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खेती के लिए छोड़ दी वेब डिज़ाइनर की नौकरी, स्ट्रॉबेरी उगाकर पेश कर रहे हैं सफलता की मिसाल

इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि जिन भी व्यक्तियों ने अपने जीवन में कुछ अलग करने का सोचा है, उन्होंने मुकाम भी बेहद अलग ही पाया है। यह बहुत हिम्मत का कार्य होता है कि आप जीवन में कुछ हटकर सोचें और उसको हासिल करने के लिए अथक प्रयास भी करें। हम जानते हैं कि हमारे देश की जितनी मदद एक किसान करता है उतनी मदद शायद ही किसी और पेशे में कार्य करने वाला व्यक्ति करता होगा। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने वेब डिजाइनिंग के अपने फलते-फूलते करियर को छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने का सोचा और आज पूरे देश में उनका नाम हो रहा। उनके द्वारा स्ट्रॉबेरी की खेती करना कोई मामूली कार्य नहीं है, बल्कि विषम परिस्थितियों में स्ट्रॉबेरी उगाकर उन्होंने कृषि के क्षेत्र में अपना अहम् योगदान दिया है। उन्होंने जीवन में कुछ अलग करने का सोचा और ऐसा कार्य चुना जिससे वो समाज के बड़े स्तर पर काम आ सकते हैं। उनके इस कार्य की वजह से न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि व्यापक स्तर पर समाज के उत्थान की सम्भावना पैदा हुई है।

यह कहानी है राजस्थान, पाली के विराटियाकल्ला गाँव के रहने वाले दीपक नायक की जो किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती उस वक्त में शुरू की जब पूरा गांव उन पर हंसता था। यह उनकी दूरदर्शिता ही थी जहां उन्होंने सोचा कि उन्हें राजस्थान जैसे इलाके में, जिसे देश का सबसे गर्म स्थानों में गिना जाता है, वहां पर अमूमन ठंड में उगाई जाने वाले स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की और आज वह हर दूसरे दिन अपने फार्म हाउस से लगभग 50 किलो स्ट्रॉबेरी पैदा कर रहे हैं। दीपक ने केनफ़ोलिओज़ के साथ ख़ास बातचीत में अपनी कहानी को साझा किया

महाराष्ट्र में स्ट्राबेरी की खेती को देख मिली प्रेरणा

वह बताते हैं कि वह अक्सर महाराष्ट्र जाया करते थे और उन्होंने एक बार सतारा और जलगांव के क्षेत्रों में स्ट्राबेरी की खेती होते हुए देखी। उन्होंने यह सोचा कि राजस्थान और महाराष्ट्र दोनों जगहों का तापमान एवं वातावरण एक जैसा रहता है तो क्यों ना वो भी अपनी बंजर पड़ी जमीन पर स्ट्राबेरी की खेती शुरू करें। जब वह अपने गांव वापस लौटे तो उन्होंने अन्य किसानों से इस बारे में बात की लेकिन उन किसानों ने यह कहा कि उन्हें स्ट्रॉबेरी का नाम तक नहीं पता है और राजस्थान में जिस तरह का तापमान होता है उसमें हर तरह की चीजें भी उगाई नहीं जा सकती हैं। वह बताते हैं कि उनके क्षेत्र में लोग ज्यादातर चना, मूंग और बाजरा ही उगाते हैं और नुकसान के डर की वजह से वो किसी नयी चीज़ की खेती करने से कतराते 

खेती के लिए छोड़ दी वेब डिज़ाइनर की नौकरी

दीपक नायक से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि, “मैं पहले वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में था और अच्छी-ख़ासी कमाई कर लेता था लेकिन मेरे मन में यह बात अक्सर आती थी कि हमारा पुश्तैनी फार्महाउस बंजर बेकार पड़ा हुआ है, उसका कुछ उपयोग करना चाहिए। और एक दिन मैं अमेरिका में रह रहे अपने एक दोस्त से बात कर रहा था। इस दौरान हमारी बातचीत स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर भी हुई“। वो आगे बताते हैं कि, “मैंने इस संबंध में बहुत रिसर्च की और कई एक्सपर्ट से बात की। जहां ज्यादातर लोगों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती राजस्थान जैसे गर्म इलाके में करने से हतोत्साहित किया लेकिन उन्होंने अपनी रिसर्च में यह पाया कि उनके लिए स्ट्रॉबेरी उगा पाना मुमकिन हो सकता है“। 

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि स्ट्रॉबेरी उगाने के लिए सबसे जरूरी चीज जो होती है वह होती है मिट्टी का पीएच स्तर, अगर उसका स्तर 7 हो और पानी का स्तर 0.7 हो तो फिर स्ट्रॉबेरी कहीं भी उगाई जा सकती है। जहां तक तापमान की बात है तो वह 10 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच में होना चाहिए और इसीलिए जाड़े के मौसम में स्ट्राबेरी की खेती उपयुक्त मानी जाती दीपक ने यूट्यूब, किताबों एवं इंटरनेट की मदद से स्ट्रॉबेरी उगाने की बारीकियां सीखी और अंततः इसकी खेती करने का निर्णय लिया।

क्या है पूरी प्रक्रिया

वह बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले मृदा परीक्षण करवाया और वहां की मिट्टी में मौजूद तत्वों के विषय में जानकारी प्राप्त की। इससे उन्हें मिट्टी का पीएच स्तर 7 रखने एवं पानी का स्तर 0.7 रखने में मदद मिली। इसके बाद उन्होंने पूरे खेत की जुताई शुरू की और मुलायम मिट्टी को ऑर्गेनिक मैन्योर के साथ मिलाया, उन्होंने इसके लिए गाँव के लोगों से गाय का गोबर प्राप्त किया। एक बार जब फर्टिलाइजर अच्छे से मिला दिया गया, उसके बाद उन्होंने खेत की दोबारा जुताई की और 2×180 फीट के कई सारे बेड तैयार किए। एक बार जब यह बेड तैयार हो गए तो उन्होंने डीएपी फ़र्टिलाइज़र का इस्तेमाल भी किया। इसके लिए उन्होंने एक्सपर्ट से फर्टिलाइजर के अनुपात के विषय में भी जानकारी प्राप्त की और उसके पश्चात प्राकृतिक रूप से बनाए गए मैन्योर को हर बेड पर 50 किलोग्राम की मात्रा में डाल इसके बाद उन्होंने टपकन सिंचाई सिस्टम का और मल्चिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया। 

इसके पश्चात उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे से 9.5 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से स्ट्रॉबेरी के पौधे खरीदे और शुरुआत में 15,000 पौधों से खेती शुरू की, जिसे उन्होंने 1 एकड़ जमीन में लगा दिया। लेकिन वह कहते हैं कि 1 एकड़ जमीन में 24,000 पौधे तक लगाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पौधों की श्रृंखला के बीच में 10 से 12 इंच का दूरी होनी चाहिए हालांकि उन्होंने अपने खेत में इस दूरी को 12 से 14 इंच तक रखा है। वह बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी के पौधों में फंगस बहुत जल्दी लग जाया करता है इसलिए यह जरूरी है कि हम पौधों पर लगातार उन रसायनों का इस्तेमाल करते रहें जो उन पौधों पर फंगस को लगने से रोक सकें, इसके अलावा लगातार पौधों पर स्प्रे मशीन के जरिए पानी का छिड़काव भी करते रहना चाहिए और सूखी हुई पत्तियों को पौधों से लगातार अलग भी करते रहना चाहिए।

फोन पर बातचीत के दौरान दीपक ने बताया कि उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए शुरुआत में चार लाख का खर्च करके खेतों में ड्रिप इंस्टॉल करवाएं, पौधे खरीदे, फार्म यार्ड आर्गेनिक मैन्योर, फर्टिलाइजर एवं छोटी मशीनरी का भी इस्तेमाल किया| उन्होंने पिछले अक्टूबर में इसके पौधे लगाए थे और दिसंबर के अंत से उन्हें स्ट्रॉबेरी मिलने लगी थी जिसे वह लगातार राजस्थान के ब्यावर, अजमेर एवं अन्य इलाकों के बाजार में बेचते रहते हैं| वह बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई सिस्टम के जरिए स्ट्रॉबेरी को लगातार नमी दी जाती जो कि स्ट्रॉबेरी की खेती में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

पहले हंसते थे लोग अब हैं उन सब की प्रेरणा

वह बताते हैं कि पहले जब उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती की योजना बनाई तो लोग उन पर आकर हंसते थे। पहली बार जब उनके पौधे एक AC गाड़ी में आए तो लोगों ने उनका मज़ाक बनाते हुए कहा जिसके पौधे ही AC गाड़ी में रहे हैं उसकी खेती गर्म क्षेत्र में कैसे हो पाएगी? लेकिन दीपक जी को अपनी रिसर्च, अपने हौसले और अपनी हिम्मत पर पूरा भरोसा था और वो यह जानते थे कि वह अगर बेहतर रणनीति से कार्य करेंगे तो वह स्ट्रॉबेरी को राजस्थान जैसे गर्म क्षेत्र में भी उगाने में सफल रह पाएंगे।

 

आज उन्हें पूरे देश से स्ट्रॉबेरी की खेती के गुण सिखाने के लिए निमंत्रण प्राप्त हो रहा है। वो मौजूदा समय में 2 बच्चों को इसकी खेती करने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं और उन्हें आईआईएम कोलकाता से भी अपना अनुभव साझा करने के लिए बुलाया गया है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा यह कहते थे कि किसी भी व्यक्ति को कोई भी बड़ा कार्य करने से पहले यह जरूर सोच लेना चाहिए कि उसके द्वारा किया जाने वाले कार्य से कितनों की मदद हो सकती है एवं कितनों की जिंदगी बदल सकती है? कई विचारकों ने भी इस बात को माना है हर व्यक्ति को अपने जीवन में इस बात को लेकर आत्मा मंथन अवश्य करना चाहिए कि वह किस तरह से समाज के विकास में अपना योगदान दे रहा है।

दीपक नायक जैसे युवा इस बात को सार्थक करते नजर आ रहे हैं कि अगर व्यक्ति ठान ले तो वह न केवल खुद का बल्कि समाज के उत्थान में अपना एक अहम् योगदान देकर उस समाज की तकदीर बदल सकता है। दीपक जी की जिजीविषा को हमारा सलाम है।

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