ तब उन्होंने इसका विरोध किया।

वैशाली के माता-पिता ने उन्हें आगे पढ़ने की इजाज़त नहीं दी और शादी के लिए दबाव बनाने लगे। वैशाली को विश्वास था कि उन्हें कपड़ों की पहचान और रंगों की समझ विरासत में अपने पिता से मिली है। उन्होंने निश्चय कर लिया कि वे अपने टैलेंट को ऐसे ही नहीं जाने देंगी और इसलिए उन्होंने घर से विद्रोह कर दिया। पर घर की मानसिकता की वजह से उनके प्रयास विफल हो गए।

उस रात वैशाली डर से सिहर सी रही थी। उन्होंने फैसला कर लिया था कि वह अपने माता-पिता, परिवार, शहर और सब कुछ छोड़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर से भाग जाएँगी। सुबह के तीन बजे थे, जब उन्होंने सावधानी से दरवाज़ा खोला, उनके दिल की धड़कनें तेज़ हो गयी थीं और खाली हाथ अपने घर से बाहर निकल आईं हमेशा-हमेशा के लिए। उनके पास न पैसे थे और न ही कोई सामान और वे तेजी से पसीने से लथपथ पागल सी रेलवे स्टेशन की ओर भागती जा रही थीं।

वैशाली ट्रैन के आने का इंतजार करने लगी l वह यह नहीं जानती थी कि वह भोपाल जाए या फिर मुंबई। एक ट्रेन रुकी और वह चुपचाप उसमें बैठ गयीं l जब ट्रेन सरकने लगी तो उसने चैन की साँस ली। वह अपने जेल जैसे घर से काफी दूर निकल आई थी। वैशाली जानती थी कि उसका भाग्य  उसके परिवार वाले नहीं वह खुद लिखने वाली है।

500 रूपये की पहली कमाई

खाना, रहना, पैसा और साधन कुछ भी नहीं था वैशाली के पास l वह लोगों को मदद के लिए कहती, ऑफिस के आसपास घूमा करती और अंत में उन्हें एक ऑफिस में 500 रूपये की तनख्वाह में ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी मिल गई l सारे खर्च इसी में पूरा कर लेती थी और फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई करने के अपने सपने को साकार करने के लिए उसने कुछ बचाना भी शुरू कर दिया l

वैशाली ने एक छोटे से फैशन इंस्टिट्यूट में अपना दाखिला लिया l वह लगातार संघर्ष कर रही थी ताकि उन्हें उनकी मंजिल मिल सके l वह समय से अपना फीस भी नहीं भर पा रही थी l उनका सपना तब चूर-चूर हो गया जब उनका एडमिशन रद्द कर दिया गया l कुछ दिनों बाद वह फिर से क्लास में जा पाई और अपने पोर्टफोलियो बनाने के लायक कुछ कटिंग्स और सिलाई सीख लिया l उन्होंने फैशन सेमिनार अटेंड करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे वह प्रगति करती चली गई और हर क़दम के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता चला गया।

1999 में वैशाली को बांद्रा-बेस्ड गारमेंट एक्सपोर्ट हाउस में काम मिल गया। वे वैशाली को 11,000 रूपये महीने की तनख्वाह देना चाहते थे। यह एक बड़ी सफलता थी और यह नौकरी उनके सपनों के लिए जैसे पंख के समान थी। पर उन्हें कुछ समय के बाद स्लिप डिस्क की तकलीफ हो गई जिसके चलते उनकी सारी बचत मेडिकल बिल भरने में खत्म हो गई।

बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने अपने फिटनेस का खूब ध्यान रखा और पास के ही जिम में ट्रेनर की नौकरी ज्वाइन कर ली। जब उन्हें 50,000 का लोन मिला, उन्होंने मलाड में अपना पहला स्टोर खोल लिया। उन्होंने अपनी क़ाबिलियत का पूरा इस्तेमाल फैशन के क्षेत्र में कुछ अलग करने में किया।

उन्नति की राह

यह वह समय था जब उन्होंने शादी कर ली और साथ ही साथ अपना काम भी कर रही थी। उनका एक स्टोर आज तीन मंज़िला स्टोर बन चुका है। वैशाली फैशन की दुनिया में नए-नए प्रयोग करती हैं। उन्होंने छोटे शहरों के फैब्रिक जैसे चंदेरी और संबलपुरी फैब्रिक में सुगंध का इस्तेमाल कर फैशन जगत में अपना एक नया मक़ाम हासिल किया। वैशाली के पास 100 कर्मचारी हैं और अभी उन्होंने जुहू में बड़े स्तर पर एक चमक-धमक वाली स्टोर खोलने के लिए 2000 स्क्वायर फिट का प्लॉट खरीदा है।

वैशाली की एक सुन्दर सी बेटी है और अब वह अपने माता-पिता के सम्पर्क में भी है। उनकी उपलब्धियों से उनके माता-पिता आज गर्वित महसूस कर रहे हैं। वैशाली ने अपनी क़ाबिलियत और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जी तोड़ मेहनत के कारण ही नाम और प्रसिद्धि हासिल की।

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