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पत्र लिखने की खोई हुई कला को पुनर्जीवित कर रहा है बंगलुरु का यह अनोखा स्टार्टअप

सदियाँ गुजरी समय बदला तकनीकें विकसित हुई नए दौर की नयी कहानी की शुरुआत हुई। लेकिन इन सब में भावनाएं सिमटने लगी, लोग पास रहते हुए भी भावनात्मक बंधनों की कमी अनुभव करने लगे, चिट्ठियों के दौर खत्म से होने लगे। कभी दादादादी की बातों में सुना करते थे चिट्ठी और खतों की बातें और आपको याद होगा 1989 में आई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के एक गानेकबूतर जा जा जासुनने वालों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी थी। प्यार और उसका इज़हार तो लोग उन दिनों में भी किया करते थे लेकिन अपने प्यार का इज़हार करने के लिए उनकी मदद को फेसबुक था और ना ही व्हाट्सएप्प जैसे ऐप। ऐसे में उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ख़तों की मदद लेनी पड़ती थी। जिसके माध्यम से अपने दिल की भावनाओं को चिट्ठियों के माध्यम से पहुँचाया जाता था। लेकिन समय के साथ खतों की वो दुनिया खत्मसी होने लगी और आज एक ऐसा दौर आया जब खतों की बातें किस्से-कहानियां बन गयी।

लेकिन कहते हैं ना कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। आज की पीढ़ी ने भी अल्फाजो में लिखी भावनाओं को जाना, तभी तो खतों के दौर को फिर से जीवित करने के लिए बेंगलुरु के युवा इंजीनियर अंकित अनुभव उनके दोस्तों ने एक ऐसी ब्लॉग साईट शुरू की जहाँ से कोई भी व्यक्ति उनकी मदद से अपनी पसंद की चिट्ठियां को लिखवाकर अपने प्रियजन तक अपना संदेश पहुँचा सकता है।


अंकित ने अपने स्टार्टअप से बीते दिनों को मानों फिर से जीवित कर दिया हो। उन्होंने केनफ़ोलिओज़ से विशेष बातचीत में बताया कि “वैसे तो खत अब गुजरे ज़माने की बात हो चली है और आज सोशल मीडिया के जमाने में तो अच्छे भले शब्द भी शार्ट कट में लिखे जाने लगे हैं। लेकिन आज भी लोग ये मानते हैं कि चिट्ठियों में जो प्रेम और अपनापन नज़र आता था आज सोशल मीडिया के दौर में वो बात नहीं। इसलिए चिट्ठी लिखने की परंपरा को जीवित रखने के लिए हमने ब्लॉग साईट शुरू की।”

बात उस दौर की है जब अंकित बोर्डिंग स्कूल में पढ़ा करते थे और हर शनिवार उन्हें एक खत लिखना होता था जो उनके माता-पिता को भेजा जाता था। बस तब ही से अंकित को खतों में अपने मन की बात लिखना अच्छा लगने लगा। अंकित  बताते हैं कि “मैं और मेरे दोस्त एक टेक्नोलॉजी कंपनी में काम किया करते थे। छुट्टियों में जब हम तीनों दोस्त मिला करते तो सोचते कि इस रोबोटिक दौर में भी लोगों को कुछ ऐसा दिया जाए जो सीधा उनके दिल तक पहुँच सके। उनकी भावनाओं को शब्दों में बदल सके। हम सभी दोस्तों को बचपन से ही चिट्ठियां लिखने का शौक था तो हमने सोचा की क्यों ना एक ऐसी ब्लॉग साईट बनाई जाए, जहाँ हम चिट्ठियों के माध्यम से लोगों की भावनाओं का आदान प्रदान कर सके। इस काम की शुरुआत हमने शौक के तौर पर की थी जो आज एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुकी है।

साल 2015 में अंकित और उनके साथियों ने अपना ब्लॉग शुरू किया और उसमें लिखा कि अगर किसी को किसी भी प्रकार की चिट्ठी लिखवानी हो तो हमें बताएं हम आपके बताये पते पर चिट्ठी लिख कर भेजेंगे। शुरुआत अच्छी रही और करीब एक सप्ताह में उन्हें 140 रिकवेस्ट आई। लोग जानना चाहते थे कि वे किस भाषा में खत लिखते हैं? कितने दिन में खत पहुंचेगा तथा इसकी पेपर क्वालिटी कैसी होगी आदि। लोगों के अच्छे रिस्पॉन्स ने अंकित और उनके तीन दोस्तों का मनोबल बढ़ाने में कामयाब रहा। उन्हें विश्वास हो गया कि आज इस व्हाट्सएप्प, फेसबुक और सोशल मीडिया के बदलते दौर में भी लोगों में चिट्ठी का अपना अलग और अनोखा महत्व है। अंकित कहते हैंलोगों की अच्छी और सकारात्मक प्रतिक्रिया देख के हमारा आत्मविश्वास बढ़ा और लोग भी बहुत अधिक दिलचस्पी लेने लगे। लोगों की मांग को ध्यान में रखकर हमने 6 से 7 महीने इस काम पर और अधिक रिसर्च की।

साल 2016 में अंकित की टीम ने द इंडियन हैंडरिटेन लेटर कॉरपोरेशन के नाम से अपनी साईट की शुरुआत की। आज उनकी साईट पर प्रतिदिन 100 रिकवेस्ट आती है, उन लोगों की जो खतों के जरिए अपने मन की बातें कहना चाहते हैं। 100 रिकवेस्ट में से लगभग 70 रिकवेस्ट तो केवल प्रेम पत्र की ही आती है।

अंकित बताते हैकई बार इनके पास ऐसी रिक्वेस्ट भी आती है कहा जाता है कि हमारी गर्लफ्रेंड के लिए ख़त लिख दो लेकिन हम उसका पता नहीं बता पाएंगे। ऐसे आधी अधूरी सूचना से उस ख़त को सही जगह पहुँचाने में अनुभव की टीम को खासा परेशानी उठानी पड़ती है। सबसे ज्यादा रिक्वेस्ट प्रेम पत्र की होती और उसके बाद माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी को ख़त लिखने की अपील की जाती है। अंकित की टीम को ग्राहक सिर्फ ये बताता है कि लेटर किस विषय पर लिखना है और किसे भेजना है तब और वे 2.50 रु. प्रति शब्द के हिसाब से चार्ज करते हैं और यदि ग्राहक उन्हें कंटेंट लिखकर देता है, तो वे उसे 1 रु. प्रति शब्द के हिसाब से चार्ज करते हैं। क्योंकि डिजिटली कंटेंट को भी इन्हें मैनुअली ही लिखना पड़ता है। ये निजी खतों के अलावा कम्पनियों द्वारा ग्राहक को भेजने के लिए भी चिट्ठियां लिखते हैं और खास बात यह है कि चिठ्ठी लिखवाने वाले व्यक्ति की समस्त निजी जानकारियां गुप्त और पूर्ण रूप से सुरक्षित रखी जाती है।

अंकित अपने काम के विषय में बात करते हुए कहते हैं कि “यदि हमारी सोच पक्की और इरादे मजबूत हों तो हम किसी भी दिशा में आगे बढ़ने में सफल हो सकते हैं। सब से पहले हमें खुद पर भरोसा करना होगा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना होगा। तभी हम मंजिल को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

अंकित की टीम पूरे विश्व में कार्यरत है और अनेक भाषाओं में ख़तों को लिखने का कार्य करती है, साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं में चिट्ठियां लिखने की सुविधा भी अंकित की साईट उपलब्ध करती है। अंकित जैसे युवा और उनकी टीम आज के युग में भी भावनाओं को शब्दों में बदलकर लिखना बख़ूबी जानते हैं। वाकई यदि परम्पराओं का सम्मिश्रण इस तरह ही होता रहे तो वो दिन दूर नहीं जब प्रत्येक कला फिर से जीवित हो जाएगी।

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