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गूगल में सालाना 1 करोड़ का पैकेज पाने वाली इस लड़की की मेहनत ने उसे बनाया कामयाब

सामान्य परिवेश में रही, सामान्य स्कूल से पढ़ी, सामान्य परिवार में पली, एक लड़की को पुरुष प्रधान समाज में जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पिता से जिद करनी पड़ती है तो सफलता मिलना तो अवश्यंभावी होता है। पटना की मधुमिता शर्मा ने इन सभी परिस्थितियों का सामना करते हुए इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके विश्व की सबसे बड़ी सर्च कंपनी गूगल में सालाना एक करोड़ का पैकेज प्राप्त करके अपनी अभूतपूर्व सफलता का परचम लहरा दिया है।

विश्‍व की सबसे बड़ी सर्च कंपनी गूगल को ही चुना

मधुमिता ने गूगल के स्विटजरलैंड ऑफिस में बतौर टेक्निकल सॉल्युशन इंजीनियर ज्वाइन किया है। इससे पहले दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियां अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और मर्सिडीज से भी उन्हें ऑफर मिले हैं। लेकिन मधुमिता ने गूगल ज्वाइन करने का ही मन बनाया।

बचपन से ही पढ़ाई की तरफ था रूझान

मधुमिता की प्रारंभिक शिक्षा पटना के डीएवी पब्लिक स्‍कूल (वाल्‍मी) से हुई। उन्होंने 10वीं कक्षा में 86 और 12वीं कक्षा में 88 फीसदी अंक हासिल किए थे. इसके बाद आर्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (जयपुर) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद एपीजी बेंगलुरु में प्लेसमेंट हुआ। स्कूल की पढ़ाई के दिनों में मधुमिता को मैथ और फ़िजिक्स और भौतिकी ज्यादा पसंद था। साथ ही डिबेट कंपीटीशंस में भी वह बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। शुरुआत में मधुमिता आईएएस बनना चाहती थीं, हालांकि बाद में उन्होंने इंजीनियरिंग को अपना करियर बनाया।

पिता और परिवार से मिली प्रेरणा

The hardest decision ever taken, when your dream asked for a biggest sacrifice to do. Moment to leave everything back here for a new beginning and experience. #Auf Wiedersehen

Posted by Madhumita Sharma on 5 मे 2018

मधुमिता के पिता सत्येंद्र कुमार आरपीएफ के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर हैं और उनकी मां चिंता देवी गृहिणी हैं। मधुमिता का सपना एक बड़ी कंपनी में काम करने का था। पिछले साल उन्होंने भारत और विदेश में कई कंपनियों के लिए अप्लाई किया था और ऑनलाइन टेस्ट भी दिया था। इसी प्रक्रिया में उन्‍हें अमेजॉन से 24 लाख का, मर्सिडिजी से 23 लाख और माइक्रोसाफ़ट कंपनी से 18 लाख के पैकेज के साथ अपाइंटमेंट लैटर भी मिले लेकिन गूगल में चयन होने का मधुमिता को पूरा भरोसा था सो उन्‍होंने अपनी नजर गूगल पर ही रखी। इंटरव्‍यू के सात चरणों में अपने आत्‍मश्विास और मेहनत से सफलता पाने वाली मधुमिता को गूगल ने फरवरी 2018 में चयन कर लिया था। मधुमिता के लिए  गूगल में काम करना सपने पूरे होने जैसा है। उनका मानना है कि लक्ष्य निर्धारण के साथ दृढ़ संकल्प हो तो आइआइटी जैसे संस्थानों से शिक्षा ग्रहण किए बिना भी बड़े मुकाम को हासिल किया जा सकता है। हालांकि कॉलेज के दिनों में बड़े बड़े सपनों की बात जब भी वो करती थीं तो उनके दोस्‍त सपनों से बाहर निकलने की नसीहत देते थे। लेकिन इरादे मजबूत हों तो सपनों को पूरा होना ही पड़ता है।

भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम रहे प्रेरणा स्‍त्रोत

मधुमिता अपने माता-पिता और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा (आइकॉन) मानती है। उनकी लिखी किताबें और उनकी बायोग्राफी पढ़ने का उन्‍हें बहुत शौक है। पिता सुरेंद्र शर्मा आरपीएफ हाजीपुर में सहायक कमांडेंट हैं। मां चिंता देवी एक कुशल होम मेकर हैं। मधुमिता के पिता ने बेटी को इच्‍छा को देखते हुए उसे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने दी थी अन्‍यथा यह कहकर पहले तो मना ही कर दिया था कि इंजीनियरिंग का क्षेत्र लड़कियों के लिए नहीं होता। लेकिन आज अपने इस निर्णय के लिए मधुमिता के पिता गर्व से फूले नहीं समाते। भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है तो बहन इंदौर से मेडिकल की तैयारी कर रही है। मधुमिता के पिता के अनुसार उनके खानदान में पहली बार उनकी बेटी ही विदेश जा रही है।

मधुमिता की कहानी प्रेरणा है युवा वर्ग के लिए विशेषतौर पर लड़कियों के लिए जो बड़े सपने देखना चाहती हैं। 

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