,

अविश्वसनीय सफलता: कैसे डिजिटल इंडिया की वाईफाई सुविधा ने बदल डाली एक कुली की किस्मत

कहते हैं कि किसी भी चीज को अंजाम तक पहुँचाने के लिए तमाम प्रकार के संसाधनों की जरूरत होती है, यह बात व्यक्ति के निजी जीवन में सपने को हासिल करने के लिए भी ठीक बैठती है। हम यह भी जानते हैं कि कई बार मेहनत और सच्ची लगन के बावजूद भी, हमें हमारे सपने संसाधनों की कमी के कारण हासिल नहीं हो पाते। लेकिन ऐसे भी उदाहरण हमारे सामने हैं जहाँ हमने देखा है कि सच्ची लगन और कड़ी मेहनत देखकर ईश्वर भी हमारी मदद के लिए कई सारे बंद दरवाज़ों को खोल देता है, जरूरत होती है तो बस उन सभी मौक़ों के सही इस्तेमाल करने की।

वास्तव में अगर समय रहते आपने उन मौक़ों का सही इस्तेमाल कर लिया, तो फिर आपको आपकी मंज़िल पाने से कोई नहीं रोक सकता है। आज की कहानी भी ऐसे ही एक शख्स की है, जिसकी मेहनत के क़िस्से सुनकर आपको हैरानी ज़रूर होगी पर इस बात पर यकीन भी आएगा कि कड़ी लगन और निष्ठा से हर मुकाम को पाया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं केरल राज्य के एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर कार्य करने वाले एक कुली की।

जी हाँ, वही कुली जो हमेशा दूसरों का बोझ अपने कंधों पर लिए घूमता है। वह कुली जिसके पास खुद के लिए सोचने की फुर्सत भी नहीं होती। पर श्रीकांत नाम के इस कुली ने रेलवे स्टेशन पर मौजूद वाई-फाई सुविधा से पढ़ाई करते हुए केरल लोक सेवा आयोग में चयन के अपने रास्ते को लगभग प्राप्त कर लिया है और अब वो एक अफ़सर बनकर (साक्षात्कार के पश्चात अंतिम चयन होने की दशा में) लोगों की सेवा करेंगे।

रेलवे स्टेशन पर लगे वाई-फाई से की गहरी दोस्ती

यूँ तो किसी भी बड़ी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए व्यक्ति कई प्रकार की किताबों को पढता है, कोचिंग संस्थान जाता है एवं तमाम अन्य स्रोतों से जानकारियाँ जुटाता है लेकिन श्रीकांत ने केरल लोक सेवा आयोग की लिखित परीक्षा को बिना किसी ख़ास संसाधन के ही पास कर लिया, और इसमें उनका साथ दिया उनके रेलवे स्टेशन स्थित मुफ्त वाई-फाई सेवा ने। जी हाँ, यह सुनने में अकल्पनीय अवश्य लग सकता है लेकिन सच है।

श्रीकांत कहते हैं, “मैं अपनी इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं खासकर के रेलवे मंत्रालय का शुक्रगुजार हूँ, जिन्होंने रेलवे स्टेशनों पर इंटरनेट की ऐसी सुविधा शुरू करवाई जिससे मेरे जैसे लोग अपनी सुविधा के अनुसार दुनिया भर की तमाम जानकारियाँ पा सकें और इसी के सहारे मैं अपने पहले इम्तिहान में पास हो गया हूँ।”

ईयर फ़ोन लगाकर लेते रहते थे महत्वपूर्ण टिप्स, फिर काम के बाद करते थे पढाई

पिछले 5 साल से कुली के पेशे से जुड़े श्रीकान्त इयरफोन पर अपनी शिक्षिका की बातों को ध्यान से सुनते रहते थे, जो उनको परीक्षा से जुड़ी अति महत्वपूर्ण टिप्स देती रहती थीं। वे कहते हैं कि रेलवे स्टेशन पर लगे वाईफाई अच्छी इंटरनेट स्पीड देते हैं और इसीलिए उन्हें इसका प्रयोग करने में दिक्कत नहीं आई। वो इसी के द्वारा मिलने वाले इंटरनेट की सहायता से इस परीक्षा से जुड़ी शिक्षण सामग्री भी प्राप्त किया करते थे। और फिर वो दिनभर कभी यूट्यूब से जानकारी प्राप्त करते तो कभी गूगल से तो कभी अपनी शिक्षिका से ईयरफ़ोन के जरिये टिप्स लेते रहते। दिनभर तमाम तरह के काम के बीच उन्हें पढ़ाई का ज्यादा वक़्त नहीं मिलता था और इसीलिए वो दिन-भर अपना सारा काम निपटाने के बाद रात में पढ़ते थे।

श्रीकांत कहते हैं कि, “हालाँकि इससे पहले भी मैंने दो बार लिखित परीक्षा दी थी, लेकिन उसमे मैं उत्तीर्ण नहीं हो पाया, क्योंकि उस समय तक मेरी वाई-फाई तक पहुंच नहीं थी। लेकिन आखिरकार मैंने तीसरे प्रयास में बाजी मार ही ली, और इस दौरान मैंने वाई-फाई सुविधा का भरपूर इस्तेमाल किया।”

आपको बता दें कि 2016 में डिजिटल इंडिया के तहत शुरू हुई रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा ने एक कुली की किस्मत ही बदल कर रख दी है। ग़ौरतलब है कि वर्ष 2018 तक देश के 685 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा शुरू हो गयी है और अब सरकार द्वारा मार्च 2021 तक लगभग 8500 स्टेशनों में इस सुविधा को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके लिए 700 करोड़ का निवेश होना तय हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर श्रीनाथ इस परीक्षा प्रक्रिया के साक्षात्कार स्तर को उत्तीर्ण कर लेते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड अस्टिटेंट के पद के लिए चयनित होंगे। वे कहते हैं कि उनके लिए नौकरी बहुत जरूरी है क्योंकि उनका परिवार बहुत सम्पन्न नहीं है और उन्हें आजीविका चलाने के लिए एक बेहतर नौकरी करनी ही है और इसीलिए उन्होंने काम के साथ साथ पढ़ाई जारी रखी। श्रीकांत कहते हैं कि, “दुनिया में कोई भी काम मुश्किल नहीं, हालाँकि मुझे काम के साथ-साथ पढ़ाई करने में थोड़ी दिक्कत जरूरी आती है लेकिन मैं जिंदगी में कुछ करना चाहता हूँ और यही ललक मुझे आगे बढ़ने का हौसला देती रहती है।”

श्रीकांत की यह कहानी हमें कई मायनों में प्रेरणा के स्तर पर छूती है, और हमें अपने मौजूदा हालातों के बीच ही प्रगति करने के लिए उत्साहित करती है। हम श्रीकांत के अंतिम चयन के लिए उन्हें शुभकामनायें देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो समाज में प्रेरणा का साथ-साथ सकारात्मकता का संदेश फैलाते रहेंगे।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें 

आपका कमेंट लिखें