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बैठ नहीं सकता इसलिए खड़े होकर दी परीक्षा, तमाम चुनौतियों के बाद भी स्कोर किया 93.4% मार्क्स

हर सुबह, हम चिल्लाते हुए जागते हैं और अपने काम को कोसते हुए जल्दबाजी में उसी दफ्तर की ओर भागते हैं। पर क्या हम अपनी ज़िंदगी से खुश हैं? बहुत कम ही लोग हैं जो अपने जीवन से खुश होते हैं और खुद को भाग्यशाली मानते हैं। समस्या हमारे ज्ञान की कमी में नहीं है, समस्या हमारे दृष्टिकोण में है। अगर हम अपने हर बात पर दुखी हो जाने और छोटी सी समस्या आने पर भी जीवन को कोसने वाली सोच को खत्म कर दे तो हमारी दुनिया हमें खुशियों से भरी मिलेगी।

संसार में प्रत्येक मनुष्य सदा ही सुख प्राप्त करने के लिए सतत प्रयास करता दिखाई देता है। हम हमेशा अधिक पाने की जुगत में लगे रहते हैं, लेकिन यह महसूस करने की कोशिश भी नहीं करते कि करोड़ों ऐसे लोग भी हैं जिन्हें दो वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं होती है। चाहे हमारे जीवन में स्थिति अच्छी हो या खराब, हमें आभारी होना चाहिए कि हमें अपने जीवन में दोस्त, परिवार, दो वक्त की रोटी और सर पर छत तो है। और उससे भी जरूरी भगवान ने हमें अगर सामान्य बनाया है तो हमें सदा अपने जीवन के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। क्योंकि न जाने ऐसे कितने लोग हैं जो शारीरिक अक्षमताओं के कारण कितनी तकलीफों और यातनाओं का सामना करते हैं।

आज हम बात कर रहे हैं 16 वर्षीय अश्मीत भटनागर की। अश्मीत की कहानी है एक बच्चे के संघर्ष और उसके जीत की कहानी है। रोजमर्रा की सभी कठिनाइयों के बावजूद कैसे मुस्कान के साथ जीवन का सामना करना पड़ता है। सभी चुनौतियों के बावजूद, इस युवा ने सीबीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में 93.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है।
जयपुर के रहने वाले अश्मीत एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। अश्मीत को एक ऐसी बीमारी है कि वो बैठ नहीं सकते 16 साल के अश्मीत को जॉइंट मायोजिटिस ओसिफिशन्स है, जिसकी वजह से या तो वो खड़े रह सकते हैं या फिर लेट सकते हैं। उन्होंने अपने सारे एग्जाम भी खड़े होकर दिए थे।

दअरसल एक बार बचपन में ही उन्हें डीपीटी टीका दिया गया था। यूँ तो इस टीकाकरण का इस्तेमाल डिप्थीरिया, पेटसुसिस ( खांसी) और टेटनस को रोकने में मदद करता है, लेकिन अश्मीत को यह टीका रिएक्शन कर गया और नतीजतन उनके कूल्हे की हड्डियों में गांठ पड़ गई। इसके बाद अश्मीत को एक सर्जरी से भी गुजरना पड़ा, जिसकी प्रक्रिया में उनके कूल्हे सख्त और कठोर हो गई। इस कारण ना तो वे बैठ पाते हैं ना ठीक से चल पाते हैं। ऐसी परिस्थियों में भी अश्मीत ने अपनी 10वीं की परीक्षा खड़े होकर दी और सफलता हासिल की है।

अश्मीत जयपुर के मानसरोवर स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते हैं। वह खड़े रहकर क्लास अटेंड करते हैं और स्कूल प्रशासन ने उनके लिए एक खास कुर्सी भी बनवाई है, ताकि वह खड़े रहकर भी परीक्षा में भाग ले सके।

अश्मीत की टीचर रंजना का कहना है कि “इतनी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अश्मीत अन्य सामान्य बच्चों की तरह ही व्यवहार करता है। वह बहुत ही मेहनती और आज्ञाकारी है। वह स्कूल का हर लेक्चर अटेंड करता है, जिसके लिए उसे करीब 12 घंटे खड़े रहने पड़ते हैं।”

सांकेतिक तस्वीर ( रिजल्ट देखते छात्र )

अश्मीत के पिता सुमित भटनागर एक प्राइवेट कंपनी में काम करते है। उनका कहना है कि जब अश्मीत एक साल का था तो उन्हें डीपीटी टीका दिया गया, तो एक गांठ बन गई थी और जब उसके लिए सर्जरी करवाई तो उनके कूल्हे कठोर हो गए। उन्होंने कहा कि “अश्मीत को भले ही कोई शारीरिक दिक्कत हो, लेकिन वो दिमाग से बहुत स्ट्रॉन्ग है। उसे शारीरिक दिक्कतें होने के बाद भी क्रिकेट, बैडमिंटन और शतरंज पसंद है और फोटोग्राफी में इंट्रेस्ट है। अश्मीत ने 11वीं कक्षा में कॉमर्स विषय चुना है और वह बड़ा होकर सरकारी अधिकारी बनना चाहता है।”

अश्मीत के ज़ज्बे को देख सच में लगता है कि नामुमकिन कुछ भी नहीं, बस जरूरत है तो बुलंद इरादों की।

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