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बिजली के लिए गाँवों को आत्मनिर्भर बना रहा है ‘देशी पावर’ का यह अनोखा माॅडल

बिहार का एक जिला अररिया इन दिनों बाढ़ की आपदा से बेहद प्रभावित है। पूर्वांचल कोसी क्षेत्र में पड़ने वाला यह क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ की विभिषिका झेलता है। नेपाल से छोड़े जाने वाले पानी और भी स्थिति को बदतर बना देती है। इस वर्ष के बाढ़ की भयावहता की तुलना 1987 के बाढ़ से की जा रही है। अब तक 57 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। शहर से सम्पर्क टूट गया है, कई पुल ध्वस्त हो गयी है। बिजली की व्यवस्था चरमरा गई है। फिर भी गाँव के घरों में सूरज ढ़लने के बाद LED बल्ब की रोशनी जगमगा रही है। लोग अपने मोबाईल को चार्ज करके अपने स्थिति की सूचना परिजनों तक पहूँचा पा रहे हैं। ऐसा हो पाना संभव हुआ है सोलर पैनलों के माध्यम से बिजली उत्पादन द्वारा।

देशी पावर एक क्षेत्रीय बिजली प्रदाता कंपनी है, जिसने अररिया क्षेत्र में सौर उर्जा की व्यवस्था स्थापित की है। वर्ष 2001 से यह कंपनी अररिया और पूर्णिया क्षेत्र में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही है। ‘देशी पावर’ कोयला या गैस से बिजली उत्पादन नहीं करता है बल्कि स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध सौर उर्जा से बिजली उत्पान करता है। बाढ़ के कारण इस क्षेत्र में बिजली दिनों, हफ्तों तक नहीं आती है। ऐसे में जिन घरों में सौर उर्जा से बिजली पहुँचती है वहाँ सूरज डूबने के बाद भी रौशनी की व्यवस्था सुचारु रहती है। 2002 से ‘देशी पावर’ राॅकफेलर फाउण्डेशन की फंडिग के तहत अररिया और इसके आस-पास के 100 गाँवों में गैर-परम्परागत उर्जा स्त्रोत सौर उर्जा और बायोमास आधारित उर्जा संयंत्र से घरों और छोटे-छोटे उद्योगों को बिजली की आपूर्ति कर रही है।

‘देशी पावर’ के इंजीनियरों ने सोलर पैनलों को सतह स्तर से कुछ फीट ऊपर करके लगाया है जिससे की बाढ़ के पानी में भी वे सुरक्षित रह सकें। और इन सोलर पैनल के घरेलू बैट्री बाक्स भी पोर्टेबल हैं। जिसे बाढ़ या आग की स्थिति में आसानी से उठाकर सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। बिजली की आपूर्ति के लिए बहुत ही कम मासिक शुल्क भुगतान करना पड़ता है। ‘देशी पावर फाउंडेशन’ ग्रामीणों को इसके रख-रखाव इत्यादि के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान करता है, जिससे वे बिजली के उत्पादन और प्रयोग के लिए आत्म निर्भर बनें। ये सोलर सिस्टम बाढ़ की स्थिति में पुरी क्षमता से काम नहीं कर पाते फिर भी इतनी बिजली का उत्पादन करते हैं जिससे एक घर में एक या दो बल्ब जलाया जा सके, एक पंखा और एक मोबाइल चार्ज किया जा सके।

हालांकि यह बहुत कम क्षमता है मगर बाढ़ पीड़ितों के लिए जहाँ सरकारी सहायता पहुँचने के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता है, वहाँ के लोगों को कम से कम बिजली तो मिल रही है। बाढ़ के बाद जब देशी पावर के कर्मचारी अररिया क्षेत्र में निरक्षण के लिए गए तो उन्होंने पाया कि 75% पैनल ठीक रुप से काम कर रहा है। साथ ही साथ बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में उन्होंने पीने के पानी की एक और विकट समस्या को पाया। देशी पावर ने यह तय किया कि सुरक्षित पीने का पानी के लिए जिन स्थानों पर सोलर पैनल काम कर रहे हैं वहाँ पानी उपचार संयंत्र स्थापित किया जाए। पहला पानी उपचार संयंत्र 200 घरों तक के लिए, सुरक्षित पानी उपलब्ध करा पाएगा।

अररिया क्षेत्र का यह प्रयोग और तकनीक के प्रयोग को अब देश के 1000 गाँवों तक विस्तृत करने की योजना है। जिसे स्मार्ट पावर इण्डिया के नाम से किया जाएगा। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित गाँवों में, से अररिया क्षेत्र के 100 गाँवो में भी स्मार्ट पावर इण्डिया काम करेगी। ग्रामीण विद्युतीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस परियोजना को राॅकफेलर फाउण्डेशन फंड का पूरा सहयोग मिला है। गौरतलब है कि मात्र 5 साल पहले तक अररिया के बड़े क्षेत्रों में न तो सड़क सुविधा थी और न ही बिजली। जहाँ बिजली के तार पहुँचे थे, वहाँ घंटों तक बिजली नहीं रहा करती थी। विशेष रुप से शाम में जब बिजली की ज्यादा जरुरत होती है। ऐसे में देशी पावर द्वारा स्थापित छोटे सोलर संयंत्र घरों में जरुरत के मुताबिक बल्ब और पानी के पम्प चालने तक की बिजली मुहैया कराती है।

जिस प्रकार मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने महंगे फोन लाईन बिछाने और गाँवों तक पहुँचने की दुविधा को समाप्त कर दूर-दराज गाँवों तक के लोगों को मोबाईल नेटवर्क से जोड़ा है। उस प्रकार सोलर सिस्टम से बिजली का उत्पादन बिजली के पावर लाईन और ग्रिड की जटिलता को समाप्त कर हर गाँव को बिजली की आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बना पाएगा।

जब भी विकास की बात होती है तो गाँव शहर दोनों के विकास की बातें होती है। पर शहर में जहाँ सुविधाओं का जाल बिछ जा रहा है, वहीं गाँव इस दौड़ में पीछे रह गया है। ऐसे में ‘देशी पावर’ का ग्रामीण विद्युतीकरण की परियोजना ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति दी है। लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। लोगों के स्वास्थ, आजीविका के अवसरों का भी विकास विकास हुआ है, साथ ही साथ यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।

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