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दिल्‍ली का सबसे बड़ा एनकांउटर, जहाँ बंदूकों और गोलियों पर कर्तव्‍य और मानवता भारी रही

10 जून 2018 को अखबारों की सुर्खियों में दिल्ली वासियों ने शहर में हुए पिछले 10 सालों के सबसे बड़े एनकाउंटर के बारे में पढ़ा जो शनिवार की दोपहर दिल्ली के छतरपुर इलाके में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के ऑफिसर्स और शहर के वांछित अपराधियों के बीच में हुआ। चार गैंगस्टर्स के साथ कुख्यात अपराधी राजेश भारती इस भीषण एनकाउंटर में मारा गया। जो पिछले काफी समय से पुलिस द्वारा वांछित था।

इस पूरे घटनाक्रम में सब इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह देसवाल ने एक नायक की तरह भूमिका निभाते हुए अपने सहयोगी की जान बचाने के लिए अपनी जान भी दांव पर लगा दी। 25 वर्षीय गुरदीप सिंह जो हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं उनकी तरफ आ रही बुलेट को रोकने के लिए विजेंद्र देसवाल ने अपने शरीर से सुरक्षा कवच की तरह गुरदीप को ढक लिया और दो गोलियां उनके शरीर पर आकर लगीं लेकिन गुरदीप की जान बच गई। गुरदीप सिंह 3 महीने पहले ही एक बेटे के पिता बने हैं।

सांकेतिक तस्वीर

देसवाल के परिवार वाले एक तरफ उनके गुरदीप की जान बचाने के लिए खुश है वहीं दूसरी तरफ देसवाल की जान को ख़तरा होने पर चिंता में भी। देसवाल पिछले 15 सालों से स्पेशल सेल से जुड़े हुए हैं। स्पेशल सेल की टीम में इस एनकाउंटर में 8 सदस्य घायल हुए और बहादुरी और जांबाजी से अपराधियों का सामना करके अपने सहयोगियों को भी समय पर अस्पताल लेकर पहुंचे।

इंस्पेक्टर राज सिंह ने अपने सभी सहयोगियों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जबकि उनके दाएं हाथ में गोली लगी थी। इंस्पेक्टर विजेंद्र और इंस्पेक्टर राज दोनों ही 15 वर्षों से स्पेशल सेल में काम कर रहे हैं दोनों के ही बेटे खबर सुनते ही अस्पताल की ओर भागे।  

कोमल कादयान जो एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। वह उस क्षण बहुत नर्वस थी जब उन्हें गन शूटिंग का पहला केस अपने पिता कृष्ण कादयान का ही संभालना था। कृष्ण कादयान भी इस एनकाउंटर में जख्मी हो गए थे। एम्स पहुंचने से पहले उन्होंने अपनी बेटी को बस इतना ही बताया कि छोटी सी दुर्घटना हुई है। एम्स ट्रॉमा सेंटर में कोमल ने मेडिकल टीम के साथ अपने पिता का इलाज किया। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस एम एम ओबेरॉय एवं डीसीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा ने अस्पताल पहुंचकर इन वीर सिपाहियों से मिलकर उनकी हौसला अफजाई की।

सांकेतिक तस्वीर

पुलिस स्पेशल सेल के इन अधिकारियों ने जिस तरह से इस एनकाउंटर को अंजाम दिया उससे यह साबित करके दिखा दिया कि अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हुए इनकी डयूटी ही इनके लिए सर्वोपरि है, विकट परिस्थितियों में पूरी टीम ही इनका असली परिवार है जिसे बचाने के लिए यह अपनी जान तक दांव पर लगा सकते हैं। तो, पहले देश, फिर सहयोगियों की सुरक्षा और बाद में अपने परिवार की सुरक्षा का ध्‍येय यह सिपाही साथ लेकर चल रहे हैं। यही निस्वार्थ वीर सिपाही तो देश और देशवासियों की रक्षा सही मायनों में कर रहे हैं।

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