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घाटी में तमाम विवादों के बावजूद व्हाट्सऐप के जरिए गाँव-गाँव तक पहुँचाई जा रही है स्वास्थ्य व्यवस्था

तकनीक ने हमारे जीवन को जितना सुगम बनाया है, शायद किसी और चीज़ ने उतना नहीं बनाया। हम अक्सर यह देखते हैं कि जब हमें किसी के साथ संचार का माध्यम स्थापित करना होता है तो हम प्रायः कॉल, इंटरनेट, व्हाट्सएप, मेल इत्यादि का इस्तेमाल करते हैं और हम एक झटके में औरों से संपर्क साधने में कामयाब हो जाते हैं। यह तकनीक की प्रगति एवं मानव की उपलब्धि ही है जो हम ऐसा करने में सक्षम हो जाते हैं। आम जीवन में इसका इस्तेमाल तो जगजाहिर है, पर अगर आपसे कहा जाए कि इन्ही संचार माध्यमों की मदद से औरों के जीवन को बचाया जा रहा है तो शायद आप हैरान हो सकते हैं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमें जब भी कोई बीमारी घेरती है, हम तुरंत डॉक्टर के पास पहुंच जाते हैं और वो हमारा उचित उपचार करता है। लेकिन जब बात गंभीर बीमारी की हो तो डॉक्टरों के लिए भी अपने मरीज़ को ठीक कर पाना कई बार आसान नहीं हो पाता, हालाँकि यह जरूर है कि अगर हमें जीवन में कोई जीवनदान देता है तो वो होता है हमारा डॉक्टर। कई बार हमारे शहर का डॉक्टर हमारी बीमारी के अनुरूप उपचार कर पाने में कामयाब नहीं होता, ऐसे में उन्हें अन्य नामी डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। बदलते हुए युग के साथ, उपचार करने का तरीका एवं ज़रिया भी बदला है। पहले जहाँ डॉक्टर जटिल बिमारियों का उपचार करने के लिए अन्य डॉक्टरों से मिलकर उनसे सलाह मशवरा करते थे, अब वही सलाह पाने का माध्यम बन गया है व्हाट्सएप।

जी हाँ, कश्मीर में व्हाट्सएप के जरिए अब डॉक्टर, लोगों का इलाज करके खूब नाम कमा रहे हैं। आइये जानते हैं आखिर कैसे वो इस मुहिम को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं।

कश्मीर के सुदूर इलाकों में चल रही है ‘सेव हार्ट्स मुहिम’

कश्मीर की घाटी भले ही कितने विवादों की साक्षी रही हो लेकिन यहाँ के डॉक्टर लोगों की जान बचने के लिए जो प्रयास कर रहे हैं वो तारीफ के काबिल है। यह सेवा पिछले साल दिसंबर में कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय द्वारा शुरू की गई, जिसके अंतर्गत घाटी के दूरदराज के इलाकों में तैनात डॉक्टरों द्वारा व्हाट्सएप की मदद से मरीजों के इलाज सम्बन्धी राय, अन्य डॉक्टरों से ली जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, यह विभाग, कार्डियक आपातकालीन पीड़ित लोगों, विशेष रूप से मायोकार्डियल इंफार्क्शन या दिल का दौरा पड़ने वाले लोगों का जीवन बचाने के लिए “हब और स्पोक मॉडल” का उपयोग करता है।

इस मुहिम के अंतर्गत गाँव या छोटे शहरों में मौजूद अस्पतालों के डॉक्टर बड़े अस्पताल जैसे कि एसकेआईएमएस और श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल के डॉक्टरों से व्हाट्सएप के जरिये सलाह लेते हुए उपचार करते हैं।

डॉक्टर्स व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़े हैं इस मुहिम से

टेरिटरी केंद्रों में कार्यशील डॉक्टर एवं ह्रदय रोग विशेषज्ञ इस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा हैं और इनके द्वारा सुदूर इलाकों में तैनात डॉक्टरों को 24 घंटे उपचार की विधि, माध्यम एवं अन्य उपचार संबंधी सलाह दी जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया को समझते हुए इस कार्यक्रम से जुड़े एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नासिर शम्स कहते हैं कि, “जैसे ही ह्रदय रोगियों को परिधीय अस्पतालों में लाया जाता है, उन्हें ईसीजी हेतु एक आपातकालीन कमरे में ले जाया जाता है। चिकित्सक व्हाट्सएप पर उस मरीज़ की ईसीजी रिपोर्ट को साझा करता है, यह ग्रुप 24×7 संचालित किया जाता है। इस ग्रुप पर मौजूद एसकेआईएमएस और अन्य हृदय रोग विशेषज्ञ उस ईसीजी को आधार बनाकर अपनी सलाह देते हैं।”

जब कभी भी मरीज़ की हालत ज्यादा गंभीर होती है, उसे तुरंत इलाज के लिए बेहतर अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। इस ग्रुप पर अब विदेश के डॉक्टरों को भी जोड़ा जा रहा है जिससे उनसे भी सलाह मशवरा किया जा सके।

सांकेतिक तस्वीर

अबतक 1500 से भी ज्यादा आपातकालीन मरीज़ों की हो चुकी है मदद

आँकड़ों के मुताबिक इस मुहिम के अंतर्गत अबतक 1500 मरीजों की जान को बचाया जा चुका है। इनमें से अकेले 120 मामले हार्ट अटैक के थे। अधिकारियों का कहना है कि बहुत जल्द इसमें विदेशों में काम कर रहे कश्मीरी डॉक्टरों को भी जोड़ा जाएगा।

एक अधिकारी ने यह भी बताया कि, “इस व्हाट्सएप ग्रुप में एक ऑस्ट्रेलियन डॉक्टर भी है जो अन्य डॉक्टरों की अनुपस्थिति में डॉक्टरों को राय देता है।”

वास्तव में इस मुहिम के अंतर्गत तकनीक का सबसे बेहतर उपयोग करते हुए लोगों की जान को बचाया जा रहा है। इस व्हाट्सएप ग्रुप के चलते अब मरीज़ों को प्रदेश के मुख्य जिलों में जाकर इलाज कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि वो अपने इलाके के ही अस्पताल में उचित उपचार पाने में कामयाब हो रहे हैं। हम कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग की इस मुहिम को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही अन्य प्रदेशों के डॉक्टर भी इसका एक हिस्सा बनेंगे।

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