, ,

बीकॉम कर चुकी आरती ठेले पर चाय बेचती है ताकि अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सके

संघर्षो की अग्नि पर तपकर जो सफलता हासिल करते हैं सच मानिए वो वही लोग होते हैं जो इतिहास में अपनी अलग पहचान रखते हैं। हमारे आसपास भी न जाने ऐसे कितने लोग होंगे जो लाख मुसीबतें आने के बाद भी अपने लक्ष्य से नहीं डगमगाते और निरंतर आगे बढ़ने की उनकी कोशिश जारी रहती है।

हमारी आज की कहानी भी एक ऐसी ही बहादुर लड़की की है जिसने अपने लक्ष्य की राह में आने वाली तमाम चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रही हैं और लोगों के लिए प्रेरणा देने वाली उम्मीद की एक किरण है।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में रहने वाले आरती की। आरती का शिक्षा के प्रति समर्पण ऐसा है कि वह चाय बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। इतना ही नहीं आरती अपने साथ ही अपने दो जुड़वाँ छोटे भाइयों लव और कुश की पढ़ाई-लिखाई को लेकर भी बहुत सजग है।

आरती अपने परिवार के साथ मुहल्ला नवापुरा में रहती है। उसके पिता का पैर खराब हो चुका है और मां भी गंभीर बीमारी से ग्रसित है। ऐसे में परिवार की बड़ी बेटी होने की वजह से सारी जिम्मेदारी आरती के कंधे पर ही टिकी है।परिवार के जीवनयापन का कोई स्थाई आर्थिक स्रोत नहीं है फिर भी आरती ने अपने दोनों भाइयों का दाखिला केंद्रीय विद्यालय में करवाया है।

स्वाभिमान की सच्ची तस्वीर आरती अपना और परिवार का खर्च चलाने के लिए अफीम कारखाने के पास चाय बेचती है। साथ ही घर का काम और पढ़ाई भी करती है। कुछ समय पहले ही आरती ने सहजानंद कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की है।

आरती उस वक्त सुर्खियों में आई जब केंद्रीय दूरसंचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने उसकी चाय की दुकान पर जाकर चाय पी और उसे सरकारी स्कॉलरशिप के तहत 40,000 रुपये भी प्रदान किए।  कुछ दिनों पूर्व जब केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर जिले में लाइफ लाइन एक्सप्रेस से इलाज के औपचारिक उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए पहुँचे उस दौरान उनकी मुलाकात आरती से हुई। दरअसल इससे पहले उनके निजी सचिव सिद्धार्थ राय ने उन्हें आरती के बारे में बता चुके थे।

आरती एक स्वाभिमानी लड़की है उसने कहा कि “वह चाहती थी कि मंत्री जी उसके टी स्टाल पर आकर चाय पिएं” और मनोज सिन्हा ने भी इसे स्वीकार किया और जब गाजीपुर दौरे पर आए तो उन्होंने आरती से मुलाकात की और उसकी बनाई हुई चाय भी पी।

मनोज सिन्हा अफीम कारखाने के सामने आरती के चाय के ठेले पर पहुँचे और ठेले के बगल में ही लगी बेंच पर बैठकर उन्होंने चाय का आनंद लिया। चाय के पैसे देते हुए उन्होंने कहा कि वह आरती की इच्छानुसार पढ़ाई पूरी कराने में पूरी सहायता करेंगे। वह इस मौके पर वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे और हर कोई हैरान था कि इतने बड़े मंत्री अपना प्रोटोकॉल तोड़ कर एक छोटे से सड़क किनारे लगे चाय के ठेले पर क्यों आए लेकिन जब पता चला कि वे आरती से मिलने गए थे तो सभी को उनकी सोच पर गर्व अनुभव हुआ।

वाकई में हमारे देश में आरती जैसी स्वाभिमानी लोग हार मानकर बैठ जाने वालों के लिए सच्ची प्रेरणास्रोत हैं।

आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें

आपका कमेंट लिखें