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कंप्यूटर, इंटरनेट और एक साधारण आइडिया, बेडरूम में बैठे-बैठे बना ली 600 करोड़ की कंपनी

हर व्यक्ति का बचपन रंगों भरे स्कूल के दिनों के साथ शुरू होता है। नए दोस्त, सीखने को ढेर सारी नई बातें और ढेर सारे आगे बढ़ने के अवसर के बीच थका देने वाली क्लासेस का क्रम और पहाड़ों जैसे लगने वाले होमवर्क का एक लंबा सिलसिला। सब के जीवन में कुछ नायाब शिक्षक आते हैं तो कुछ कड़े अनुशासन वाले।

स्कूल के दिन जीवन के सबसे बेशकीमती दिनों में से एक होते हैं, यह दिन हर किसी के नसीब में होने चाहिए पर वास्तव में हर एक को यह सौभाग्य नहीं मिलता। हमारे आसपास ऐसे कितने ही बच्चे होते हैं जिनके नसीब में स्कूल जाना लिखा ही नहीं होता।

पीट कैशमोर कहते हैं, “मैंने कंप्यूटरों के इस्तेमाल से अपने आप पढ़ना शुरू कर दिया; मेरा प्रयास यह होता था कि मैं जितना हो सके उतना सीख लूं।“ पीट कैशमोर की 13 वर्ष की उम्र में अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ, जिसकी वजह से वे स्कूल जा नहीं पाए। 32 वर्षीय पीट स्कॉटलैंड के बांचोरी से आते हैं, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए, डिजिटल मीडिया फर्म मैशेबल की स्थापना की।

इन्होंने अपना सारा समय केवल इंटरनेट पर ब्राउज़िंग करते हुए बिताया। इन्हें ब्लॉग्स पढ़ने और ढूंढने में आनंद आता था। वे अपने दोस्तों से कट गए थे और इसकी भरपाई के लिए उन्होंने कम्प्यूटर से दोस्ती कर ली, जहाँ दुनिया भर का ज्ञान छिपा था। वे हमेशा से वेब और उसकी उस शक्ति के कायल थे जो हर व्यक्ति के लिए ढेरों अवसरों का संसार खोल देता है, और वह भी बिना किसी भेदभाव के।

19 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना खुद का ब्लॉग शुरू करने का सोचा और तभी से एक प्रभावशाली टेक्नोलॉजी ब्लॉग का जन्म हुआ। मैशेबल की शुरूआत 2005 में उनके घर के बेडरूम से हुई। इसकी शुरूआत मुख्यधारा के दर्शकों के लिए टेक्नोलॉजी को समझाने के लिए बने एक छोटे से परियोजना के रूप में हुआ था। घर से त्रस्त हुआ बच्चा इंटरनेट के जरिये पैसे कमाने की कोशिश कर रहा था।

पीट कहते हैं, “ मेरा ज़्यादा किसी से संपर्क नहीं था और न ही मैं सिलिकॉन वैली में था, मुझे एक बाहरी व्यक्ति रूप जाना जाता था और यही सब मेरे लिए फायदेमंद स्थिति थी क्योंकि यहाँ एक विशाल मार्केट था जो यह जानना चाहता था कि सबसे अच्छे गैजेट्स कौन से हैं और कैसे फेसबुक, ट्विटर और दूसरी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।”

यहाँ तक कि उन्होंने अपने माता-पिता को भी इसके बारे में नहीं बताया था परन्तु फिर भी वे गंभीर थे। वे ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहकों को पाना चाहते थे। हर दिन वे आगे आने वाले दिन का रिकॉर्ड तोड़ते थे। आज मैशेबल एक सोशल मिडिया न्यूज़ साइट है जहाँ हर महीने 23 मिलियन पाठक होते हैं।

पीट को जल्द ही महसूस हो गया कि इंग्लैंड में उनके लिए उतने विजिटर नहीं हैं जितना वे चाहते हैं। तब उन्होंने अपने सोने के टाइमिंग को ही बदल डाला और अमेरिका के प्राइम टाइम में घंटों काम करते। जल्द ही उन्होंने अपनी लिस्ट में बहुत से पाठकों का इजाफ़ा कर लिया।

वे मात्र कुछ ही घंटे सो पाते थे और दिन में 10 आर्टिकल लिख लेते थे। उनका दिन पूरी तरह से व्यस्त रहता था। हर दिन जब वे अपने पाठकों के रेकॉर्ड को टूटते देखते, वे ख़ुशी से झूम उठते।

पीट कहते हैं, “2008 तक मैं मैशेबल के एक भी पाठक से नहीं मिला था।” इनसे उन्हें और अधिक प्रोत्साहन मिलता था और अपने पाठकों से मिलने के सपने को वे महसूस करते थे। 2008 में सेन फ्रांसिस्को के एक इवेंट में पीट को अचानक ही मैशेबल के पाठकों से मिलने का मौका मिला। उनके लिए यह समय बड़ा ही उत्सुकता और प्रेरणा भरा था।

पॉपुलर ब्लॉग के सीईओ और संस्थापक पीट कहते हैं, “बहुत सारे लोग अलग-अलग तरह की रोमांचक चीजें कर रहे थे और वे चाहते थे कि पूरी दुनियां को अपनी मुट्ठी में कर लें परन्तु सच में जो ऐसा चाहते थे उनके पास वहां तक पहुंचने का अच्छा प्लान भी था और उस रास्ते में चलने का हौसला भी।”

पीट की संपत्ति लगभग 95 मिलियन डॉलर अर्थात 600 करोड़ रुपये की है। टाइम मैगजीन्स की लिस्ट में दुनिया के शीर्ष 100 लोगों में उनका नाम है, फोर्ब्स के टॉप 25 वेब सेलेब्स में उनका नाम है और 2009 में हफ्फिंगटन पोस्ट के टॉप 10 गेम चेंजर्स में इनका नाम शामिल है।

पीट बाहर से तो मस्त मौला लगते हैं किंतु आज तक अपने देश के लिए वह पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्हें टेक वंडर किड से लेकर ब्रिटन ऑफ द ईयर में से एक तक के खिताब से नवाजा जा चुका है। घर की चारदीवारी के भीतर अपना पूरा बचपन बिता देने की बाध्यता भी उन्हें अपनी स्वयं की नियति खुद लिखने से रोक नहीं सकी।

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