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आधुकिन तरकीब से खेती कर मौसम को मात देने वाले देश के 9 करोड़पति किसानों की कहानी

उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, निकृष्ट चाकरी, भीख निदान’ पहले यह कहावत बहुत प्रचलित हुआ करती थी, इसका अर्थ है कि खेती सबसे अच्छा कार्य है, व्यापार मध्यम है, नौकरी निकृष्ट है और भीख माँगना सबसे बुरा कार्य है। सदियों से चली आयी यह अवधारणा आज बिलकुल उलटी हो गयी है। व्यापार आज भी मध्यम ही है किंतु नौकरी को अब सर्वोत्तम कार्य माना जाने लगा और खेती को सबसे निकृष्ट बना दिया गया है। चाहे किसी बड़े किसान का बच्चा हो या किसी बड़े व्यापारी का बच्चा सभी का सपना बस नौकरी करना रह गया है।

लेकिन इन धारणाओं को कुछ लोग न केबल गलत साबित कर रहे हैं बल्कि बदलते वक़्त के साथ कुछ किसान खेती में आधुनिक तकनीक आजमा रहे हैं और ज़बरदस्त मुनाफ़ा कमा रहे हैं। आज हम ऐसे ही 9 किसानों की बात करने जा रहे हैं जिन्होंने खेती कर मिसाल कायम की है।

1. इस्माइल रहीम शेरू

गुजरात के अमीरगढ़ इलाके के रामपुर-बड़ला गांव में रहने वाले इस्माइल रहीम शेरू की पहचान सफल किसान के रूप में है। बीकॉम की पढाई कर चुके इस्माइल भाई आज एक करोड़पति किसान हैं। पिता चाहते थे कि वे नौकरी करें पर उन्होंने अपनी राह खुद बनाई। 1998 में इस्माइल भाई कनाडा की मैक्केन कंपनी के संपर्क में आए और उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट पर इस कंपनी के लिए आलू उपजाना शुरू कर दिया। 5 एकड़ की पुस्तैनी जमीन से शुरू हुई खेती आज 400 एकड़ के मुकाम पर पहुँच गयी है। अब इस्माइल मैक्केन के साथ-साथ मैक्डोनल्ड को भी आलू सप्लाई करते हैं। उनका टर्नओवर आज करोड़ों में है।

2. वल्लरी चंद्राकर

वल्लरी रायपुर से करीब 88 किमी दूर मुहंसमूंद के बागबाहरा के सिर्री पठारीमुड़ा गांव की रहने वाली हैं। 27 साल की वल्लरी चंद्राकर ने कंप्यूटर साइंस में एम.टेक किया है। वल्लरी ने अपनी पढ़ाई 2012 में पूरी की इसके बाद एक कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर की जॉब करने लगी। उन्होंने टेक्नोलॉजी का उपयोग कर खेती करने का सोचा और नौकरी छोड़ अपने घर आ गयीं।

वल्लरी ने खेती की शुरुआत 2016 में 15 एकड़ जमीन से की थी। उनके पिता ने कुछ जमीन फार्म हाउस बनाने के लिए खरीद रखी थी। वल्लरी को वह खेती करने के लिए ठीक लगी और उन्होंने उस जमीन पर सब्जियां लगाना शुरू कर दिया। खेती की नई व आधुनिक टेक्नोलॉजी उन्होंने इंटरनेट से सीखी। देखा कि इजरायल, दुबई और थाईलैंड जैसे देशों में किस तरह से खेती की जाती है। सब्जियों की क्वालिटी अच्छी होने के कारण वे इन्हें दुबई और इजरायल तक एक्सपोर्ट करने की तैयारी है।

3. पार्थीभाई चौधरी

गुजरात के पार्थीभाई जेठभाई चौधरी पहले गुजरात पुलिस में काम करते थे। 58 वर्षीय पार्थीभाई ने लगभग 18 साल पहले खेती करने के लिए नौकरी तक छोड़ दी। बनासकांठा के दांतीवाड़ा में पानी की दिक्‍कत होती है लेकिन उन्होंने अपने खेतों में ड्रिप इरीगेशन और स्प्रिंकलर लगवाए जिससे वे हर साल 750 एम.एम. पानी की उपयोगिता वाले स्‍थान पर भी बहुत कम पानी में ही काम चला लेते हैं।

पार्थीभाई का मैक केन कंपनी के साथ आलू पैदा करने का कांट्रेक्‍ट है। उनके खेतों में 2 किलोग्राम तक के एक आलू होते हैं जिन्‍हें वे हर साल निश्चित दर पर ही बेचते हैं। वर्तमान में उनके पास 87 एकड़ कृषि भूमि अपनी और इतनी ही किराए पर है। पिछले साल उन्हें 3.5 करोड़ का मुनाफ़ा हुआ था।

4. नागा कटारु

मूलतः आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव गम्पालागुडम में जन्में कटारु प्रसिद्ध कंपनी गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे गूगल के 40वें इंजीनियर थे। साल 2000 में जब गूगल ने उन्हें नौकरी पर रखा था तब वह एक नयी कंपनी थी। बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नागा ने सन 2003 में गूगल अलर्टस की खोज भी की थी।

गूगल में 8 साल तक सफलता पूर्वक नौकरी करने के बाद धीरे-धीरे नागा कटारू का मन अपनी नौकरी से उचटने लगा। कुछ नया और अलग करने की बात पर नागा के दिमाग में खेती का ख्याल आया। उन्होंने कैलिफोर्निया में 320 एकड़ फार्म ख़रीदा और बादाम की खेती करने का मन बनाया। बादाम की खेती के लिए कैलिफ़ोर्निया का मौसम सबसे प्रतिकूल होता है। आज नागा अपने फार्म में बादाम के अलावा खुबानी की भी खेती करते हैं। उनके लिए 8-10 लोग काम करते है और आज उनकी सालाना कमाई 2.5 मिलियन डॉलर यानि करीब 17 करोड़ है।

5. बोलापल्ली श्रीकांत

40 वर्षीय बोलापल्ली श्रीकांत तेलंगाना के एक छोटे से शहर निजामाबाद के रहने वाले हैं। श्रीकांत का सपना था कि उनकी भी अपनी ज़मीन हो, जिस पर वे खेती कर सकें। आर्थिक हालात बिगड़ने पर उन्हें अपना शहर निजामाबाद छोड़ना पड़ा और 1995 में करियर बनाने के लिए उन्होंने बेंगलुरु का रुख किया। उस समय डोड्डा बालापुरा क्षेत्र के पास श्रीकांत को फूलों की खेती से जुड़ी एक कंपनी में बतौर पर्यवेक्षक के रूप में काम मिला। उस समय श्रीकांत की सैलरी मात्र 1000 रुपये थी।

करीब 2 साल तक उन्होंने नौकरी की और बिज़नेस की बारीकियों को ठीक से समझा। इसके बाद उन्‍होंने 24,000 की लागत से खुद का फूलों का बिज़नेस शुरू किया। 200 स्क्वायर फ़ीट की जगह पर काम शुरू हुआ। दिन-प्रतिदिन उनके ग्राहक बढ़ते चले गए और फिर उनके फूल बड़े-बड़े होटलों, शादी, जन्मदिन और पार्टियों में जाने लगे। साल 2012 में श्रीकांत ने डोड्डा बालापुरा में ही 10 एकड़ जमीन खरीदी और इस जमीन पर आधुनिक कृषि तकनीक से फूलों की खेती करना शुरू किया। मगर आज चार साल बाद श्रीकांत 30 एकड़ जमीन पर फूलों की वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उनके यहाँ 300 से अधिक कर्मचारी हैं और उनका सालाना टर्नओवर 70 करोड़ का है।

6. लक्ष्मण ओंकार चौधरी

जलगांव महाराष्‍ट्र के रहने वाले ओंकार चौधरी प्राइमरी स्‍कूल में टीचर थे। महाराष्ट्र का शहर जलगांव का नाम तो आपने भी सुना होगा। ये गांव भारत में केले की राजधानी कही जाती है। ओंकार ने पढ़ाने के साथ-साथ केले की खेती शुरू की। आज वह 120 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं।

उनका अमेरिका की एक कंपनी के साथ कांट्रेक्‍ट भी है जिसको वे हर साल निश्चित दर पर केला सप्लाई करते हैं। परंपरागत खेती करते समय चौधरी के पास सिर्फ 4 एकड़ जमीन थी। लेकिन अब ये बढ़कर 10 गुना यानी 40 एकड़ हो गई है। वो साल में अब 12,500 क्विंटल केले की पैदावार करते हैं। जिससे साल में उनकी कमाई डेढ़ करोड़ से अधिक होती है।

7. खेमा राम चौधरी

45 वर्षीय किसान खेमाराम चौधरी दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित गुड़ा कुमावतान के रहने वाले हैं।  खेमाराम ने आधुनिक तकनीक और अपने जज़्बे की बदौलत लाखों किसानों के लिए मिसाल पेश किया है।

नौवीं पास खेमाराम की स्थिति आज से पांच वर्ष पूर्व दूसरे किसानों की ही तरह थी। आज से 15 साल पहले उनके पिता कर्ज से डूबे थे। खेमाराम चौधरी ने इजरायल के तर्ज पर चार साल पहले संरक्षित खेती (पॉली हाउस) करने की शुरुआत की थी। पॉली हॉउसिंग तकनीक से की गई खेती मौसम को सीधे मात दे देती है और बिन मौसम भी किसान फल-सब्जियों की खेती कर सकते हैं। खेमा राम खीरे और खरबूजे की खेती करते है। आज वो अपनी खेती से लाखों रुपए मुनाफ़ा काम रहे है।

8. गजानंद पटेल

39 साल के गजानंद पटेल छत्तीसगढ़ राज्य में महासुंद जिले के गांव छपोराडीह के रहने वाले हैं। पटेल के पास महज चार एकड़ खेती योग्य ज़मीन थी। परम्परागत तरीके से धान की खेती करने से उन्हें 80 हजार रुपए के लगभग मुनाफ़ा मिलता था। पर उन्होंने आधुनिक रूप से पॉलीहाउस विधि द्वारा खेती करने का फैसला किया।

अब फल और सब्जी की खेती से उतनी ही जमीन पर उन्हें 40 लाख की सालाना की कमाई हो रही है। पटेल पॉलीहाउस खेती करने वाले अपने राज्य के पहले किसान हैं। इस तरह की आधुनिक खेती में मौसम की मार का असर फसल पर नहीं होता और उसकी गुणवत्ता भी बढ़ जाती। जिसके फलस्वरूप फसल अच्छे दामों में बिकती है। मुनाफ़े के मामले में वे सिर्फ राज्य के नंबर 1 किसान ही नहीं बने हैं बल्कि उनको राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर देश के कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री तक सम्मानित कर चुके हैं।

9. हिमांशु त्यागी

36 साल के हिमांशु त्यागी उत्तर प्रदेश के ज़िला बिजनौर के हरेवली गांव के रहने वाले हैं। हिमांशु नें एम.बी.ए करने के बाद करीब 9 साल तक दिल्ली के मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। किसान के इस बेटे ने 12 लाख सालाना की नौकरी को अलविदा कह खेती को गले लगाया।

एक बार उन्हें पॉलीहाउस तकनीक से खेती के बारे में पता चला और वे नौकरी छोड़ चल दिए अपने गाँव खेती करने।  उन्होंने 10 बीघा ज़मीन में चार पॉली हॉउसेज़ का निर्माण करवाया। इसमें करीब 1 करोड़ की लागत आई। उन्होंने दो पॉली हॉउस में गुलाब की खेती शुरू की और बाक़ी में कैप्सिकम (शिमला मिर्च) की। वे अपने फूलों और सब्जियों को दिल्ली और उत्तराखंड के मार्केट को सप्लाई करते हैं। अभी उनके खेत में करीब 5 लोग काम करते हैं और उनकी सालाना कमाई 20 लाख से अधिक की है।

आजकल जहाँ एक ओर लोग खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानते हैं और वहीं नई पीढ़ी के इन तमाम किसानों ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिखाया है कि आधुनिक तरीके से खेती कर करोड़ों की आमदनी की जा सकती है।

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